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खगड़िया लोकसभा सीट: यादव बहुल इस सीट पर इस बार यादव प्रत्याशी नहीं

khagaria lok sabha sear 2019

फरकिया में जारी सियासी घमासान के बीच लोगों में यह भी जिज्ञासा है कि इस बार के चुनावी संग्राम में इस बाद बड़ा सवाल यह कि यादव बहुल इस क्षेत्र में यादवों का वोट किसको जायेगा। क्योंकि इस बार  दिनेश चन्द्र यादव मधेपुरा से चुनाव लड़ रहे हैं तो कृष्णा कुमारी यादव चुनाव मैदान में ही नहीं हैं।

खगड़िया के राजनीतिक परिदृश्य से ओझल हैं ये
वर्ष 2014 के संसदीय चुनाव में जदयू के दिनेश चन्द्र यादव 2.20 लाख से अधिक मत लाए थे तो वहीं राजद की कृष्णा कुमारी यादव को 2.37 लाख वोट मिले थे। यादव मतों के बिखराव के कारण लोजपा के चौधरी महबूब अली कैसर की आसान जीत हुई थी। इस बार के चुनाव में ये दोनों महारथी खगड़िया के राजनीतिक परिदृश्य से ओझल हैं। दिनेश चन्द्र मधेपुरा से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं महागठबंधन के वीआईपी कोटे में खगड़िया सीट चले जाने के कारण राजद की कृष्णा को टिकट नहीं मिला। टिकट से वंचित बाहुबली पूर्व विधायक रणवीर यादव की पत्नी कृष्णा और उनके समर्थक खामोश हैं। 
 
खगड़िया के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है 
बताया गया कि खगड़िया के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि यादव बहुल क्षेत्र होने के बावजूद आमने-सामने की लड़ाई में कोई यादव प्रत्याशी नहीं है। यही कारण है कि यादव मतदाता को अपनी ओर खींचने के लिए एनडीए व महागठबंधन दोनों डोरे डाल रहे हैं। इस बार के संसदीय चुनाव का नजारा भी अलग है। जदयू जहां एनडीए के साथ है तो रालोसपा और हम महागठबंधन में शामिल। अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि इसमें बाजी कौन मारता है, लेकिन इसमें दो राय नहीं कि मुकाबला काफी दिलचस्प और कांटे का होगा। परिणाम काफी चौंकाने वाले होंगे।

गठबंधन धर्म पालन करने की मजबूरी
राजनीतिक अदावत के बाद भी राजनेताओं को गठबंधन धर्म पालन करने की मजबूरी होती है। यही कारण है कि अपनी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भुलाकर गठबंधन धर्म का पालन करते हुए जदयू के दिनेश चन्द्र यादव इस बार लोजपा प्रत्याशी चौधरी महबूब अली कैसर के पक्ष में एक चुनावी सभा को संबोधित कर चुके हैं। सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर विस क्षेत्र निवासी दिनेश व चौधरी कैसर विधानसभा के साथ-साथ लोकसभा में भी कई बार आमने-सामने हो चुके हैं। 

चुनाव प्रचार यहां अपने चरम पर
2009 के खगड़िया लोकसभा चुनाव में दिनेश चन्द्र जदयू प्रत्याशी थे तो चौधरी कैसर कांग्रेस के उम्मीदवार। इस चुनाव में दिनेश की जीत हुई थी और कैसर साहब को तीसरे स्थान पर रहना पड़ा था। 2014 में एक बार फिर दिनेश और चौधरी कैसर चुनावी समर में कूदे। लेकिन इस बार भाग्य लोजपा का साथ दिया और कैसर को पहली बार संसद जाने का मौका मिला। इस चुनाव में दिनेश को तीसरा स्थान मिला।  चुनाव प्रचार यहां अपने चरम पर है। मतदाताओं को रिझाने के लिए राजनीतिक दिग्गजों का आना-जाना लगा हुआ है। लेकिन मतदाता अपनी चुप्पी नहीं तोड़ रहे है। यादव मतों को अपनी ओर करने के लिए सभी दल गोलबंदी में लगे हैं। 
 

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  • Web Title:Khagaria Lok Sabha seat: not Yadav candidate from leading parties in this time in Yadav dominated area