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लोकसभा चुनाव 2019: सांसद के पैतृक गांव में बदहाल है स्वास्थ्य और शिक्षा

lok sabha election 2019  health and education is bad in mp s native village

नरकटियागंज शहर से महज छह किलोमीटर की दूरी पर है हरसरी गांव। वाल्मीकिनगर के सांसद सतीशचन्द्र दुबे के इस पैतृक गांव तक सड़क और बिजली पहुंची पर विकास की कई राहों पर अब भी रोशनी नहीं पड़ी है। स्वास्थ्य और शिक्षा की स्थिति अच्छी नहीं है। श्री दुबे वर्ष 2014 में भाजपा के टिकट पर वाल्मीकिनगर से सांसद बने।
  
उनके सांसद बनने के बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी थी। लेकिन आज भी इलाज के लिए लोगों को नरकटियागंज या फिर बेतिया जाना पड़ता है। गांव में एक उपस्वास्थ्य केन्द्र तक नहीं है। एक प्राइमरी स्कूल है। हाईस्कूल के लिए तीन से चार किलोमीटर की दूरी छात्रों को तय करनी पड़ती है।

बेतिया-नरकटियागंज मुख्य सड़क से आधा किलोमीटर की दूरी पर बसे इस गांव की आबादी लगभग ढाई हजार है। हरसरी के समीप का कोईरगांवा चौक कमोबेश छोटे बाजार के रूप में विकसित है। बाजार से पश्चिम दिशा की ओर से हरसरी गांव में जाने का रास्ता है। सड़क तो बनी पर नाली नहीं बनने से बारिश के दिनों में लोगों के घरों में पानी लग जाता है। घरों का गंदा पानी भी सड़क पर बहता है। बहुतेरों के दरवाजे पर ही बड़े गड्ढों में घर के नाले का पानी जमता है। 

बगल के गांव पुरैनिया में पहले से सुविधाएं बहाल
सांसद सतीश चंद्र दुबे के गांव हरसरी से आधा किलोमीटर की दूरी पर है पुरैनिया गांव। यहां के रामायण साह, राजन मिश्रा, लालजी साह, चंद्रमोहन साह, अवधेश कुशवाहा आदि ने बताया कि पहले ही यहां सड़क-बिजली की सुविधा उपलब्ध थी। सांसद बनने के बाद उनके गांव के आसपास विकास हुआ है। लेकिन इस गांव में पानी के लिए लोग आज भी निजी चापाकल व मोटर पर निर्भर हैं। हरसरी गांव के पहले पड़ने वाले दलित बस्ती के फेंकू पासवान, तिलक राम, श्रीचंद पासवान, योगेश्वर पासवान आदि ने बताया कि गांव की जो हालत थी, उसमें बदलाव तो हुआ है। लेकिन गांव से पानी निकालने की व्यवस्था नहीं है। 

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