Ground report of Lucknow:saints and actor battling with Rajnath in saffron stronghold - लखनऊ की ग्राउंड रिपोर्ट :  भगवा गढ़ में राजनाथ से जूझते ‘संत’ और ‘सितारे’ DA Image

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लखनऊ की ग्राउंड रिपोर्ट :  भगवा गढ़ में राजनाथ से जूझते ‘संत’ और ‘सितारे’

यह लखनऊ है। जहां की नवाबी लार्ड डलहौजी ने 1850 में ही खत्म कर दी थी। लेकिन यह दुनिया में मुहावरा बन कर अब भी छायी है। गुजिश्ता लखनऊ किताब में लेखक अब्दुल हलीम शरर ने इस लखनऊ के जाने कितने किस्से लिखे हैं। मसलन जान-ए-आलम (नवाब वाजिद अली शाह) की दाल सोने की अशर्फी से छौंकी जाती थी। इसी लखनऊ में गंगा की धारा लाने को हैदर कैनाल खोदी गई, जो नाका, बांसमंडी होते हुए कैंट की तरफ जाते नाले की शक्ल में आज भी दिखती है। जहां नवाबी दौर में किन्नरों की फौज बेगमों की हिफाजत में तैनात रहती थी। नवाबी तो नहीं रही मगर आज की सियासत में लखनऊ का जलवा बरकरार है। गोमती के दोनों किनारों पर बसे इस शहर की सुबह आज भी कुछ अलसायी सी रहती है। अलबत्ता देर रात तक जागना लखनऊ सीख चुका है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले लखनऊ की रंगत क्या है, मूड कैसा है, मुद्दे क्या हैं और लोग क्या सोच रहे हैं, इसका जायजा लिया लखनऊ के संपादक  केके उपाध्याय ने।

लखनऊ में बैठ कर सपा और बसपा ने कई-कई बार यूपी का राजकाज चलाया लेकिन इस शहर ने आज तक इन पार्टियों को अपनी नुमाइंदगी का मौका नहीं दिया। सपा और बसपा लखनऊ लोस सीट पर आज तक अपना खाता नहीं खोल सकीं। आजादी के बाद के चुनाव कांग्रेस जीतती रही तो 1991 से भाजपा ने कब्जा कर लिया। स्व. अटल बिहारी वाजपेयी लखनऊ को कुछ ऐसे भाये कि 1996, 1998, 1999 और 2004 के लोकसभा चुनावों में भी वही चुने गए। ये वही अटल थे जिन्हें लखनऊ ने 1957 और 1962 में हरा कर लौटा दिया था। दो चुनाव हराने वाले लखनऊ ने मानों 30 साल बाद अटल को हराने का प्रायश्चित करते हुए पांच बार जिता कर संसद भेजा। अटल को हराने के लिए फिल्मी सितारे राजबब्बर, नफीसा अली और मुजफ्फर अली तक उतारे गए पर सब उनसे हारे।

2009 में यहां से लालजी टंडन जीते और 2014 में राजनाथ सिंह ने 16वीं लोकसभा में यहां से प्रतिनिधित्व किया। इस बार फिर राजनाथ मैदान में हैं। उनसे मुकाबले को कांग्रेस ने ‘संत’ प्रमोद कृष्णम् और सपा ने फिल्मी सितारे शुत्रुध्न सिन्हा की पत्नी पूर्व एक्ट्रेस पूनम सिन्हा को उतारा है। 

यह लखनऊ है, जहां शर्मा जी की चाय की चुस्कियां हैं, तो शुक्ला जी की चाट के चटकारे भी। यह नजाकत और नफासत का शहर है। यहां चिकन पहना भी जाता है और खाया भी जाता है। सदियों से सबह-ए-बनारस और शाम-ए-अवध के शानदार होने की बात कही जाती है। बीच शहर से गुजरती गोमती ने न जाने कितने इतिहास बनते बिगड़ते देखे हैं। यहां बड़े मंगल की शुरुआत नवाब परिवार ने की थी। यहां तमाम हिंदू रोजे रखते थे। ऐसा गंगा-जमुनी लखनऊ इनदिनों चुनावी रंग में रंगा हुआ है। 

