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लोकसभा चुनाव 2019: पश्चिम बंगाल में कैलाश और शिवप्रकाश ने किया कमाल

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इस बार लोकसभा चुनावों में सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल को लेकर है। चुनावी हिंसा के बीच यहां अस्सी फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ। भाजपा और तृणमूल के बीच सीधी लड़ाई को बंगाल में बदलाव के तौर पर भी देखा जा रहा है। बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा मात्र दस फीसदी वोट के साथ तीन विधानसभा सीट जीत पाई थी। इसके बाद  राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय और राष्ट्रीय सह-महामंत्री संगठन शिवप्रकाश ने बंगाल में कमाल कर दिया। 

संगठन के माहिर शिवप्रकाश आरएसएस के प्रचारक हैं और संघ से उन्हें 2014 में भाजपा भेजा गया। शिवप्रकाश को भाजपा ने यूपी, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल का संगठन प्रभारी बनाया। यूपी और उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों में शिवप्रकाश की रणनीति कारगर रही। दोनों सूबों में भाजपा को प्रचंड़ बहुमत मिला तो भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें बंगाल पर फोकस करने का निर्देश दिया। बीते एक साल में शिवप्रकाश ने बंगाल में एक हजार से ज्यादा बैठकें की। 

बनाए सभी वर्गों के क्लब
तृणमूल के तिलिस्म को तोड़ने के लिए भाजपा ने बंगाल में अलग अलग वर्गों के क्लब बनाए। नमो शुद्र, कीर्तनिया, राजवंशी, गोरखा और आदिवासी क्लब बनाए गए। इनके साथ सीधे शिवप्रकाश ने बैठक की। छोटी-छोटी बैठकों को हथियार बनाया गया। लोकसभा चुनाव से पहले शिवप्रकाश ने सभी लोकसभा सीटों पर दो-दो दिन बिताए और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया। 

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नही ली कोई सुरक्षा
बंगाल में चुनावों के बीच कई जगहों पर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता भिड़े। इसके बाद भी शिवप्रकाश ने कोई सुरक्षा नहीं ली। खुद को कार्यकर्ताओं से जोड़ने के लिए यह योजना बनाई गई थी। छोटे-छोटे कार्यकर्ताओं के घरों तक भाजपा के बड़े नेता पहुंचे। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कैलाश विजयवर्गीय भी इस मुहीम में जुटे और इससे भाजपा की पैट निचले स्तर तक पहुंची। 

दूसरे दलों में लगाई सेंध
यूपी की तरह बंगाल में भी भाजपा ने दूसरे दलों में सेंध लगाई। भाजपा ने बंगाल में तृणमूल के कद्दावर नेता मुकुल राय को शामिल किया तो अर्जुन सिंह पर भी दांव लगाया। दरअसल वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बंगाल में करीब 17 फीसदी मत हासिल किए थे। इस बार मत प्रतिशत बढ़ाने के लिए सभी स्तरों पर प्रयास किया गया। ऐसे में जनाधार वाले बाहरी नेताओं को भी पार्टी में शामिल किया गया।

तृणमूल की विफलता को बनाया मुद्दा
विधानसभा चुनावों की विफलता के बाद भाजपा ने तृणमूल की विफलता को मुद्दा बनाया। बंगाल में हिंसा के शिकार भाजपा कार्यकरर्ताओं के घर सीधे शिवप्रकाश पहुंचे। इसके साथ पंचायत चुनाव में वोट नहीं डालने को बड़ा मुद्दा बनाया गया। सेव बंगाल के नाम से बड़ा कैंपेन चलाया गया। बंगाल के बाहर देश के दूसरे हिस्सों में रह रहे बंगालियों से संपर्क किया गया। प्रबुद्ध लोगों की बैठक कर ओपनियन बनाने का काम भाजपा ने किया। मुस्लिम तुष्टीकरण और हिंसा में कार्यकर्ताओं की मौत को भाजपा ने चुनाव में मुद्दा बनाया तो जनता का समर्थन भी मिल गया।

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  • Web Title:Lok Sabha Election 2019 Kailash and Shivprakash did great work in West Bengal