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लोकसभा चुनाव 2019: जानिए कैसे बीजेपी ने यूपी में कैसे निकाला जातीय समीकरण का तोड़

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लोकसभा चुनाव 2019 के पहले चरण की वोटिंग के बाद उत्तर प्रदेश में, जहां पर भारतीय जनता पार्टी मुख्य विपक्षी दलों की एकजुटता का सामना कर रही है, पार्टी ने मुकाबले के लिए अपने प्रयास दोगुने कर दिए हैं। इसके लिए दलित और अन्य पिछड़े जातियों के मतदाताओं घर पहुंचने की कोशिश की जा रही है ताकि यह बताया जा सके कि वे वोटरों का जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा रहा है।

पूरे मामले से वाकिफ लोगों ने बताया कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि राज्य में मुख्य विरोधी समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन के जातीय समीकरण की काट निकाली जा सके। जिनके पास दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यक मतदाताओं के समर्थन हैं।

इसके अलावा, गठबंधन का पास एक और दल है अजीत सिंह की राष्ट्रीय लोकदल, जहां पर जातीय समीकरण काफी गहरा है।

दूसरे चरण के लिए गुरूवार को यूपी की लोकसभा सीट- आगरा, अलीगढ़, अमरोहा, बुलंदशहर, फतेहपुर सीकरी, हाथरस, मधुरा और नगीना में बीजेपी के कैडर्स और आरएसएस का कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर, खासकर दलित और ओबीसी बहुल इलाकों में केन्द्र की उज्ज्वला योजना और जनधन स्कीम की बातें की।

उज्ज्वला योजना के तहत केन्द्र की बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार गरीबों को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन दिया। जनधन योजना का मकसद सभी घरों को बैंक तक जोड़ना था।

लोगों के साथ यह संपर्क अभियान पहले चरण में 11 अप्रैल को हुई वोटिंग के बाद तेज किया गया है जब पहले चरण में वोटिंग 2014 के 66.52 प्रतिशत के मुकाबले इस बार 63.69 फीसदी ही हुई।

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  • Web Title:How BJP plans to counter the caste arithmetic in Uttar Pradesh