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लोकसभा चुनाव 2019 : अररिया में यादव मतदाता और ध्रुवीकरण पर रहेगी नजर

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अररिया लोकसभा सीट का परिणाम यादव वोटों के विभाजन और ध्रुवीकरण पर टिका हुआ है। महागठबंधन उम्मीदवार सरफराज आलम और एनडीए उम्मीदवार प्रदीप कुमार सिंह दोनों के लिए यादव वोट बहुत अहम हैं। दोनों प्रत्याशियों ने यादव वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।

यहां करीब 44 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। 56 फीसदी हिंदू में 15 फीसदी यादव हैं। जबकि पिछड़ा, अतिपिछड़ा और महादलित सब मिलाकर 28 फीसदी वोटर हैं। इसमें सबसे अधिक अतिपिछड़ा हैं। जाहिर है यह तबका यहां के चुनाव में बड़ा असर डालेगा। भाजपा के प्रदीप कुमार सिंह भी अतिपिछड़ा वर्ग गंगई से आते हैं। लगातार दो बार हारने के बावजूद उन्हें भाजपा से टिकट मिलने का यह बड़ा कारण है। 

वहीं 13 प्रतिशत सवर्ण वोटर हैं। महागठबंधन जहां ‘माय’ समीकरण को साधने में लगा है, वहीं एनडीए उसमें सेंधमारी करने में। यादव वोटरों में सेंधमारी के लिए एनडीए सभी हथकंडे अपना रहा है। यादव वोटरों के गढ़ नरपतगंज में एनडीए के नेता लगातार कैंप कर रहे हैं। वहीं फारबिसगंज में नरेंद्र मोदी भी सभा कर चुके हैं। दोनों ही प्रत्याशियों का मानना है कि इस बार पलड़ा उनकी ओर झुका हुआ है। दूसरी ओर, महागठबंधन यादव वोटों को बिखरने से रोकने के अलावा महादलित वोटरों को साधने की जुगत में है। अगर ऐसा हो जाता है तो 

महागठबंधन दूसरों के लिए बेहद कठिन चुनौती साबित हो सकता है। महादलित बाहुल्य क्षेत्रों में पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की कई सभाएं हो चुकी हैं। दूसरी ओर अपने समीकरण बैठाने में लगा एनडीए महागठबंधन की इस प्रयास को नाकाम करने की लगातार कोशिश कर रहा है। लेकिन अंतिम फैसला यादव वोटरों का रुख ही तय करेगा, इस बात की जानकारी दोनों गठबंधनों को है। 

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  • Web Title:lok sabha elections 2019 araria third phase polls yadav voters and polarization will be key factor