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नुक्कड़ पर चुनाव: खूब राजनीति बतियाता है जरूर ये पलामू तरफ का होगा....हमें तो वोट देना ही है

खूब राजनीति बतियाता है जरूर ये पलामू तरफ का होगा। खेलगांव मोड़ के पास हो रहे राजनीतिक शोरगुल पर अचानक मुझे यह बात याद आई। यह बात रांची में कॉलेज के दिनों में एक लाइब्रेरियन ने मुझसे कही थी। 
अचानक आई बारिश में भीगने से बचने के लिए पूरे परिवार के साथ एक दुकान की ओट में छुपा था। वह ओट लोगों से ठसाठस हो गई थी। ओट में आये लोगों के बीच बात पलामू, चतरा और लोहरदगा में हुए चुनाव पर हो रही थी। हर आदमी अलग-अलग पार्टियों की जीत के दावे कर रहा था। 

एक सज्जन की आवाज कुछ तेज थी तो झमाझम के बाद भी स्पष्ट कानों तक आ रही थी। कह रहे थे कि नक्सल बेल्ट होने के बावजूद ज्यादा लोगों के वोटिंग का क्या मतलब है। पिछली बार तो एंटी इनकम्बेसी थी, इसबार क्या अर्थ निकाला जाए। एक सज्जन बोल उठे, इ सब कुछ नहीं है। इस बार प्रचार से ज्यादा मतदाता जागरुकता पर ध्यान दिया गया है, इसलिए यह असर है। यह बात एक सज्जन को थोड़ी अखरी। कहने लगे क्या आपलोग भी ये सब बात करते हैं। इस बार फलां पार्टी को जीतने से कोई रोक सकता है क्या। देखिए देश कहां से कहां पहुंच गया।  चर्चा में तेजी के साथ-साथ आवाज में भी तेजी आने लगी।

एक सज्जन बोले, सुने हैं कि चतरा में एक कैंडिडेट को लोगों ने गांव में घुसने से रोक दिया था। बोले कि पांच साल नहीं आए तो अब क्या लेने आए हैं। भला बताइये पार्टी ने कैसे उन्हें टिकट दे दिया। मद्धम अंधेरे में एक आवाज फिर गूंजी- बताईए अब कह रहे हैं कि कैंडिडेट मत देखो दिल्ली को देखो। ऐसा होता है क्या। ये पार्टियों की मनमानी है कि किसी को भी उतार देंगे और हमें दिल्ली के नाम पर वोट देना होगा। 

तभी एक और शख्स बोल उठे- क्या करिएगा, इस बार तो मेरे इलाके में अभी तक कोई नेता आया भी नहीं है, लेकिन हम तो उसी पार्टी को वोट देंगे जिसे देते आए हैं। इस बार तो चुनाव में ऐसे ऐसे मुद्दे आ रहे हैं जो पहले किसी चुनाव में नहीं आए। तभी एक आवाज गूंजी सब 23 को पता चलेगा। चलिए बारिश खुल गई है। 
 

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  • Web Title:Election on the Nook: There is a lot of politics used to be surely it will be towards Palamu we have to vote