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लोकसभा चुनाव 2019: जानिए, झारखंड की गोड्डा संसदीय सीट के बारे में

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झारखंड की गोड्डा संसदीय सीट पर धार्मिक-सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत के बीच सियासत परवान चढ़ रही है। राज्य की 14 लोकसभा सीटों में एक गोड्डा कई मायनों में अलग है। धार्मिक दृष्टि से जहां द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा वैद्यनाथ और 51 शक्तिपीठों में एक हार्द्रपीठ देवघर में है तो दुमका जिले में बाबा बासुकीनाथ हैं।

झारखंड, बिहार और बंगाल के अलावा पूर्वोत्तर भारत का अकेला ऐसा स्थान है, जहां द्वादश ज्योतिर्लिंग है। यहां के सांस्कृतिक विरासत की अलग पहचान है। आर्थिक क्षेत्र की बात करें तो रत्नगर्भा गोड्डा संसदीय क्षेत्र में एशिया का सबसे बड़ा कोल ब्लॉक है। राजनीतिक नजरिए से देखें तो संताल की तीन लोकसभा सीटों में यही एकमात्र सामान्य है। संताल की बाकी दो सीट दुमका और राजमहल अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित हैं।

गोड्डा संसदीय क्षेत्र तीन जिलों में बंटा है। गोड्डा, देवघर और दुमका जिले इसके अंतर्गत आते हैं। गोड्डा जिले की तीन विधानसभा सीटें गोड्डा, महगामा और पोड़ैयाहाट, जबकि देवघर की दो विधानसभा सीट देवघर और मधुपुर सहित दुमका जिले की एक विधानसभा सीट जरमुंडी गोड्डा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं।

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पूर्वोत्तर भारत की आध्यात्मिक राजधानी:

गोड्डा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत देवघर को पूर्वोत्तर भारत की आध्यात्मिक राजधानी कहा जाता है। वैद्यनाथ धाम में सालोंभर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। यह अकेला ऐसा धार्मिक स्थान है, जहां पर शिव और शक्ति एक साथ विराजमान हैं। आंकड़ों की मानें तो सालभर में चार करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का जुटान बाबानगरी में होता है। एक माह तक लगातार चलने वाला श्रावणी मेला देशभर में प्रसिद्ध है। इसी प्रकार यहां के प्राचीनतम पंजीकृत मेलों में श्रावणी के समान भादो मेला और उसके बाद महाशिवरात्रि मेला और बसंत पंचमी मेला है। बाबा दरबार शादी, उपनयन और मुंडन संस्कार के लिए भी श्रद्धालुओं का एक बड़ा केंद्र है। देवघर को आध्यात्मिक राजधानी इसलिए भी कहा जाता है कि यहां बांग्लादेश के पाबना से आकर श्रीश्री ठाकुर अनुकूलचन्द्र जी ने सत्संग नामक आश्रम की स्थापना की थी। इसी प्रकार योगगुरु परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती की तपोभूमि रिखिया योगपीठ भी देवघर के मोहनपुर में मौजूद है। इसी प्रकार ब्रह्मर्षि बालानंद आश्रम भी देवघर में अलग पहचान रखता है।

कृषि पर आश्रित हैं लोग: गोड्डा को जनजाति संताल की भूमि माना जाता है। गोड्डा संसदीय क्षेत्र के लोग मूलत: कृषि पर निर्भर करते हैं। यहां की प्रमुख फसलों में गेहूं और मक्का शामिल हैं।

पिछड़ी जाति, मुस्लिम व ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र: गोड्डा संसदीय क्षेत्र पिछड़ी जाति के साथ मुस्लिम और ब्राह्मण बाहुल्य है। पिछड़ी जातियों और मुस्लिमों का दबदबा इस सीट पर रहा है। अनुसूचित जाति 11 फीसदी से अधिक और अनुसूचित जनजाति की आबादी 12 फीसदी से अधिक है। वहीं, मुस्लिम और ब्राह्मणों की भी बड़ी आबादी गोड्डा संसदीय क्षेत्र में वास करती है।

चार विधानसभा पर भाजपा का कब्जा:

गोड्डा संसदीय क्षेत्र अंतर्गत पड़ने वाले तीन जिलों की छह विधानसभा सीटों में एक देवघर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। 2014 के विधानसभा चुनाव में संसदीय क्षेत्र की छह में से चार सीट पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। सुरक्षित देवघर सीट से वर्तमान में भाजपा के विधायक नारायण दास हैं, वहीं मधुपुर से भाजपा के ही राज पलिवार ने दूसरी बार जीत दर्ज की। दुमका जिले के जरमुंडी विधानसभा के दो प्रखंड सारवां और सोनारायठाढ़ी देवघर जिले में हैं, वहां से कांग्रेस के बादल पत्रलेख विधायक हैं। गोड्डा विस सीट से भाजपा के अमित मंडल व महगामा से अशोक भगत विधायक हैं, जबकि पोड़ैयाहाट से झाविमो के प्रदीप यादव विधायक हैं।

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भाजपा-कांग्रेस में होती रही है कड़ी टक्कर:

गोड्डा लोकसभा सीट कभी कांग्रेस की पारंपरिक सीट हुआ करती थी। इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर होती रही है। इन दोनों दलों के प्रत्याशियों के बीच तीसरे दल झाविमो के प्रत्याशी ने भी गत दो चुनाव में उपस्थिति दर्ज कराई है।

