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18 सितम्बर, 2020|12:13|IST

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जहानाबाद लोकसभा सीट: साम्यवाद से समाजवाद तक की बात पर हावी रहा है जातिवाद

सोन, पुनपुन और फल्गु नदी से सिंचित वाणभट्ट की धरती सामाजिक रुप से चेतनशील रही है। इसी जागरूकता ने कम्युनिस्टों को मजबूती दी और समाजवाद के फलने-फूलने के लिए भी खाद-पानी मुहैया कराया। हालांकि, जहानाबाद में साम्यवाद से लेकर समाजवाद तक को जातिवाद के ईंधन से ही रफ्तार मिलती रही है। तीन जिलों, जहानाबाद, अरवल तथा गया के छह विधानसभा क्षेत्रों को समेटे  जहानाबाद संसदीय क्षेत्र में वर्ष 1996 के चुनाव तक साम्यवाद का बोलबाला रहा। लेकिन, राजद द्वारा सीपीआई से समर्थन वापस लेते ही वामपंथ धराशायी हो गया। 1998 के बाद से समाजवादी ही एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते और जीतते रहे हैं। एक समाजवाद के पहरुआ नीतीश कुमार हैं तो दूसरे के लालू प्रसाद। भाजपा और कांग्रेस ने जहानाबाद में सहयोगी की भूमिका ही स्वीकार कर ली है। सीपीआई के रामाश्रय प्रसाद सिंह यहां से चार बार सांसद रहे। उनके हारने के बाद किसी भी    सांसद को लगातार दोबारा जीत नसीब नहीं हुई। 

1962 में अस्तित्व में आया क्षेत्र
वर्ष 1962 में जहानाबाद संसदीय क्षेत्र अस्तित्व में आया। जहानाबाद की पहली सांसद बनने का सौभाग्य कांग्रेस प्रत्याशी सत्यभामा देवी को मिला। इसके बाद किसी महिला को यह मौका नहीं मिला। हालांकि, बाद के चुनावों में कोई भी पार्टी महिला प्रत्याशी को उतारने से परहेज करती रही। 2009 में परिसीमन के बाद क्षेत्र में सामाजिक व जातीय समीकरण बदला। वर्ष 1998 से लेकर अब तक हुए पांच चुनावों में तीन बार एनडीए तथा दो बार राजद को जीत मिली है। जहानाबाद से भूमिहार और यादव जाति के प्रत्याशी ही चुनाव जीतते आए हैं। 

लड़ाके सहयोगी की भूमिका में
यादव व भूमिहार बहुल इस क्षेत्र में वर्ष 1977 के चुनाव को छोड़ आमने-सामने के मुकाबले में यादव तथा भूमिहार जाति के नेता ही रहे हैं। एनडीए ने इस बार नया प्रयोग किया है और अतिपिछड़ा समुदाय के चंद्रेश्वर प्रसाद  चंद्रवंशी पर भरोसा जताया है। ऐसे में भूमिहार जो पूर्व के चुनावों में लड़ाकों की भूमिका में रहते थे, वे अब सहयोगी की भूमिका में नजर आएंगे। वहीं राजद, एनडीए तथा वर्तमान सांसद डॉ. अरुण की नजर इसी कारण सबसे अधिक भूमिहार के वोटरों पर है। राजद से सुरेन्द्र प्रसाद यादव चुनाव मैदान में हैं। 

जातीय वोट पर सबकी नजर
जहानाबाद में 19 मई को मतदान होना है। एनडीए व महागठबंधन के नेता बैठकों और जनसंपर्क में बातें तो विकास की कर रहे हैं, लेकिन नजर जातीय रसायन को अपने पक्ष में गाढ़ा करने की है। जो भी गठबंधन विभिन्न जातियों को एकसूत्र में बांधने में सफल होगा, विजय की माला भी उसे ही मिलेगी। एक अनुमान के मुताबिक संसदीय क्षेत्र में साढे तीन लाख यादव, पौने तीन लाख भूमिहार, एक लाख मुसलमान, करीब पांच लाख अतिपिछड़ी जातियां और जनगणना के अनुसार19 फीसदी अनुसूचित जाति के लोग हैं। 

वर्तमान सांसद : डॉ.अरुण कुमार
एक बार जदयू तो दूसरी बार रालोसपा के टिकट पर जीते

रालोसपा के टिकट पर लड़े डॉ. अरुण कुमार यहां के सांसद हैं। इस बार एनडीए और महागठबंधन में उन्हें जगह नहीं मिली। नतीजतन वे अपनी पार्टी, रासपा से चुनावी समर में उतरे हैं। इसके पूर्व जदयू के टिकट पर वर्ष 1999 के चुनाव में इन्हें जीत मिली थी। वर्ष 1993 में वे स्नातक क्षेत्र से विधान पार्षद चुने गए। लोकसभा में उनकी 88 फीसदी उपस्थिति रही है। पांच साल के कार्यकाल में इन्होंने 62 सवाल पूछे।

कौन जीते कौन हारे 
2014

जीते: डॉ. अरुण कुमार, रालोसपा, 322647
हारे: सुरेन्द्र प्रसाद यादव, राजद, 280307

2009
जीते: जगदीश शर्मा, जदयू, 234769
हारे: सुरेन्द्र प्रसाद यादव, राजद, 213442

2004 
जीते: गणेश प्रसाद सिंह, राजद, 400063
हारे: डॉ. अरुण कुमार, जदयू,     353625

1999
जीते: डॉ. अरुण कुमार, जदयू,    333332
हारे: सुरेन्द्र प्रसाद यादव, राजद, 316045

कुल मतदाता 1575018
पुरुष मतदाता 819469
महिला मतदाता 755502
थर्ड जेंडर 47
19 मई को चुनाव  सातवें चरण में
1692 मतदान केंद्र

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  • Web Title:Jehanabad Lok Sabha seat Racism is dominating point of communism to socialism