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लोकसभा चुनाव 2019: पहले चरण की वोटिंग से मिलेगी जनादेश की पहली झलक

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हर दल के दिग्गजों के लगातार चले धुआंधार चुनाव प्रचार के बीच उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों के संग्राम का पहला द्वार कल खुलेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आठ लोकसभा सीटों पर 11 अप्रैल को मतदान के साथ न सिर्फ लोकतंत्र के सबसे बड़े इस पर्व में जन का भी प्रवेश हो जाएगा बल्कि यह सात चरणों में होने वाले मतदान में जनादेश की शुरुआती झलक भी दे जाएगा।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरू हो रहे इस चुनावी संग्राम में हर सियासी पाले की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। यहां पुराने सियासी प्रतीकों की परीक्षा होगी तो जमीन पर दलों के दम का अंदाज भी लगेगा। भाजपा ने यहां पिछली बार क्लीन स्वीप किया था लिहाजा उसे सामने प्रदर्शन दोहराने की चुनौती है तो वहीं सपा-बसपा-रालोद के गठबंधन को साबित करना है कि तिकड़ी में दम है और पश्चिम के जिन समीकरणों को वह खुद के लिए मुफीद मान रहा है या उसे वाकई तीनों दलों ने मिलकर साध लिया है? वहीं मुकाबले तो त्रिकोणीय बनाने में कांग्रेस के लिए भी चुनौती है।

सहारनपुर में शाकुम्भरी देवी की पूजा कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी चुनावी रैलियों की शुरुआत की थी। भाजपा के पास फिलहाल यहां की 8 में से 7 सीटें हैं। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में उसने सभी आठों सीटों पर कब्जा किया था लेकिन 2018 में कैराना सीट पर हुए उपचुनाव में विपक्षी दलों की अघोषित साझा प्रत्याशी के रूप में उतरीं रालोद की तब्बसुम हसन ने भाजपा उम्मीदवार को हरा दिया था। इस बार वह सपा के टिकट पर यहां से खड़ी हैं।

प्रत्याशियों की बात करें तो कांग्रेस कुछ सीटें गठबंधन के लिए राजनीतिक शिष्टाचार के तहत छोड़ रही है और उनमें से दो पहले चरण में ही है। गठबंधन के बीच सीटों के बंटवारे में इस इलाके में ज्यादा सीटों पर बसपा प्रत्याशी हैं। बसपा के पास यहां की 4 सीटे हैं तो सपा और रालोद के पास 2-2 सीटें। रालोद अध्यक्ष अजित सिंह को अपने घर में अपनी जगह फिर से बनानी है। वह मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी राह आसान करने को कांग्रेस ने यहां प्रत्याशी नहीं दिया और उनका सीधा मुकाबला भाजपा सांसद संजीव बलियान से है।

वर्ष 2014 में अजित सिंह बागपत से चुनाव लड़े थे। मुजफ्फरनगर उनके लिए नई सीट है और उनके मुकाबले भाजपा सांसद संजीव बलियान है। भले ही वह गठबंधन के प्रत्याशी हो लेकिन 2014 में कांग्रेस, बसपा और सपा मिलाकर तीनों को मिलाकर इस सीट पर 4,25,288 वोट मिले थे तो भाजपा के संजीव बलियान को 6,53,391 वोट मिले थे। लिहाजा अजित सिंह पर इस प्रदर्शन को और बेहतर करने का दबाव रहेगा। चूंकि दोनों ही प्रत्याशी जाट समाज से आते हैं लिहाजा मुकाबले पर सियासतकारों की नजर रहेगी।

मौजूदा सांसद                                  लोस सीट सांसद

मेरठ                                            राजेन्द्र अग्रवाल

गाजियाबाद                                  जनरल वीके सिंह

गौतमबुद्धनगर                              डॉ. महेश शर्मा

बागपत                                      डॉ.सत्यपाल सिंह

कैराना                                      तबस्सुम हसन

मुजफ्फरनगर                            संजीव बलियान

बिजनौर                                   कुंवर भारतेन्द्र

सहारनपुर                                  राघव लखनपाल

 

प्रमुख दलों के प्रत्याशी, सीट, कांग्रेस गठबंधन, भाजपा

सहारनपुर                           इमरान मसूद फजलुर्रहमान-बसपा राघव लखनपाल

कैराना                                  हरेन्द्र सिंह मलिक तबस्सुम हसन-सपा प्रदीप कुमार

मुजफ्फरनगर --                    अजित सिंह-रालोद संजीव बलियान

बिजनौर                               नसीमुद्दीन सिद्दीकी मलूक नागर-बसपा राजा भारतेन्द्र

मेरठ हरेन्द्र                            अग्रवाल हाजी मो. याकूब-बसपा राजेन्द्र अग्रवाल

बागपत --                             जयंत चौधरी-रालोद सत्यपाल सिंह

गाजियाबाद                         डॉली शर्मा सुरेश बंसल-सपा वी.के. सिंह

गौतमबुद्ध नगर                    डॉ अरविंद सिंह सतवीर-बसपा डा महेश शर्मा

 

प्रत्याशियों के लिए जीत की चुनौती

अजित सिंह ने बेटे जयंत चौधरी के लिए कमोवेश राह आसान करने की कोशिश की है और जयंत के लिए बागपत की सीट गठबंधन से ली है। यहां भी कांग्रेस ने प्रत्याशी नहीं उतारा है। अजित सिंह अपने ही घर में 2014 का चुनाव न सिर्फ हारे थे बल्कि तीसरे नंबर पर रहे थे। यहां उनका सीधा मुकाबला भाजपा के सांसद डा. सत्यपाल सिंह से होगा। कैराना सीट सबसे ज्यादा अहम है क्योंकि उपचुनावों में गठबंधन प्रत्याशी तब्बसुम हसन ने यह सीट भाजपा से झटक ली थी। लिहाजा भाजपा ने यहां से मृगांका सिंह को टिकट न देकर प्रदीप चौधरी पर भरोसा जताया है। सहारनपुर से देवबंद में गठबंधन रैली कर संदेश दे चुका है। पीएम मोदी भी यहां रैली कर चुके हैं। कांग्रेस के इमरान मसूद व भाजपा सांसद राघव लखनपाल के बीच सीधा मुकाबला हो सकता था लेकिन गठबंधन प्रत्याशी बसपा के हाजी फजलुर्रहमान मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।

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  • Web Title:Lok Sabha Election 2019: First phase of voting will be given by voting of first phase