Lok Sabha Election fifth phase Know percentage of vote cast of different Lok Sabha seats - लोकसभा चुनाव 2019 पांचवां चरण: जानिए कहां पर कुल कितने फीसदी पड़े वोट DA Image

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लोकसभा चुनाव 2019 पांचवां चरण: जानिए कहां पर कुल कितने फीसदी पड़े वोट

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यूपी: 14 सीट, कुल मतदान: 57.93

सीट: धौरहरा

मतदान: 64.70%

मैदान में: रेखा वर्मा (भाजपा), अरशद इलियास सिद्दीकी (सपा), जितिन प्रसाद (कांग्रेस) 

2014 के नतीजे: 68.06% 

भाजपा की रेखा वर्मा यहां से जीतीं। 

क्यों खास: इस सीट का इतिहास भले ही बहुत पुराना न हो, लेकिन अहमियत बहुत है। इसकी एक वजह जितिन प्रसाद का यहां से खड़ा होना है, जो पिछली बार चौथे स्थान पर आए थे। जितेंद्र प्रसाद के पुत्र जितिन को एक समय कांग्रेस में भविष्य के बड़े नेताओं में गिना जाता था। पिछले दिनों उनके भाजपा से जुड़ने की अफवाह ने माहौल काफी गर्म कर दिया था। यह सीट 2008 में परिसीमन के बाद शाहजहांपुर से अलग होकर बनी।

सीट: मोहनलालगंज

मतदान : 63.75 %

मैदान में : कौशल किशोर (भाजपा), आरके चौधरी(कांग्रेस), सीएल वर्मा (बसपा)

2014 के नतीजे:  60.75%

भाजपा के कौशल किशोर यहां से जीते। 

क्यों खास: यह सीट 1962 में वजूद में आई थी। लखनऊ और उन्नाव से सटी हुए मोहनलालगंज लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है। एक दौर में मोहनलालगंज कांग्रेस का मजबूत किला रहा है, लेकिन वक्त के साथ सपा ने इस सीट पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली थी। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में भाजपा यहां से कमल खिलाने में कामयाब हो गई थी। 

सीट: लखनऊ

मतदान: 54.29%

मैदान में : राजनाथ सिंह (भाजपा), पूनम सिन्हा (सपा), आचार्य प्रमोद कृष्णम (कांग्रेस) 

2014 के नतीजे:  53.02%

भाजपा के राजनाथ सिंह यहां से जीते।

क्यों खास% हाई प्रोफाइल लखनऊ सीट भाजपा के लिए सुरक्षित माने जाती रही है। यहां से गृहमंत्री राजनाथ सिंह के सामने कभी दोस्त रहे शत्रुघ्न   सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा भी चुनौती पेश कर रही हैं। 90 के दशक में भाजपा के कद्दावर नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने लखनऊ संसदीय सीट से मैदान में उतरकर जीत का जो सिलसिला शुरू किया था फिर वह नहीं थमा। 

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सीट: रायबरेली

मतदान: 53.60%

2014 के नतीजे: 51.74 % 

कांग्रेस की सोनिया गांधी यहां से जीतीं।

मैदान में: सोनिया गांधी (कांग्रेस), दिनेश प्रताप सिंह (भाजपा), सपा-बसपा ने कांग्रेस को दिया समर्थन

क्यों खास: देश की हाई प्रोफाइल लोकसभा सीटों में से एक रायबरेली सीट है। ये इलाका कांग्रेस का मजबूत दुर्ग माना जाता है। यहां से पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी ने जीत हासिल कर कांग्रेस का खाता खोला था। महज तीन बार यहां कांग्रेस के सिवा कोई दूसरी पार्टी जीत सकी है। वह भी तब जब यहां से ‘गांधी परिवार’ के किसी सदस्य ने चुनाव नहीं लड़ा। मौजूदा समय में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी सांसद हैं। रायबरेली सुर्खियों में तब आई जब देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी यहां से चुनावी मैदान में उतरीं। 1967 में इंदिरा गांधी यहां से सांसद बनी। 

सीट: अमेठी

मतदान:53.48%

2014 के नतीजे: 52.38% 

कांग्रेस के राहुल गांधी इस सीट से जीते। 

मैदान में : राहुल गांधी (कांग्रेस), स्मृति ईरानी (भाजपा)

सपा-बसपा - कांग्रेस के समर्थन में 

क्यों खास: अमेठी राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण लोकसभा क्षेत्र है। अमेठी जिला बसपा सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर 1 जुलाई 2010 को अस्तित्व में लाया गया था। गौरीगंज अमेठी जिले का मुख्यालय है। शुरुआत में इसका नाम छत्रपति साहूजी महाराज नगर था परन्तु इसे पुनः बदलकर अमेठी कर दिया गया है। यह गांधी-नेहरू परिवार की कर्मभूमि है। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू व उनके नाती संजय गांधी, राजीव गांधी तथा उनकी पत्नी सोनिया गांधी ने इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है। 

