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Lok sabha election Result 2019- नालंदा- चलेगा तीर या घनघनाएगा फोन, फैसला आज

कौन जीतेगा और किसकी होगी हार की चर्चा पर गुरुवार को विराम लग जाएगा। जिले में लगातार तीसरी बार चलेगा ‘तीर’ या इस बार घनघनाएगा ‘फोन’, इसका फैसला गुरुवार को हो जाएगा। इसके लिए शहर के नालंदा कॉलेज में स्ट्रांग रूम बनाया गया है। वहां मतगणना की सारी तैयारी पूरी कर ली गई है। अब केवल लोगों को समय का इंतजार है। 

सुबह आठ बजे से गणना का काम शुरू हो जाएगा। पहले राउंड का परिणाम नौ बजे तक आने की उम्मीद है। जिले में कुल 35 प्रत्याशी होने के कारण तीन ईवीएम लगाए गए थे। अधिक ईवीएम होने के कारण मतगणना का काम धीमा हो सकता है। एक तो अधिक ईवीएम ऊपर से पहली बार लगा वीवीपैट के कारण भी परिणाम के लिए देर तक प्रत्याशियों व मतदाताओं को इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, 11 से 12 बजे तक रुझान आने की उम्मीद जतायी जा रही है। कुल मतों की गिनती 18 से 24 राउंड में की जाएगी। डीएम योगेन्द्र सिंह ने बताया कि नालंदा कॉलेज स्थित मतगणना केंद्र की सभी व्यवस्था कर ली गई है। सख्त सुरक्षा घेरे के बाद वज्रगृह में ईवीएम रख दी गई है। मतों की गिनती सभी विधानसभाओं की एक साथ चलेगी। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के मतों की गिनती 14 टेबल पर होगी। सातों विधानसभा क्षेत्रों की मतगणना नालंदा कॉलेज के अलग-अलग भवनों में होगी। नालंदा संसदीय क्षेत्र में कुल 2,248 बूथ बनाये गये थे। नालंदा कॉलेज में स्ट्रांग रूम की देखरेख के लिए सेंट्रल पुलिस व बिहार पुलिस की तैनाती की गयी है। चारों तरफ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन की तैनाती गयी गयी है।

24 राउंड तक जा सकती है मतों की गिनती
कम बूथ वाले विधानसभा क्षेत्र में मतों की गिनती 18 राउंड और ज्यादा बूथों वाले विधानसभा क्षेत्र में मतों की गिनती 24 राउंड तक जा सकती है। डीएम योगेन्द्र सिंह ने बताया कि संसदीय क्षेत्र के सातों विधानसभा क्षेत्रों की मतगणना एक साथ शुरू होगी। सबसे कम राजगीर में 293 बूथ हैं। इसी प्रकार, अस्थावां में 294, इस्लामपुर में 305, हरनौत में 330 हिलसा में 322, नालंदा में 322, और सबसे अधिक बूथ बिहारशरीफ विधानसभा में 382 हैं।

10 लाख 30 हजार 929 मतों की होगी गिनती 
उन्होंने बताया कि सबसे पहले पेपर पोस्टल बैलेट की गिनती की जायेगी। इसके बाद ईवीएम में बंद 10 लाख 30 हजार 929 मतों की गिनती की जायेगी। इसमें अस्थावां विधानसभा के 1,29,253, बिहारशरीफ के 1,73,160, राजगीर के 1,40,773, इस्लामपुर के 1,41,918, हिलसा के 1,46,372, नालंदा के 1,48,480, हरनौत के  1,50,973 मत शामिल हैं। 

