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मैदान के महारथी: जानें संबित पात्रा ने कैसे कुशल वक्ता के तौर पर भाजपा में बनाई अपनी पहचान

bjp spokesperson sambit patra

संबित पात्रा पेशे से तो डॉक्टर हैं, लेकिन उनकी पहचान एक कुशल वक्ता के रूप में बन चुकी हैं। टीवी चैनलों पर होने वाली प्रमुख बहसों में आप अक्सर उन्हें देख सकते हैं। इस बार वह पहली बार लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमाने के लिए उतर रहे हैं। 

भाजपा ने उन्हें ओडिशा की पुरी सीट से उम्मीदवार बनाया है। पहले इस सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लड़ने की चर्चा थी। हालांकि उनके लिए यह चुनौती आसान नहीं है क्योंकि उनका मुकाबला बीजू जनता दल के प्रत्याशी व तीन बार से सांसद पिनाकी मिश्रा से है। यह चुनौती इसलिए भी कड़ी है क्योंकि संबित का पुरी से सीधा संबंध नहीं है। वह ओडिशा में पैदा जरूर हुए, लेकिन उनका अधिकतर समय राज्य से बाहर ही बीता है। ऐसे में विपक्षी इसे मुद्दा बना सकते हैं। 

डॉक्टर संबित पात्रा सर्जन थे और दिल्ली के हिंदूराव अस्पताल में बतौर मेडिकल अफसर नियुक्त भी हुए थे। मगर शुरुआत से ही उनका रुझान राजनीति की तरफ था। नौकरी के साथ-साथ एनजीओ के माध्यम से समाज सेवा करने से उनकी सियासी राह आसान भी होती चली गई। 2006 में ही उन्होंने ‘स्वराज' नामक एनजीओ बनाकर दलितों पर फोकस शुरू कर दिया था। वह बस्तियों में साथी डॉक्टरों के साथ जाकर मेडिकल कैंप लगाया करते थे। दलितों को शिक्षा और सेहत को लेकर जागरूक करते रहे। उन्होंने कुछ साथी डॉक्टरों और पुलिस अधिकारियों को भी जोड़ा। इसी के माध्यम से भाजपा नेताओं से भी उनकी पहचान बढ़ी। चैनलों पर मजबूती से भाजपा का पक्ष रखने की वजह से पार्टी में बहुत ही कम समय में उनका कद बढ़ गया। एक कुशल वक्ता होना उनकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ। 

संबित इससे पहले सिर्फ एक बार ही चुनाव लड़े हैं, पर उसमें उन्हें हार झेलनी पड़ी थी। 2012 के नगर निगम चुनावों में वह दिल्ली के कश्मीरी गेट वार्ड से भाजपा प्रत्याशी थे। मगर कांग्रेस उम्मीदवार हर्ष शर्मा के हाथों उन्हें हार झेलनी पड़ी थी। हर्ष को 4291 जबकि संबित को 2900 वोट मिले थे।

निजी जीवन-
13 दिसंबर, 1974 को ओडिशा के जाजपुर जिले के मंगलपुर गांव में जन्म 
शुरुआती स्कूली पढ़ाई धनबाद से हुई 
2002 में कटक मेडिकल कॉलेज से एमएस की पढ़ाई पूरी की 
2003 में यूपीएससी की परीक्षा पास कर दिल्ली के हिंदू राव अस्पताल में बतौर मेडिकल अफसर तैनात हुए 
ओडिशा में मेडिकल की पढ़ाई करते वक्त एम्स में हुई प्रतियोगिता में उम्दा वक्ता बने 
मेडिकल अफसर की नौकरी के बाद दिल्ली की मलिन बस्तियों में स्वाथ्य कैंप लगाते थे

राजनीतिक जीवन-
एनजीओ और दलितों के लिए काम करते हुए राजनीतिक जमीन तैयार की 
एनजीओ के कार्यों में आने वाले भाजपा नेताओं से नजदीकियां बढ़ीं 
2011 में हिंदूराव अस्पताल की नौकरी से इस्तीफा दिया 
2012 में कश्मीरी गेट में भाजपा टिकट पर पार्षद का चुनाव लड़ा, लेकिन हारे 
भाजपा ने पात्रा को दिल्ली प्रदेश का प्रवक्ता बनाया 
2014 में टीवी चैनलों पर भाजपा की बुलंद आवाज बनकर उभरे 
2017 में ओएनजीसी के स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किए गए 

पहले चुनाव में मिली थी हार-
संबित इससे पहले सिर्फ एक बार ही चुनाव लड़े हैं, पर उसमें उन्हें हार झेलनी पड़ी थी। 2012 के नगर निगम चुनावों में वह दिल्ली के कश्मीरी गेट वार्ड से भाजपा प्रत्याशी थे। मगर कांग्रेस उम्मीदवार हर्ष शर्मा के हाथों उन्हें हार झेलनी पड़ी थी। हर्ष को 4291 जबकि संबित को 2900 वोट मिले थे। 

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