 

सीट: बांदा

मतदान: 60.79%

2014 के नतीजे: 53.59% 

भाजपा के भैरो प्रसाद मिश्रा यहां से जीते। 

मैदान में : आरके सिंह पटेल (भाजपा), बालकुमार पटेल (कांग्रेस), श्याम चरण गुप्ता( सपा) 

क्यों खास: भगवान राम की तपोभूमि व महर्षि वामदेव की साधना स्थली बांदा-चित्रकूट संसदीय सीट पर इस बार मतदाता ‘स्वतंत्र’ होकर मतदान करेंगे। इस बार भी जातीय गणित के आधार पर सभी पार्टियां अपनी चुनावी नैया पार करने की कोशिश में हैं। दुर्दांत डाकू ददुआ के फरमान पर पंचायत से लेकर लोकसभा के चुनावों में माननीयों के भाग्य का फैसला होता रहा। वर्ष 1984 से शुरू यह सिलसिला 22 जुलाई 2007 को ददुआ की मौत पर थमा पर फिर 2014 तक आंशिक असर रहा। यह पहला मौका होगा जब इस संसदीय सीट के दोनों जिलों में इतना बड़ा डाकू नहीं बचा जो चुनाव प्रभावित कर सके।

 

सीट: फतेहपुर

मतदान: 55.99%

2014 के नतीजे: 58.55% 

भाजपा की निरंजन ज्योति यहां से जीतीं। 

मैदान में : निरंजन ज्योति (भाजपा), सुखदेव प्रसाद वर्मा (बसपा), राकेश सचान (कांग्रेस)

क्यों खास: फतेहपुर लोकसभा सीट गंगा और यमुना के बीच बसा हुआ है। यहां कांग्रेस से लेकर सपा, बसपा और भाजपा सहित जनता दल जीत दर्ज कर चुकी है। फतेहपुर लोकसभा सीट पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह की विरासत रही है। पर यहां पिछले चुनाव में भाजपा का कब्जा हो गया। 2011 के जनगणना के मुताबिक यहां 87.77 फीसदी ग्रामीण और 12.23 फीसदी शहरी आबादी है।  

 

सीट: कौशांबी

मतदान : 53.87%

2014 के नतीजे: 52.38%

भाजपा के विनोद कुमार सोनकर यहां से जीते

मैदान में : विनोद सोनकर (भाजपा), इंद्रजीत सरोज (सपा), शैलेंद्र कुमार (जनसत्ता दल) 

क्यों खास: बौद्ध भूमि के रूप में प्रसिद्ध कौशांबी यूपी का एक जिला है। कौशांबी, बुद्ध काल की परम प्रसिद्ध नगरी है, जो वत्स देश के राजा उदयन की राजधानी थी। ऐतिहासिक दृष्टि से भी कौशांबी काफी महत्वपूर्ण है। राजनीतिक रूप से भी यह सीट महत्वपूर्ण माना जाता है। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। इस लोकसभा सीट के अंतर्गत प्रतापगढ़ विधानसभा की दो सीटें आती हैं। इस सीट पर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का काफी राजनीतिक दखल है। ऐसे में 2019 के लोकसभा चुनाव में सभी की निगाहें कौशांबी सीट पर हैं। 

 

सीट: बाराबंकी

मतदान:  63.82%

2014 के नतीजे: 62.06% 

भाजपा की प्रियंका सिंह रावत यहां से जीती थीं।

मैदान में : उपेंद्र सिंह रावत (भाजपा), राम सागर रावत (सपा), तनुज पूनिया (कांग्रेस)

क्यों खास: बाराबंकी सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। मौजूदा समय में इस सीट पर भाजपा का कब्जा है, जबकि एक दौर में कांग्रेस का मजबूत गढ़ हुआ करता था। लेकिन वक्त के साथ सपा और भाजपा इस इलाके में अपना आधार मजबूत करने में सफल रही हैं। बाराबंकी विविधताओं से भरा इलाका है। आज़ादी के आंदोलन में इस इलाके ने अग्रणी भूमिका निभाई थी। 

 

सीट: फैजाबाद

मतदान: 61.02%

2014 के नतीजे: 58.82%

भाजपा के लल्लू सिंह यहां से जीते थे

मैदान में : लल्लू सिंह (भाजपा), आनंद सेन (सपा), निर्मल खत्री(कांग्रेस)

