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7 अप्रैल, 2020|8:42|IST

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Lok Sabha Election 2019: गढ़वाल सीट पर कभी नहीं बनी कोई महिला सांसद

महिलाएं आज जहां देश में पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर हर क्षेत्र में उनकी बराबरी का दम भर रही हैं। वहीं उत्तराखंड की राजनीति में महिलाओं की स्थिति इसके एकदम उलट है। उत्तराखंड के संसदीय चुनावों में महिला नेतृत्व ने अभी तक दहाई का आंकड़ा भी नहीं छुआ। गढ़वाल सीट पर रिकार्ड एक बार भी किसी महिला ने लोकसभा में उत्तराखंड का नेतृत्व नहीं किया। आजाद भारतवर्ष के पहले आम चुनाव से लेकर 16वें लोकसभा चुनावों तक उत्तराखंड में महज तीन महिला नेत्रियों ने लोकसभा में राज्य का प्रतिनिधित्व किया। जिसमें एक नैनीताल सीट से तो दो नेत्रियां टिहरी संसदीय सीट से शामिल हैं। उत्तर प्रदेश से वर्ष 2000 में विभाजित होने के बाद उत्तराखंड में वर्ष 2004, 2009 व 2014 में तीन लोस चुनाव हो चुके हैं। लेकिन टिहरी संसदीय सीट के अलावा अन्य चार सीटों पर किसी महिला का नेतृत्व नहीं हो पाया।  18 साल के युवा हो चुके उत्तराखंड की संसदीय राजनीति में टिहरी सीट को छोड़ दिया जाए तो गढ़वाल, अल्मोड़ा, हरिद्वार और नैनीताल में महिलाओं ने अभी तक खाता भी नहीं खोला है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ नारों की बानगी से अलग तस्वीर बनाती उत्तराखंड की राजनीतिक परिदृश्य में केवल जिताऊ प्रत्याशियों पर ही दांव लगाए जाते रहे हैं। यही कारण रहा है कि राज्य की चार सीटों पर महिला प्रत्याशी का अभी तक सूखा खत्म नहीं हो पाया है।  


अल्मोड़ा और हरिद्वार सीट पर भी  नहीं किया महिला ने नेतृत्व
पौड़ी। देश में 1952 में हुए पहले आम चुनाव से लेकर 2014 में हुए 16वें लोकसभा चुनाव तक गढ़वाल, अल्मोड़ा और हरिद्वार सीटों पर कोई महिला प्रत्याशी विजयी नहीं हो पायी। गढ़वाल सीट पर तो किसी महिला ने आज तक अपनी दावेदारी भी प्रस्तुत नहीं की। वहीं 2004 के 14वें लोस चुनाव में टिहरी से एक, अल्मोड़ा व नैनीताल से दो-दो, 2009 के 15वें आम चुनाव में टिहरी व अल्मोड़ा से दो-दो और नैनीताल व हरिद्वार से एक-एक महिला ने अपना नामांकन भरा। इनमें से किसी के सिर भी जीत का ताज नहीं बंधा। 15वें लोस के मध्य में 2012 में टिहरी में हुए उपचुनाव में राज्यलक्ष्मी शाह ने लम्बे सूखे को समाप्त किया। तो उनकी जीत का सिलसिला 2014 के 16वें चुनाव में भी जारी रहा। जबकि अल्मोड़ा व हरिद्वार से दो-दो वहीं नैनीताल सीट पर किसी महिला प्रत्याशी ने उम्मीदवारी नहीं की।

आठ फीसदी महिलाओं ने भरा नामांकन 
पौड़ी। उत्तराखंड की पांच सीटों पर 2004 में 14वें आम चुनाव से लेकर 2014 के 16वें लोकसभा चुनावों में 204 प्रत्याशियों के सापेक्ष महज 17 महिलाओं ने अपनी दावेदारी को लेकर नामांकन भरा। जो कि करीब आठ फीसदी ही रहा। पाचों सीटों पर वर्ष 2004 में कुल 54 प्रत्याशियों के सापेक्ष पांच महिलाओं ने दावेदारी की। जबकि 2009 में 76 के सापेक्ष सात तथा 2014 में 74 के सापेक्ष पांच ने नामांकन पत्र भरें।

 

33 फीसदी आरक्षण भी बना मजाक
पौड़ी। राजनीति में भागीदारी के लिए भले ही महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण रखा गया हो लेकिन प्रदेश के लोकसभा इतिहास में यह सफल नहीं हो पा रहा है। राजनैतिक दलों महिला नेताओं को आगे बढ़ाने के बजाए जिताऊ उम्मीदवारों को ही टिकट में तवज्जो दे रहे हैं। 

 

महज तीन ने किया लोस में राज्य का प्रतिनिधित्व
पौड़ी। देश के पहले आम चुनाव से लेकर 16वें लोक सभा चुनाव तक केवल तीन महिलाओं ने ही लोक सभा में राज्य का प्रतिनिधित्व किया है। जिसमें पहले आम चुनाव 1952 में ही टिहरी सीट अपने नाम करने वाली नेत्री कमलेंदुमति शाह का नाम शुमार है। 
1998 के 12वें लोस चुनाव में नैनीताल सीट पर दिग्गज नेता स्व. गोविंद बल्लभ पंत की बहू ईला पंत ने जीत हासिल की। वहीं 2009 के 15वें और 2014 के 16वें लोस चुनाव में टिहरी सीट पर शाह परिवार की बहू माला राजलक्ष्मी शाह के नाम रही।  

 

 

 

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  • Web Title:garhwal parliamentary constituency fails to elect woman member of parliament from its constituency in previous lok sabha elections held since independence