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लोकसभा चुनाव 2019: मुस्लिम और यादव बहुल इस सीट पर मुकाबला एनडीए बनाम महागठबंधन

katihar lok sabha seat  fight between nda vs mahagathbandhan

गंगा कोसी संगम तट की धरती कटिहार में एक तरफ पतित पावनी कल-कल निनाद करती उत्तरवाहिनी गंगा है, तो दूसरी तरफ कोसी, महानंदा, बरंडी नदी। बांग्लादेश, पश्चिम बंगाल एवं सीमावर्ती नेपाल से सटे रहने के कारण पूर्वोत्तर भारत में यह महत्वपूर्ण स्थान रखता है। बड़े- बड़े रोचक और ऐतिहासिक तथ्य भी इससे जुड़े हैं। 

पौराणिक मान्यता है कि जब लंकापति रावण सीता का हरण कर लंका ले जा रहे थे उस समय सीता के कमर का हार मनिहारी में गिरा था। इस कारण इस क्षेत्र को कटिहार के नाम से जाना जाता है। बहुतेरे पौराणिक और ऐतिहासिक तथ्यों को समेटनेवाला यह लोकसभा क्षेत्र आज देश भर की नजरों में हॉट सीट बन गया है।
 
मुस्लिम और यादव बहुल इस सीट पर इस बार मुकाबला महागठबंधन प्रत्याशी तारिक अनवर और एनडीए प्रत्याशी दुलालचंद्र गोस्वामी के बीच माना जा रहा है। हालांकि राकांपा प्रत्याशी मो. शकूर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने के प्रयास में लगे हैं।
 
इस सीट को एनडीए और महागठबंधन मुफीद मानता है
एनडीए और महागठबंधन दोनों इस सीट को अपने लिए मुफीद मानता है। महागठबंधन जहां जातीय गोलबंदी के आधार पर इसका दावा करता है, वहीं महागठबंधन राज्य सरकार के कार्यों और अल्पसंख्यकों के लिए चलायी जा रही योजनाओं का हवाला देकर किसी तरह की गोलबंदी से इनकार करता है। कटिहार लोकसभा सीट के महत्वपूर्ण होने का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि बिहार में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव तथा जदयू के राष्ट्रीय महासचिव आरसीपी सिंह ने प्रचार अभियान की शुरुआत इस संसदीय क्षेत्र के बरारी एवं कटिहार से शुरू की। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भी यहां सभा कर चुके हैं, जबकि एनडीए की ओर से जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी और लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान सभा कर चुके हैं। 

बाहरी उम्मीदवारों को भी कटिहार ने अपनाया
1967 से 1991 के बीच कटिहार ससंदीय क्षेत्र बाहरी प्रत्याशियों के लिए काफी उर्वर रहा। 1967 में अखिल भारतीय कांग्रेस के कोषाध्यक्ष सीताराम केसरी ने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में प्रिय गुप्ता को पराजित किया। जबकि 1971 में भागलपुर के नारायणपुर निवासी ज्ञानेश्वर प्रसाद के हाथों श्री केसरी को पराजित होना पड़ा। वहीं वर्ष 1991 में बिहार के तत्कालीन राज्यपाल मो. युनुस सलीम ने जनता दल प्रत्याशी के रूप में भाग्य आजमाते हुए कांग्रेस प्रत्याशी तारिक अनवर को पराजित किया था। 

मुस्लिम और यादव मतदाता निर्णायक
एक अनुमान के अनुसार कटिहार के कुल 16 लाख 53 हजार 351 मतदाताओं में से लगभग 41 फीसदी मतदाता मुस्लिम हैं। इसके अलावा लगभग 11 फीसदी यादव मतदाता हैं। इन दोनों का वोट किसी भी प्रत्याशी की हार-जीत में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा आठ फीसदी सवर्ण, 16 फीसदी वैश्य, 18 फीसदी पिछड़ा और छह फीसदी दलित वोटर हैं। महागठबंधन को मुस्लिम और यादव वोटरों पर भरोसा है। लेकिन अगर मुस्लिम वोटरों को देखा जाय तो इनमें लगभग आधे वोटर शेरशाहवादी समुदाय से आते हैं जिस समुदाय के प्रत्याशी राकांपा के मो. शकूर हैं। 

नौ प्रत्याशी चुनाव मैदान में
तारिक अनवर: कांगेस 
दुलाल चंद्र गोस्वामी: जद यू 
मो शकूर: राकांपा
अब्दुल रहमान: पीपुल्स पार्टी ऑफ़ इंडिया डेमोक्रेटिक 
मरांग हांसदा: निर्दलीय
समीर कु झा: निर्दलीय
वासकी नाथ साह: भारतीय बहुजन कांग्रेस 
शिव नंदन मंडल: बसपा 
गंगा केवट: राजसंपा

2014 में जीत और हार
जीते: तारिक अनवर  (राकांपा) 4,31 ,292 
हारे: निखिल कुमार चौधरी (भाजपा ) 3,16,552

2009 में जीत और हार
जीते : निखिल चौधरी (भाजपा ) 2,69,834
हारे -तारिक अनवर ( राकांपा) 2,55,819
 

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  • Web Title:katihar lok sabha seat: fight between NDA Vs mahagathbandhan in Muslim and Yadav dominated constituency area