क्यों खास: उत्तर प्रदेश की फैजाबाद लोकसभा सीट पर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की निगाह है। अयोध्या में राममंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद के चलते फैजाबाद लोकसभा सीट राजनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मौजूदा समय में इस सीट पर भाजपा का कब्जा है। लेकिन सपा-बसपा गठबंधन के बाद भाजपा के लिए इस सीट पर वापसी करना एक बड़ी चुनौती बन गई है।  

 

सीट: बहराइच

मतदान: 56.46%

2014 के नतीजे: 57.02%

भाजपा की सावित्री बाई फुले यहां से जीती थीं। 

मैदान में: अक्षयबर लाल (भाजपा), शब्बीर बाल्मिकी (सपा), सावित्री बाई फुले (कांग्रेस)

क्यों खास: यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यह क्षेत्र महान स्वतंत्रता सेनानी रफी अहमद किदवई की जन्म और कर्मस्थली के रूप में जाना जाता है। पंडित जवाहर लाल नेहरू के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल दो मुस्लिम नेताओं में अबुल कलाम आजाद के अलावा अहमद भी शामिल थे। 2011 की जनगणना के अनुसार, बहराइच जिले की कुल आबादी 34.9 लाख है। 

 

सीट: कैसरगंज

मतदान: 53.56%

2014 के नतीजे: 55.11% 

भाजपा के बृजभूषण सिंह यहां से जीते थे। 

मैदान में: बृजभूषण सिंह (भाजपा), विनय कुमार पांडे (कांग्रेस), चंद्रदेव राम यादव (बसपा)

 क्यों खास: कैसरगंज संसदीय क्षेत्र बहराइच की दूसरी लोकसभा सीट है। नेपाल के निकटवर्ती कैसरगंज सीट 1952 में गोंडा वेस्ट सीट के तहत थी जिस पर जनसंघ की शकुंतला नायर ने जीत हासिल की थी। 1957 में कैसरगंज लोकसभा सीट बनने के बाद वह 1967 और 1971 में भी इस सीट से जीत हासिल करने में कामयाब रहीं। 1989 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार यहां पर जीत हासिल की और रुद्र सेन चौधरी सांसद बने। 1991 में भी भाजपा ने जीत हासिल की, लेकिन इसके बाद बेनी प्रसाद वर्मा 1996 से 2004 तक लगातार 4 बार चुनाव जीतने में कामयाब रहे। 

सीट: गोंडा

मतदान:52.58%

2014 के नतीजे: 51.07% 

भाजपा के कीर्तिवर्धन सिंह यहां से जीते थे। 

मैदान में: कीर्तिवर्धन सिंह (भाजपा), कृष्णा पटेल (कांग्रेस), विनोद कुमार (सपा)

क्यों खास: घाघरा नदी के किनारे बसा यह शहर देवीपाटन मंडल में आता है। पुरातन इतिहास के साथ-साथ इस धरती का महत्व आजादी की लड़ाई में भी रहा। ब्रिटिश सरकार की ओर से गोंडा की जिला जेल में काकोरी कांड में शामिल रहे क्रांतिकारी राजेंद्रनाथ लाहिड़ी को तय तिथि से दो दिन पहले ही 17 दिसंबर 1927 को फांसी पर लटका दिया गया था। देश की पहली महिला मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी सुचेता कृपलानी का कभी संसदीय क्षेत्र रहा गोंडा का ऐतिहासिक महत्व है। 

 

सीट: सीतापुर

मतदान: 63.39%

मैदान में : राजेश वर्मा (भाजपा), कैसर जहां (कांग्रेस), नकुल दुबे (बसपा)

2014 के नतीजे: 66.25%

भाजपा के राजेश वर्मा यहां से जीते। 

क्यों खास: सीतापुर नैमिषारण्य तीर्थ के कारण प्रसिद्ध है। पत्थर शिवाला, किला महमुदाबाद, चक्र तीर्थ नमिश, विकास भवन यहां के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं। यहां एक प्रसिद्ध नेत्र अस्पताल भी है। दिल्ली से सीतापुर की दूरी 567.9 किलोमीटर है और लखनऊ से 91.6 किलोमीटर है।

 

 

बिहार: 05 सीट, कुल मतदान: 57.76

बिहार की पांच लोकसभा सीटों सीतामढ़ी, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, हाजीपुर एवं सारण के लिए सोमवार को छिटपुट हिंसा के बीच मतदान हुआ। सारण, सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर क्षेत्र में कुछ केंद्रों पर ईवीएम खराब होने से मतदान विलंब से शुरू हुआ। इस चरण में पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की प्रतिष्ठा दांव पर है। सारण में लालू के समधी चंद्रिका राय मैदान में हैं तो हाजीपुर से रामविलास के भाई पशुपति कुमार पारस।