आज भी पैसों में बढ़ता है चिकन का मेहनताना

दोपहर के 12 बज रहे हैं। सूरज सिर पर चढ़ रहा है। सड़कों पर लोग जहां जाम और गाड़ियों के हॉर्न के शोर से परेशान हैं। चौक से लगभग 6 किमी दूर पुराने सरफराजगंज की गलियों में सन्नाटा पसरा है। हर दूसरे घर में चिकन के कपड़ों पर जाली का काम होता दिखेगा। क्या औरत, क्या आदमी सब इसी में मशगूल हैं। 12-14 घंटे तक लगातार काम कर दिन के 50 रुपये कमाने की जद्दोजहद जारी है। पुराने सरफराजगंज में उनकी आबादी है, जिनके लिए सियासी दल जुबानबाजी तो खूब करते हैं, लेकिन यहां उनके हालात देखने कोई नहीं आता। जमीला कहती हैं... एक कपड़े पर जाली बनाने के 3 से 5 रुपये मिलते हैं। हमारा मेहनताना पैसों में बढ़ता है, रुपयों में नहीं। पूरा घर साल भर 10-12 घण्टे रोज काम करते हैं, तब जाकर साल में 40-50 हजार रुपये जमा कर पाते हैं। हमारी क्या रायशुमारी? गुरबत (गरीबी) हमारा नसीब है। वह दुपट्टे से मुंह पोछ फिर जाली बनाने के लिए कपड़ा पकड़ लेती हैं। जमीला सरीखी यहां सैकड़ों औरते हैं जो अपनी रोजी रोटी के लिए यह काम कर रही हैं लेकिन उन्हें हालात सुधरते नहीं दिखते। 

तरक्की का अपना नजरिया

यहीं पास ही में है इरा मेडिकल कॉलेज, जिसे आसपास के लोग हसरत से देखते हैं। बमुश्किल 200 मीटर की दूरी पर रहने वाले यूसुफ बहुत खुश हैं इससे। ऐसा नहीं है कि वे अपने बच्चों को यहां पढ़ा पाने का सपना देख बैठे हों। बताते हैं-पिछले साल हमने साल भर में 30 हजार रुपये बचाए और अपने एक कमरे में एसी लगा कर किराये पर उठा दिया। जिस कमरे का हमें 2-3 हजार भी मुश्किल से मिलता था, उसका 8-10 हजार मिलने लगा। अब हमारे लिए तो यही तरक्की है। वोट देने के नाम पर उन्हें वही दल भाते हैं जो उनकी बात करते हैं। 

जीएसटी-नोटबंदी से परेशान लेकिन वोट देश के नाम

चौक चौराहे पर ट्रैफिक ‘जल्दी किसको है’ की तर्ज पर रेंग रहा है। विक्टोरिया स्ट्रीट से दायें मुड़ने पर संकरी सड़क और बीच में लगा अस्थायी डिवाइडर बताता है कि जाम से निपटने के लिए कुछ इंतजाम तो बीते बरसों में हुए हैं। यहीं पर है लखनऊ का पुराना बर्तन बाजार। यहियागंज में कन्हैया लाल काशी नाथ फर्म के राकेश अग्रवाल कहते हैं, ‘ हां, जीएसटी और नोटबंदी से हम परेशान जरूर हुए। हमारा समय अब कागजी कामों में भी जाता है। इसके बावजूद हमारा वोट देश की बेहतरी के लिए  होगा, छोटी-मोटी दिक्कतों से क्या घबराना।’ यहां से थोड़ा आगे बढ़ने पर यहियागंज की गल्ला मण्डी में अनाज तौल रहे राम पाल कहते हैं, हम गरीब जरूर हैं लेकिन जब हमारे देश ने पुलवामा का बदला लिया तो हमें भी बहुत अच्छा लगा। अरे, देश पहले है। 

किसी ने कोसा, किसी ने सराहा

पत्रकारपुरम चौराहे पर गायत्री स्वीट्स पर छोले-भटूरे तले जा रहे हैं। दो-तीन लोग हैंगर पर कपड़े बेच रहे हैं, और उनमें मोदी के काम को लेकर बहस छिड़ गई है। नोटबंदी, जीएसटी से बात पुलवामा और बालाकोट तक पहुंचकर गर्मागर्मी की शक्ल ले रही है। आवाजें कुछ कर्कश होने लगीं तो भीड़ भी लग चुकी है। कुछ देर में वो दोनों तो अलग हो गये लेकिन बाकियों को मौका मिल गया। हैंगर में कपड़े बेच रहे देवराज कहते हैं, गरीबों के लिए जो सोचेगा, हम उसी को वोट देंगे। वहीं मोज्जअमनगर के मो. शरीफ कहते हंै कि पुराने लखनऊ में विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ। सीवर लाइन जैसी बेसिक सुविधा नहीं मिल पाई।  लेकिन उनकी बात को काटते हैं गोमती नगर के सुरेश। वह कहते हैं- मेट्रो चली न? पूरे शहर में सुलभ शौचालय खुले...सड़के ठीक हुईं.. लखनऊ साफ हुआ..। पुराने लखनऊ में लोग कटिया से बिजली जलाएंगे और बातें बड़ी-बड़ी करेंगे। लोग सुरेश के साथ हो लिए। अब बातों का रुख इस तरफ मुड़ चुका था कि पुराने लखनऊ में कटिया लगाकर बिजली लेने वालों से भाजपा सरकार भी नहीं निपट पाई।  

