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लोकसभा चुनाव 2019 : सिर्फ आरोपों तक ही सीमित है मशीन हैकिंग का मामला

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चुनाव परिणामों से ठीक पहले एक बार फिर ईवीएम का मुद्दा गरमा गया है। विपक्षी दल ईवीएम में गड़बड़ी किए जाने के आरोप लगा रहे हैं तो सत्तारूढ़ दल इसे परिणाम आने से पहले ही हार का बहाना करार दे रहे हैं। ईवीएम मशीन पर उंगली उठाना कोई नई बात नहीं है। मगर आज तक यह मुद्दा सिर्फ आरोपों तक ही सीमित रहा है। 

भाजपा ने उठाए थे सवाल 
2004 में दिल्ली हाईकोर्ट में वरिष्ठ वकील प्राण नाथ लेखी (मीनाक्षी लेखी के पिता) ने सबसे पहले ईवीएम पर सवाल उठाए थे 
2009 में लाल कृष्ण आडवाणी और सुब्रमण्यम स्वामी ने ईवीएम पर सवाल उठाए थे 
2010 में जीवीएल नरसिम्हा राव ने ‘डेमोक्रेसी एट रिस्क, कैन वी ट्रस्ट ऑन इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन?’ किताब लिखी 

कांग्रेस भी लगा चुकी आरोप
2009 में ही ओडिशा में हार के लिए प्रदेश कांग्रेस ने ईवीएम को जिम्मेदार ठहराया था 
2014 में असम के सीएम तरुण गोगोई ने भी ऐसे आरोप लगाए थे  

अन्य दल भी जता चुके विरोध 
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया था 
2017 में यूपी में विधानसभा चुनावों में हार के बाद मायावती ने भी ईवीएम का मुद्दा उठाया 
मौजूदा चुनाव में अखिलेश यादव भी इस संबंध में ट्वीट कर चुके हैं 

किसी ने चुनौती नहीं स्वीकारी
मई, 2017 में चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को ईवीएम से छेड़छाड़ करने की चुनौती दी थी 
सर्वदलीय बैठक में सात राष्ट्रीय व 35 क्षेत्रीय दलों ने हिस्सा लिया 
मगर इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए कोई दल आगे नहीं आया 
सिर्फ एनसीपी और सीपीआई (एम) ने ही इसमें हिस्सा लेने की हामी भरी, बाद में पीछे हटे

ईवीएम खराबी के कारण 
आयोग के मुताबिक कई बार ईवीएम, वीवीपैट को जोड़ने वाली केबल पर पैर पड़ने या कोई अन्य चीज पड़ने से ‘एरर’ आ जाता है
दूर-दराज के इलाकों में मशीन ले जाने पर तकनीकी गड़बड़ी आती है 
मशीन की बैट्री को बदलने में देर हो जाती है  

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  • Web Title:evm hacking hullabaloo only limited till opposition allegation in lok sabha elections 2019