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Lok Sabha Election 2019: उत्तराखंड के धुरंधर अपने ही घर में घिरे

भाजपा और कांग्रेस की मुख्य धुरी माने जाने वाले उत्तराखंड के छत्रप इस बार अपने-अपने चुनाव क्षेत्रों में ही घिर गए हैं। दोनों दलों के प्रमुख नेता नैनीताल, हरिद्वार और टिहरी सीट से खुद भी उम्मीदवार हैं। खुद की उम्मीदवारी के कारण चुनाव में इन्हें अपनी सीट पर ही फोकस करना पड़ रहा है। नतीजा यह है कि पार्टी के स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल होने के बावजूद इनका अपनी सीट से बाहर निकलना मुश्किल है। राज्य के बड़े नेताओं के अपनी सीट पर ही सिमट जाने के कारण अब मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष के साथ दूसरी पांत के प्रादेशिक नेताओं की जिम्मेदारी बढ़ गई है। 

 

भट्ट का नैनीताल सीट पर ही जोर
भाजपा के प्रदेश संगठन के कप्तान अजय भट्ट इस बार लोकसभा चुनाव में नैनीताल सीट से पार्टी के प्रत्याशी हैं। हर चुनाव में अहम भूमिका निभाने वाले भट्ट के सामने प्रतिद्वंद्वी के रूप में पूर्व सीएम और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत हैं। मुकाबला कड़ा होने से भट्ट नैनीताल क्षेत्र में ही उलझे रहेंगे। भट्ट रानीखेत से 2017 के विधानसभा चुनाव हार गए थे। इसके बाद भी हाईकमान ने विश्वास जताते हुए उन्हें लोकसभा का प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में भट्ट के लिए इस चुनाव के मायने कुछ ज्यादा ही हैं। भट्ट पर खुद का राजनीतिक करिअर दोबारा पटरी पर लाने के साथ ही जनता के विश्वास और हाईकमान की उम्मीद पर खरा उतरने की चुनौती है। 

 

हरिद्वार पर फोकस करेंगे निशंक
हरिद्वार संसदीय सीट से भाजपा के प्रत्याशी रमेश पोखरियाल निशंक, दूसरी बार इस सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान का मुख्य सितारा रहने वाले निशंक के लिए इस बार हरिद्वार से बाहर निकलना मुश्किल है। निशंक के सामने इस सीट से दोबारा जीत हासिल करने की चुनौती है। दूसरा, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नैनीताल से चुनाव लड़ने की वजह से यहां पूर्व विधायक अंबरीष कुमार को उतारा गया है। इसके चलते निशंक को हरिद्वार सीट पर नये सिरे से रणनीति बनाते हुए फोकस करना पड़ेगा। लिहाजा प्रदेश के बाकी भाजपा उम्मीदवारों के प्रचार के लिए समय निकालना उनके लिए आसान नहीं होगा।

 

रावत बाकी सीटों पर कम दिखेंगे 
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत नैनीताल संसदीय सीट से चुनाव मैदान में है। यह सीट उन्हें काफी जद्दोजहद के बाद मिली है। पार्टी के स्थानीय बड़े नेता, उनके हरिद्वार सीट छोड़कर नैनीताल आने से खुश नहीं थे। यह चुनाव रावत के करिअर के लिहाज से भी आर-पार की चुनावी लड़ाई है। हरीश रावत को इस चुनाव के जरिए खुद को दोबारा से स्थापित करना है। दरअसल, वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश का मुख्यमंत्री रहते हुए भी रावत दो-दो सीटों से चुनाव हार गए थे। उस हार के दाग को वे लोकसभा चुनाव जीतकर धोना चाहते हैं। रावत को भाजपा से सियासी बदला चुकाना है। ऐसे में रावत का नैनीताल सीट से बाहर निकल पाना कठिन है।

 

त्रिवेंद्र और इंदिरा पर दारोमदार
लोकसभा चुनाव में भाजपा से प्रचार का काफी कुछ दारोमदार इस बार मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत पर रहेगा। इसे महसूस करते हुए मुख्यमंत्री ने चुनावी सभाएं शुरू भी कर दी हैं। नैनीताल से निवर्तमान सांसद भगत सिंह कोश्यारी भी चुनाव प्रचार के लिए उतरने जा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी को लेकर जरूर कुछ असंमजस है। पिछले काफी समय से उनका स्वास्थ्य खराब चल रहा है। कांग्रेस की तरफ से नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के कंधों पर पार्टी उम्मीदवारों के प्रचार की जिम्मेदारी रहेगी।

 

प्रीतम सिंह टिहरी पर ही देंगे ध्यान
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह टिहरी सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी हैं। प्रीतम के लिए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में खुद को साबित करने का मौका भी है। यूपी और उत्तराखंड में पांच बार के विधायक रहे प्रीतम लोस के चुनाव में पहली बार उतर रहे हैं। विधायक के रूप में चकराता क्षेत्र में जरूर उनका मजबूत दखल माना जाता है, लेकिन टिहरी के बाकी 13 विधानसभा क्षेत्रों में उन्हें व्यस्त रहना होगा।

 

अजय टम्टा अल्मोड़ा से शायद ही निकलें
अल्मोड़ा सीट पर भाजपा से केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा और कांग्रेस से राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा में टक्कर है। अजय हालांकि राज्य से केंद्र सरकार में प्रतिनिधित्व करने वाले अकेले राज्य मंत्री हैं, लेकिन उनका किसी दूसरी सीट पर प्रचार के लिए निकलना शायद ही हो पाए। न तो अल्मोड़ा से चुनाव लड़ रहे प्रदीप के लिए किसी दूसरी सीट पर प्रचार के लिए जाना मुमकिन है और न ही अजय टम्टा के लिए। 


 

 

 

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