विश्व का पहला आवासीय व सबसे बड़ा नालंदा विश्वविद्यालय होने से यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही शिक्षार्थियों का निवास स्थान रहा है। वहीं, मगध साम्राज्य की पहली राजधानी रहे राजगृह के कारण यह धरती राजनीतिक रूप से भी उर्वरा रही है। वर्ष 1957 में कैलाशपति सिंह को छोड़ अब तक स्थानीय लोग ही नालंदा लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। जवाहर लाल नेहरू व इंदिरा गांधी के करीबी और प्रिय माने जाने वाले लाल सिंह त्यागी के अलावा प्रो. सिद्धेश्वर प्रसाद, रामशरण सिंह, डॉ. रामराज सिंह, श्यामसुंदर सिंह जैसे दिग्गज कांग्रेसियों के कारण यह क्षेत्र कांग्रेसियों के मजबूत किले के रूप में स्थापित था। वर्ष 1985 में नीतीश कुमार के हरनौत से विधायक चुने जाने के बाद जिले की राजनीति में कांग्रेस का दबदबा घटने लगा। हरनौत विधानसभा के बाढ़ लोकसभा क्षेत्र में पड़ने से भले ही नीतीश का क्षेत्र नालंदा लोकसभा में न था, लेकिन, नालंदा निर्माण मंच व टाल विकास मोर्चा के बूते वे यहां की राजनीति में गहरी पैठ बनाने की कोशिश करते रहे। 

दो संसदीय क्षेत्र में था बंटा
वर्ष 1952 में पटना लोकसभा क्षेत्र में जिले के छह विधानसभा क्षेत्र (नालंदा, अस्थावां, राजगीर, हिलसा, इस्लामपुर व बिहारशरीफ) तो हरनौत व चंडी विधानसभा क्षेत्र बाढ़ लोकसभा में पड़ते थे। नये परिसीमन के बाद चंडी विधानसभा क्षेत्र को खत्म करते हुए इसकी संख्या सात कर दी गयी और सभी नालंदा लोकसभा क्षेत्र में शामिल कर लिये गये। वर्ष 1957 से नालंदा लोकसभा क्षेत्र अलग हुआ। 

1989 में बाढ़ से बने सांसद
वर्ष 1989 में बाढ़ लोकसभा से नीतीश भी पहली बार सांसद बने। वर्ष 1991 के चुनाव में अपना समर्थन विजय यादव को देकर कांग्रेस के किले को ढाहने में कामयाबी हासिल की। कुर्मी रैली के कुछ दिनों बाद बिहारशरीफ में समर्थकों की बैठक बुलाकर जॉर्ज फर्नांडिस की मदद से लालू प्रसाद यादव से अलग होने की घोषणा की। नवंबर 1994 में राजगीर में चिंतन शिविर कर समता पार्टी का गठन किया। 

वर्तमान सांसद : कौशलेंद्र कुमार
राजनीतिक परिपक्वता जार्ज के चुनाव लड़ने के बाद आयी

कौशलेन्द्र कुमार में जॉर्ज फर्नांडिस के यहां से चुनाव लड़ने के बाद राजनीतिक परिपक्वता आयी। इस्लामपुर क्षेत्र में उनकी अच्छी पैठ थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार ने रामस्वरूप प्रसाद को यहां के उत्तराधिकारी के रूप में उतारा था, लेकिन उनके विश्वास पर खरे न उतरने के कारण नया चेहरे की तलाश हो रही थी। इसी क्रम में 2009 और 2014 में नीतीश ने उन्हें जदयू का उम्मीदवार बनाया।

कौन जीते कौन हारे 

2014
जीते: कौशलेन्द्र कुमार, जदयू,     321982
हारे: सत्यानंद शर्मा, लोजपा,    312355

2009
जीते:कौशलेन्द्र कुमार, जदयू,     299155
हारे: सतीश कुमार, लोजपा,    146478

2006 
जीते:रामस्वरूप प्रसाद, जदयू,    171592
हारे: डॉ. अरुण कुमार, निर्दलीय,    54859

2004 
जीते:नीतीश कुमार, जदयू,    471310
हारे:डॉ.कु. पुष्पंजय, एलजेएनएसपी, 368914 

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