Lok Sabha Elections 2019: जाति आधारित सियासी भविष्यवाणियां इसलिए सही नहीं होतीं
इस बात में कोई संदेह नहीं है कि भारत के चुनावों में जाति और धर्म काफी अहम भूमिका निभाते हैं। समाज की इस संरचना के आधार पर टिप्पणीकारों को भी चुनावी भविष्यवाणी करने में सहूलियत होती है। लेकिन इस आधार...

इस बात में कोई संदेह नहीं है कि भारत के चुनावों में जाति और धर्म काफी अहम भूमिका निभाते हैं। समाज की इस संरचना के आधार पर टिप्पणीकारों को भी चुनावी भविष्यवाणी करने में सहूलियत होती है। लेकिन इस आधार पर भविष्यवाणी करने में दो तरह की बाधाएं होती हैं।
पहला तो यह कि देश में जातियों का कोई प्रामाणिक और विस्तृत आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। 2011 की जनगणना में भी केवल एससी और एसटी का प्रतिशत बताया गया है। यह भारत की कुल आबादी (1.21 अरब) का 25 फीसदी है। इसके साथ ही 2015-16 में चौथे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) जैसे अन्य स्रोत भी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और एससी-एसटी-ओबीसी से इतर व्यक्तियों की जनसंख्या का सर्वेक्षण-आधारित अनुमान देते हैं। हालांकि इन अनुमानों में जातियों का विवरण नहीं है।
संख्या कैसे प्रभावित करती है-
जाति और धर्म को लेकर किए जाने वाले आकलन अक्सर गलत होते हैं, क्योंकि इनमें एक राज्य के अंदर भी काफी विविधताएं होती हैं। मसलन जम्मू-कश्मीर में सर्वाधिक मुस्लिम आबादी होना और उत्तर प्रदेश में इनकी संख्या कम होने के आधार पर ही सारा आकलन नहीं किया जा सकता है। क्योंकि जैसा की ऊपर दिया गया है, इनकी संख्या राज्य के अंदर भी अलग अलग हैं।
राज्य में भी एक जाति की आबादी से जिलों में उनकी संख्या अधिक होती है: यहां दिए गए चार्ट इस बात को बताते हैं कि किस तरह एक राज्य में किसी जाति या धर्म मानने वाले लोगों की आबादी से उसी राज्य के किसी जिले में उनकी आबादी कहीं ज्यादा है।
मुस्लिम---------------राज्य में---------------जिला में (सभी आंकड़े प्रतिशत में)
शोपियां (जम्मू-कश्मीर)---------------68.3 9-----------8.5
धुबरी (असम)---------------34.2---------------79.7
मेवात (हरियाणा)---------------07.0---------------79.2
मालापुरम (केरल)---------------26.6---------------70.2
किशनगंज (बिहार)---------------16.9---------------68.0
अन्य पिछड़ा वर्ग---------------राज्य में---------------जिला में
पुलवामा (जम्मू-कश्मीर)---------------7.6---------------10.0
कन्याकुमारी (तमिलनाडु)---------------71.2---------------96.1
श्रीकाकुलम (आंध्र प्रदेश)---------------51.8---------------89.4
मेवात (हरियाणा)---------------47.9---------------87.2
उत्तर कन्नड (कर्नाटक)---------------50.9---------------85.7
अनुसूचित जनजाति---------------राज्य में---------------जिला में
द डांग्स (गुजरात)---------------14.8---------------94.7
अलीराजपुर (मध्य प्रदेश)---------------21.1---------------89.0
कारगिल (जम्मू-कश्मीर)---------------11.9---------------86.9
लाहौल स्पिति (हिमाचल)---------------05.7---------------81.4
बीजापुर (छत्तीसगढ़)---------------30.6---------------80.0
अनुसूचित जाति---------------राज्य में---------------जिला में
कूच बिहार (प. बंगाल)---------------23.5---------------50.2
शहीद भगत सिंह नगर (पंजाब)------------31.9--------------42.5
गंगानगर (राजस्थान)---------------17.8---------------36.6
कौशांबी (उत्तर प्रदेश)---------------20.7---------------34.7
तिरुवरुर (तमिलनाडु)---------------20---------------34.1
अनुसूचित जाति की आबादी
देश भर में अनुसूचित जातियों की आबादी 17% है। लेकिन राज्यवार देखें तो पंजाब में उनकी आबादी राज्य की कुल आबादी का 32% और गोवा में मात्र 2% ही है।
अनुसूचित जनजाति की आबादी
भारत के चुनावों में जाति और धर्म की अहम भूमिका होती है, जातियों का कोई प्रमाणिक और विस्तृत आंकड़ा उपलब्ध नहीं होने से भविष्यवाणी करने में आती हैं बाधाएं
अनुसूचित जनजातियों
अनुसूचित जनजातियों की आबादी 9 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ में 31 % अनुसूचित जनजाति हैं।
अन्य पिछड़ा वर्ग
देश में अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी 45 प्रतिशत है। लेकिन राज्यवार आबादी देखें तो तमिलनाडु में सर्वाधिक 71 प्रतिशत ओबीसी हैं। .
मुस्लिम आबादी
भारत में मुसलमानों की आबादी 13 प्रतिशत है।
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