Lok Sabha Election 2019: Challenges for Decision Making for BJP - Lok Sabha Election 2019 : भाजपा के लिए प्रत्याशी तय करने की चुनौती DA Image
13 नबम्बर, 2019|11:11|IST

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Lok Sabha Election 2019 : भाजपा के लिए प्रत्याशी तय करने की चुनौती

भाजपा को करीब आधा दर्जन सीटों पर प्रत्याशी चयन में कठिन परीक्षा का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर उन सीटों को लेकर जहां उसके पुराने और नए सहयोगी अपना दावा ठोंक रहे हैं। सबसे ज्यादा चुनौती गोरखपुर और फूलपुर के लिए है।

झांसी : भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री व पार्टी की कद्दावर नेता साध्वी उमा भारती ने इस बार चुनाव लड़ने से मना कर दिया है। इस सीट पर ब्राह्मणों के बाद पिछड़ी जाति के मतदाता ज्यादा हैं।  सपा-बसपा गठबंधन ने श्याम सुंदर सिंह को टिकट दिया है। भाजपा को गैर यादव पिछड़ी जाति के प्रत्याशी की तलाश है।

संतकबीर नगर : यहां भाजपा सांसद शरद त्रिपाठी अपने क्षेत्र के मेंहदावल के विधायक राकेश सिंह बघेल के साथ जूतमपैजार करने के लिए चर्चा में आए थे। भाजपा शरद का टिकट काटकर कार्रवाई करना चाहती है। दुविधा यह कि शरद पर कार्रवाई करें तो ब्राह्मण नाराज और राकेश बघेल पर करें तो पिछड़ा नाराज। नेतृत्व इस मामले में जातीय समीकरण संतुलन साध कर बीच का रास्ता खोज रहा है।

आजमगढ़ : आजमगढ़ से सपा के अखिलेश यादव चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा यहां ऐसा  प्रत्याशी ढूंढ रही है, जिससे अखिलेश घिर जाएं और वह चुनाव प्रचार के लिए आगे न जा सकें। फिलहाल तो अभी भाजपा में शामिल हुए भोजपुरी गायक निरहुआ इस सीट से प्रत्याशी हो सकते हैं।

देवरिया : 2014 के चुनाव में ब्राह्मण चेहरे कलराज मिश्र चुनाव जीते थे। उन्होंने बसपा के नियाज अहमद को करीब दो लाख 65 हजार वोटों से हराया था। इस सीट पर ब्राह्मण मतदाता खासी तादाद में हैं। 

गोरखपुर
गोरखपुर सीट निषाद व अति पिछड़ी जाति बाहुल्य सीट है। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा यह सीट हार गई थी। इस सीट के लिए भाजपा की निषाद पार्टी से बातचीत चल रही है। 
2014 लोकसभा चुनाव: भाजपा प्रत्याशी योगी आदित्यनाथ ने सपा की राजमती निषाद को करीब 3 तीन लाख 13 हजार मतों से हराया। 
उपचुनाव: भाजपा के उपेंद्र दत्त शुक्ल को सपा के टिकट पर लड़े निषाद पार्टी के प्रवीण कुमार निषाद ने करीब 22 हजार मतों के अंतर से हराया था। 
फूलपुर
2014 में आजादी के बाद पहली बार मोदी लहर में केशव प्रसाद मौर्य भाजपा के टिकट पर जीते। वह उपमुख्यमंत्री बने और उपचुनाव हुआ तो भाजपा हार गई। पिछड़ों और अति पिछड़े इस सीट पर खासी तादाद में हैं। इसलिए इस सीट को दोबारा हासिल करने के लिए भाजपा को प्रत्याशी तय करने में काफी माथापच्ची करनी पड़ रही है।
मैनपुरी
मैनपुरी ऐसी सीट है, जहां भाजपा का अभी तक खाता नहीं खुला। इस बार यहां से सपा-बसपा गठबंधन की तरफ से सपा प्रमुख रहे मुलायम सिंह यादव चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा यहां से भी मजबूत प्रत्याशी की तलाश कर रही है।

करार में उलझी 

इसी तरह मछलीशहर, राबर्ट्सगंज, प्रतापगढ़, घोसी, जौनपुर और भदोही सरीखी सीटें सहयोगी दल अनुप्रिया पटेल की अपना दल, ओमप्रकाश राजभर की सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी और नए सहयोगी बनने की कगार पर निषाद पार्टी के साथ करार में उलझी हुई हैं। 

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