सख्त नियमों ने छीने रोजगार

एक ट्रैवेल एजेंसी चला रही समीना खान कहती हैं कि मूल समस्याओं की चर्चा ही नहीं है। लखनऊ से जेद्दा, कुवैत या अन्य खाड़ी देशों में जाने वाले मजदूरों या कारीगरों की संख्या बहुत कम हो गई है। कारण कि नियम बहुत सख्त हो गये हैं। पहले हम रोज 150-200 इसीआर (इमीग्रेशन चेक रिक्वायर्ड) करते थे लेकिन अब 20-20 दिन तक कोई नहीं आता। इसमें कोई शक नहीं कि भारतीयों का शोषण न होने पाये, इसके लिए नियमों को सख्त किया गया था लेकिन इसका ये दुष्परिणाम हुआ। अब जिन घरों की रोजी-रोटी छिन गई, वो वोट किसे देंगे, इसे समझा जा सकता है। 

योजनाओं में कहीं सफल तो कहीं शिकवा भी 

योजनाओं का हाल लें तो कहीं लोगों को लगता है कि केन्द्र सरकार का कामकाज संतोषजनक रहा है तो कुछ को लगता है कि कामों को सिर्फ गिनाया गया, किया नहीं किया। गोलागंज के सईद को लगता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ मुस्लिम बाहुल्य इलाकों को नहीं मिला। वह अपनी गैस एजेंसी का उदाहरण देते हैं कि यहां से अगर उज्ज्वला के 100 कनेक्शन दिये गये तो  एक-दो ही मुस्लिम को मिले हैं लेकिन गांवों में उज्जवला योजना को लेकर ज्यादा शिकायतें नहीं हैं। वहीं कांग्रेस की न्याय योजना भी लोगों को हवाई योजना मात्र लग रही है। वहीं जम्मू कश्मीर से धारा 370 को हटाने के भाजपा के वायदे को ज्यादातर लोग पॉलिटिकल स्टंट मानते हैं। वहीं वे ये भी मानते हैं कि रोजगार के मोर्चे पर मोदी सरकार काफी हद तक असफल रही है। इसके बावजूद लोग उन्हें एक और मौका देने को तैयार हैं। ज्यादातर लोगों को लगता है कि आतंकवाद से निपटने में केन्द्र सरकार को सफलता मिली है। कुछ लोगों का मानना है कि सरकार काम कम करती है, प्रचार ज्यादा करती है। 

राजनाथ सिंह पिछली बार लखनऊ से पहली बार लड़े। तब वे बाहरी माने गए। इस बार उनके खिलाफ खड़े दोनों प्रत्याशी बाहरी हैं। लखनऊ सीट पर सवर्ण मतदाता निर्णायक भूमिका में है। यहां एससी-एसटी लगभग 10 फीसदी हैं। यहां की लगभग 20 फीसदी आबादी मुसलमानों की है। कांग्रेस ने ब्राह्मण और मुस्लिम समीकरण के जरिए राजनाथ सिंह को चुनौती देने के लिए आचार्य प्रमोद कृष्णम् पर भरोसा जताया है। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने प्रमोद कृष्णम् को स्टार प्रचारक के रूप में उतारा और उनकी सभाएं वहीं करवाईं जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभाएं हुईं। 