 

सीट: सीतामढ़ी

मतदान: 56.92

मैदान में:  अर्जुन राय (राजद), सुनील कुमार पिंटू(जदयू), जासेम अहमद (बसपा)

2014 में मतदान:: 57.18%

रालोसपा के रामकुमार शर्मा ने राजद के सीताराम यादव को हराया था।

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सीट: मधुबनी

मतदान: 55.24

मैदान में: अशोक कुमार यादव(भाजपा), बद्री कुमार पुर्बे(वीआईपी), शकील अहमद(निर्दलीय)

2014 में मतदान:: 52.86%

भाजपा के हुकुमदेव नारायण यादव ने राजद के अब्दुल बारी सिद्दिकी को पराजित किया था।

 

सीट: मुजफ्फरपुर

मतदान: 61.27

मैदान में: अजय निषाद(भाजपा), राजभूषण चौधरी(वीआईपी), स्वर्णलता देवी(बसपा)

2014 में मतदान:: 61.17%

भाजपा के अजय निषाद ने कांग्रेस के अखिलेश प्रसाद सिंह को शिकस्त दी थी।

 

सीट: सारण 

मतदान: 57.70

मैदान में: राजीव प्रताप रूडी(भाजपा), चंद्रिका राय (राजद), श्योजी राम (बसपा)

2014 में मतदान:: 56.10%

भाजपा के राजीव प्रताप रूडी ने राजद की राबड़ी देवी को हराया था।

 

सीट: हाजीपुर

मतदान: 57.79

मैदान में: पशुपति कुमार पारस (लोजपा), शिवचंद्र राम (राजद), उमेश दास (बसपा), 

2014 में मतदान:: 54.85%

लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान ने कांग्रेस के संजीव प्रसाद टोनी को भारी मतों से हराया था। 

 

 

झारखंड: 04, कुल मतदान: 65.12

 झारखंड में दूसरे चरण और देश में पांचवें चरण के तहत राजधानी रांची, खूंटी, कोडरमा और हजारीबाग समेत कुल चार संसदीय सीटों के लिए वोट डाले गए। इस दौर में राज्य में कुल 61 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इस चरण में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, बाबूलाल मरांडी, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय और केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा के भाग्य का फैसला ईवीएम मशीनों में बंद हो गया। 

 

 

सीट: कोडरमा

मतदान: 65.88

मैदान में: बाबूलाल मरांडी(झाविमो), अन्नपूर्णा देवी(भाजपा), राजकुमार यादव(भाकपा)

2014 में मतदान:: 62.51%

भाजपा के रविंद्र कुमार राय ने सीपीआई के राजकुमार यादव को हराया। 

सीट: रांची

मतदान: 64.22

मैदान में: सुबोधकांत सहाय(कांग्रेस), संजय सेठ(भाजपा), विद्याधर प्रसाद(बसपा)

2014 में मतदान:: 63.68%

भाजपा के रामटहल चौधरी ने कांग्रेस के सुबोधकांत सहाय को हराया।

 

सीट: खूंटी

मतदान: 65.52

मैदान में: अर्जुन मुंडा(भाजपा), कालीचरण मुंडा(कांग्रेस), इंदुमती मुंडू (बसपा) 

2014 में मतदान:: 66.28%

भाजपा के कड़िया मुंडा ने जेकेपी के एनोस एक्का को हराया।

 

सीट: हजारीबाग 

मतदान: 65.04

मैदान में: जयंत सिन्हा(भाजपा), गोपाल प्रसाद साहू (कांग्रेस), विनोद कुमार (बसपा)

2014 में मतदान:: 63.67%

भाजपा के जयंत सिन्हा ने कांग्रेस के सौरभ नारायण सिंह को हराया।

 

वीआईपी सीटों का हाल

प्रत्याशी सीट पार्टी 2014 2019

दिनेश त्रिवेदी बैरकपुर तृणमूल 81.66 71.28

जॉय मुखर्जी उलुबेरिया भाजपा 81.87 77.57

प्रसून बनर्जी हावड़ा तृणमूल 74.77 67.59

महबूबा मुफ्ती अनंतनाग पीडीपी 28.84 2.38

वीरेंद्र कुमार टीकमगढ़ भाजपा 50.12 63.52

प्रह्लाद पटेल दमोह भाजपा 55.22 64.31

राज्यवर्धन सिंह राठौड़ जयपुर ग्रामीण भाजपा 59.62 64.85

अर्जुनराम मेघवाल बीकानेर भाजपा 58.39 59.41

 

इन सीटों पर पिछली लोकसभा का गणित

कुल सीट 51

भाजपा 39

तृणमूल कांग्रेस 7

कांग्रेस 2 

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