Lok Sabha Election Result 2019: कोसी में एनडीए ने महागठबंधन से छीनीं दोनों सीटें
मोदी लहर का दबदबा कोसी क्षेत्र में भी रहा। कोसी क्षेत्र की मधेपुरा और सुपौल सीट को एनडीए ने महागठबंधन से छीन लिया है। दोनों लोकसभा क्षेत्र में महागठबंधन के वोट बैंक में बिखराव का लाभ एनडीए के जदयू...

मोदी लहर का दबदबा कोसी क्षेत्र में भी रहा। कोसी क्षेत्र की मधेपुरा और सुपौल सीट को एनडीए ने महागठबंधन से छीन लिया है। दोनों लोकसभा क्षेत्र में महागठबंधन के वोट बैंक में बिखराव का लाभ एनडीए के जदयू प्रत्याशी को मिला। 2014 में मोदी लहर के बावजूद कोसी क्षेत्र में राजद सुप्रीमो का दबदबा बरकरार रहा था। इसका असर विधानसभा चुनाव पर पड़ने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
मधेपुरा लोकसभा सीट राजनीति के दिग्गज लालू यादव और शरद यादव का गढ़ माना जाता रहा है। 1991 से शरद यादव इस सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं। नौ चुनाव में चार बार इस सीट पर जीत दर्ज की है। 1998 से 2014 तक यह क्षेत्र लालू और शरद के बीच राजनीतिक लड़ाई का केन्द्र बना रहा। पहली बार राजद के टिकट पर शरद चुनाव लड़े लेकिन मोदी लहर के सामने टिक नहीं पाये। शरद की हार के पीछे जाप के राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की उम्मीदवारी को माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि यादव बहुल इस सीट पर माई समीकरण के वोट बैंक में बिखराव हुआ और उसका लाभ जदयू प्रत्याशी को मिला।
महागठबंधन के कब्जे से छीना सुपौल
जदयू प्रत्याशी दिनेश चन्द्र यादव पहली बार मधेपुरा से चुनाव लड़े और सफलता मिली। सीएम से विवाद के बाद शरद यादव जदयू छोड़ लालू के साथ आए थे। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह बिहार के मुख्यमंत्री ने चुनाव प्रचार के दौरान मधेपुरा में कैंप किया। 2014 में मोदी लहर के बावजूद सुपौल सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी रंजीत रंजन ने जीत दर्ज की थी। लेकिन मधेपुरा की तरह यह सीट भी महागठबंधन के कब्जे से निकल गयी। चुनाव की घोषणा से लेकर मतदान तक सुपौल का चुनाव कनेक्शन मधेपुरा क्षेत्र से जुड़ा रहा।
राजद नहीं चाहता था पप्पू शरद के खिलाफ लड़ें
मधेपुरा सीट पर राजद नहीं चाहती थी कि पप्पू शरद के खिलाफ चुनाव लड़ें। बताया जा रहा है कि मधेपुरा के चलते सुपौल में राजद समर्थकों का वैसा समर्थन नहीं मिला,जैसा मिलना चाहिए। परिसीमन के बाद बनी सुपौल सीट पर यह तीसरा चुनाव था।
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