चुनाव प्रचार में जमीन-आसमां एक किये हैं प्रत्याशी

मौजूदा सांसद राजनाथ सिंह के चुनाव प्रचार की कमान उनके बेटे नीरज सिंह ने संभाली है तो गठबंधन प्रत्याशी पूनम सिन्हा के प्रचार के लिए उनके बेटे कुश सिन्हा भी लखनऊ में ही डेरा डाले हुए हैं। चुनाव प्रचार के दौरान नीरज सिंह के कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद कृष्णम के पैर छूने के चर्चे हैं। नरही के व्यापारी राम अवतार कहते हैं कि इससे पता चलता है कि हम अपनी जड़ों से जुड़े हैं। यही संस्कार तो हमारी थाती है। दरअसल चुनाव प्रचार के दौरान लालबाग में शर्मा टी स्टॉल पर राजनाथ सिंह के चुनाव प्रचार के दौरान नीरज सिंह का सामना प्रमोद कृष्णम् से हुआ तो उन्होंने आचार्य के पैर छू कर आशीष मांगा। प्रमोद कृष्णम् ने नीरज के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। चुनाव प्रचार के साथ ही आपसी तनातनी भुलाकर एक-दूसरे का हाल लेने का सिलसिला भी जारी है। राजनाथ सिंह ने राजनैतिक शिष्टाचार का परिचय देते हुए सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के घर जाकर उनकी सेहत का हाल जाना है। 

कायस्थ और सिंधी वोटों से आस

कुश सिन्हा अपनी मां पूनम सिन्हा के साथ जुटे हैं। रोड शो और मोहल्लों टोलों से लेकर मेट्रो तक में मां-बेटे वोट मांग रहे हैं। गठबंधन के वोटों की आस लगाए पूनम सिन्हा कायस्थ और सिंधी वोट साधने के लिए मोहल्लों के चक्कर लगा रही हैं। वहीं प्रमोद कृष्णम् भी कार्यकर्ताओं के साथ गली-कूचों की खाक छान रहे हैं।  वह लखनऊ के धर्मगुरुओं और उलेमाओं से मुलाकात कर रहे हैं। 

 

2014 का चुनाव परिणाम

राजनाथ सिंह, भाजपा:                  5,61,106

रीता बहुगुणा जोशी, कांग्रेस:            2,88,357

नकुल दुबे, बसपा:                         64,449 

अभिषेक सिंह, सपा:                        56771

लखनऊ में

कुल मतदाता: 19,58,847

पुरुष मतदाता: 10,54,133

महिला मतदाता: 9,04,628

 

आबादी: 23,95,147 

(2011 की जनगणना के मुताबिक)

 

लखनऊ के पांच प्रमुख मुद्दे

पुराने लखनऊ में भीषण जाम। निपटने के लिए कोई प्रभावी योजना नहीं।

चिकन के काम को पर्याप्त प्रोत्साहन की सरकारी नीतियां नहीं, मशीन से होने लगा चिकन का काम।

जीएसटी के बाद चिकन के छोटे व्यापारी परेशान, कारीगरों ने काम छोड़ा, रिक्शे तक चलाने लगे।

लखनऊ की सड़कों पर छुट्टा पशु, सड़कों पर चलना खतरे से भरा, राहगीर परेशान।

 बेरोजगारों की बड़ी फौज

लखनऊ में सांसद राजनाथ सिंह के प्रमुख काम

गोमतीनगर रेलवे स्टेशन के लिए 1900 करोड़ रुपए मंजूर, काम तेजी से जारी।

104 किलोमीटर लम्बे आउटर रिंग रोड के निर्माण के लिए 5812 करोड़ रुपए मंजूर, काम जारी।

चारबाग रेलवे स्टेशन के दूसरी तरफ प्रवेश निकास द्वार के लिए 1800 करोड़ रुपए मंजूर, काम जारी।

लालकुआं से राजेन्द्रनगर, हैदरगंज तिराहे से राजाजीपुरम तथा हैदरगंज से कमला नेहरू क्रासिंग तक तीन फ्लाईओवर का काम शुरू। 

4700 करोड़ रुपए से लखनऊ-कानपुर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे का निर्माण प्रस्तावित, शिलान्यास हो चुका।

चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट के नए टर्मिनल के लिए 1383 करोड़ रुपए मंजूर, काम जारी।

180 करोड़ रुपए लागत वाले लम्बे समय से फंसे कुकरैल पुल का काम पूरा।

लखनऊ-सुल्तानपुर रोड के चार लेन चौड़ीकरण के लिए 3332 करोड़ रुपए स्वीकृत, काम लगभग पूरा। 

शहर को यह भी मिला

खुर्रमनगर से गोमती नगर और मल्हौर से गोमती नगर विस्तार में ओवर ब्रिज।

मेट्रो का सफर, हालांकि किराया ज्यादा होने की शिकायत भी।

आउटर रिंग रोड में कुर्सी रोड से फैजाबाद रोड।

104 किमी बननी है रिंग  रोड, लखनऊ से सटे जिलों को जोड़ेगी।

बड़ी संख्या में सुलभ शौचालय। 

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