Elections 2019 Dimple Yadav loses Samajwadi Party bastion Kannauj to BJP Subrat Pathak - डिंपल यादव से भाजपा के सुब्रत पाठक ने छीनी कन्नौज की कुर्सी DA Image

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डिंपल यादव से भाजपा के सुब्रत पाठक ने छीनी कन्नौज की कुर्सी

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लोकसभा चुनाव में मोदी लहर कन्नौज में भी दिखी। यहां से अप्रत्याशित परिणाम सामने आया। दो बार सांसद रहीं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव पराजित हो गईं। यहां से भाजपा प्रत्याशी सुब्रत पाठक विजयी घोषित किए गए। मतगणना के शुरुआती दौर में डिंपल कुछ आगे रहीं लेकिन दोपहर बाद से वह पिछड़ने लगीं, जिसके बाद से बराबरी पर नहीं आ पाईं। हालांकि दोनों के बीच करीबी टक्कर रही लेकिन अंततः सुब्रत पाठक ने बाजी मार ली। सुब्रत ने 11162 वोटों से जीत हासिल की। कुल 11,35,110 वोटों की गिनती में सुब्रत को 559845 वोट मिले जबकि डिंपल 548683 मत पा सकीं। डिंपल ने पिछली बार से वोट बैंक जरूर बढ़ाया पर सफलता हासिल करने से दूर रह गईं। 

2014 में डिंपल को मिले थे 43.89 फीसदी वोट
2014 के लोकसभा चुनाव में कन्नौज सीट पर 62.91 फीसदी वोटिंग हुई थी, जिसमें सपा की डिंपल यादव को  43.89 फीसदी (4,89,164) वोट मिले थे और और उनके निकटतम बीजेपी प्रत्याशी सुब्रत पाठक को 42.11 फीसदी (4,69,257) वोट  मिले थे. इसके अलावा बसपा के निर्मल तिवारी को 11.47 फीसदी (1,27,785) वोट मिले थे. इस सीट पर सपा की डिंपल यादव ने 19,907 मतों से जीत दर्ज की थी.

लोहिया ने तोड़ा था कांग्रेस का तिलिस्म
आजादी के बाद 1952 में पहली बार हुए चुनाव में कन्नौज लोकसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार शंभूनाथ मिश्रा ने जीत दर्ज करके बाजी मारी। इसके बाद 1957 में वो दोबारा चुने गए और साल 1962 में मूलचंद्र दुबे जीते, लेकिन 1963 में शंभूनाथ मिश्रा एक बार फिर सांसद बने। 15 साल तक कांग्रेस की तूती बोलती रही, जिस पर समाजवादी विचारधारा के जनक डॉ. राम मनोहर लोहिया ने ब्रेक लगाया और 1967 के चुनाव में कांग्रेस के शंभूनाथ को करारी मात देकर वह संसद बनें। हालांकि 1971 में कांग्रेस ने एक बार फिर से जीत हासिल की, लेकिन 1977 में जनता पार्टी के रामप्रकाश त्रिपाठी, 1980 में छोटे सिंह यादव जीते. 1984 में शीला दीक्षित ने कन्नौज से चुनावी मैदान में उतरकर कांग्रेस की इस सीट पर वापसी कराई. 1989 और 1991 में छोटे सिंह यादव ने लोकदल का झंडा बुलंद करते हुए जीत हासिल की.

1996 में पहली बार खिला था कमल
कन्नौज सीट पर 1996 में बीजेपी चंद्रभूषण सिंह (मुन्नू बाबू) ने पहली बार कमल खिलाकर भगवा ध्वज फहराया, लेकिन दो साल बाद 1998 के चुनाव में प्रदीप यादव ने बीजेपी से यह सीट छीनी और उसके बाद से लगातार हुए 6 चुनाव से यह सीट सपा की झोली में है। 1999 में सपा के तत्कालीन मुखिया मुलायम सिंह यादव जीते, लेकिन उन्होंने बाद में इस्तीफा दे दिया। अखिलेश यादव ने अपनी सियासी पारी का आगाज कन्नौज संसदीय सीट पर 2000 में हुए उपचुनाव से किया। इसके बाद 2004, 2009 में लगातार जीत कर अखिलेश यादव ने हैट्रिक लगाकर इतिहास रचा, लेकिन 2012 में यूपी के सीएम बनने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद उनकी पत्नी डिंपल यादव निर्विरोध चुनकर लोकसभा पहुंचीं।

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