हालांकि वह दोनों ही चुनावों में तीसरे स्थान पर रहे। यह पहला मौका होगा जब कांग्रेस की ओर से कोई प्रत्याशी गोड्डा सीट से नहीं उतारा गया है। इस बार कांग्रेस महागठबंधन में शामिल है और झाविमो की ओर से प्रत्याशी दिया गया है।

पंडित रामराज जजवाड़े थे प्रथम सांसद :

गोड्डा जब स्वतंत्र लोकसभा सीट के रूप में नहीं जाना जाता था और अखण्डित बिहार का अंग था, उस वक्त देश में हुए पहले चुनाव में संताल परगना प्रमंडल क्षेत्र से पहले सांसद के रूप में देवघर के पुरोहित समाज के पंडित रामराज जजवाड़े निर्वाचित हुए थे। 1962 और 1967 के चुनाव में इस सीट से कांग्रेस के प्रभुदयाल जीते। 1971 व 1977 के चुनाव में जगदीश मंडल विजयी रहे । जगदीश मंडल 1971 में कांग्रेस और 1977 में भारतीय लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़े थे। 1980 और फिर 1984 में मौलाना समीउद्दीन ने जीत दर्ज की थी। 1989 में इस सीट पर भाजपा के जनार्दन प्रसाद यादव जीते थे। 1991 में झामुमो के सूरज मंडल विजयी घोषित किए गए थे। पुन: गोड्डा सीट पर भाजपा की वापसी हुई।1996, 1998 व 1999 का चुनाव भाजपा के टिकट पर जगदंबी प्रसाद यादव जीते। 2000 का चुनाव भाजपा के ही टिकट पर प्रदीप यादव जीते। 2004 में अपनी पारंपरिक सीट पर कांग्रेस ने वापसी की। प्रत्याशी फुरकान अंसारी चुनाव जीते लेकिन उसके बाद एक बार फिर भाजपा ने गोड्डा सीट पर अपनी पुनर्वापसी की। 2009 और 2014 में पार्टी प्रत्याशी डॉ. निशिकांत दुबे ने जीत दर्ज की। 2019 में जहां भाजपा प्रत्याशी डॉ. निशिकांत दुबे जीत की हैट्रिक लगाने की जुगत भिड़ा रहे हैं, वहीं एक बार इस सीट से भाजपा के ही टिकट पर जीतने वाले महागठबंधन प्रत्याशी प्रदीप यादव उन्हें पटखनी देने की चाल चल रहे हैं।

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पर्यटन के क्षेत्र में विशेष स्थान :

गोड्डा लोकसभा क्षेत्र का पर्यटन में विशेष स्थान है। देवघर में राज्य का इकलौता त्रिकुट रोप-वे है। मोहनपुर प्रखंड में पड़ने वाला त्रिकुट जिले का सबसे ऊंचाई वाला पहाड़ है। त्रिकुट पहाड़ को मयूराक्षी नदी के उदगम स्थल के रूप में जाना जाता है। मयूराक्षी नदी देवघर से निकल पूर्व दिशा की ओर दुमका होकर गुजरती है। इसी प्रकार तपोवन पर्वत, नंदन पहाड़ सहित अन्य कई पर्यटन स्थल हैं। बंगाल के लोग यहां बड़ी संख्या में पर्यटन के लिहाज से पहुंचते हैं।

एशिया की सबसे बड़ी ओपन पिट है :

गोड्डा संसदीय क्षेत्र स्थित ईस्टर्न कोलफील्ड्स के अंतर्गत एशिया की सबसे बड़ी ओपन पिट राजमहल यहां है। इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग कार्यरत हैं। हालांकि कोयले का लाभ यहां नहीं मिल पाया है। गोड्डा में ही ललमटिया कोयला खदान है। ललमटिया के कोयले से कहलगांव और फरक्का बिजली परियोजना का संचालन होता है। गोड्डा के कोयले के उपयोग को लेकर बांग्लादेश से करार हुआ है। गोड्डा में बिजली का उत्पादन कर उसे बांग्लादेश बेचा जाएगा।

कुल मतदाता- 16,91,410

पुरुष मतदाता -8,92,930

महिला मतदाता-7,98,474

पिछले दो चुनावों में बढ़ा हार-जीत का अंतर :

गोड्डा लोस सीट पर 2009 और 2014 में प्रत्याशियों की हार-जीत का अंतर बढ़ा। 2014 में भाजपा प्रत्याशी निशिकांत दुबे को 3 लाख 80 हजार और फुरकान अंसारी को 3 लाख 19 हजार वोट मिले थे। प्रदीप यादव को 1 लाख 93 हजार वोट मिले थे। 2014 में लगभग 65 प्रतिशत मतदान हुआ था। 2009 में भाजपा के निशिकांत दुबे ने कांग्रेस के फुरकान अंसारी को लगभग छह हजार वोटों से मात दी थी। उस चुनाव में प्रदीप यादव तीसरे स्थान पर थे। 2009 और 2014 का चुनाव कांग्रेस और झाविमो ने अलग-अलग लड़ा था। 2009 में झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के पुत्र दुर्गा सोरेन भी मैदान में उतरे थे।

2014 का परिणाम

निशिकांत दुबे, भाजपा 3,80,500

वोट प्रतिशत 36.35

फुरकान अंसारी, कांग्रेस 3,19,818

वोट प्रतिशत 30.47

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  • Web Title:Lok Sabha Election 2019 Know about the Godda parliamentary seat of Jharkhand