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लोकसभा चुनाव 2019- पटना में 30 बूथों पर मतदान प्रतिशत बढ़ाना चुनौती

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पटना जिले में 30 ऐसे मतदान केंद्र हैं जहां पिछले लोकसभा चुनाव में मतदाताओं ने 25 प्रतिशत से भी कम वोट डाले थे। इसमें पटना शहर के पॉश इलाके के कई मतदान केंद्र थे। इन बूथों पर मतदान का प्रतिशत बढ़ाना प्रशासन के लिए एक चुनौती है।

पटना शहर के राजीवनगर, बोरिंग रोड, पाटलिपुत्र, बहादुरपुर , चांदमारी रोड, गांधीनगर, मीठापुर जैसे पॉश इलाके हैं जहां मतदाताओं ने कम वोट डाले थे। इन इलाकों में वोट कम होने का कारण लोगों को मतदान केंद्र पर नहीं जाना, मतदाता सूची से नाम कटना आदि प्रमुख था। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर लोग मतदान करने नहीं गए थे। राजनैतिक दलों के प्रचार अभियान के अलावा जिला प्रशासन ने भी घर-घर जाकर लोगों को वोट करने की अपील की थी फिर भी उपरोक्त इलाकों में कम वोट पड़े थे। इस बार क्या स्थिति रहेगी यह 19 मई को तय होगा। हालांकि इस बार ऐसे मतदान केंद्रों की जिला प्रशासन ने अलग से सूची तैयार की है ताकि लोगों को मतदान के लिए प्रेरित किया जा सके।

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चार मतदान केंद्रों पर एक भी वोट नहीं पड़ा
2014 के लोकसभा चुनाव में पटना जिले के चार ऐसे मतदान केंद्र थे जहां मतदाताओं ने वोट नहीं डाले। इसका मुख्य कारण था क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर वोट का बहिष्कार। इन मतदान केद्रों से मतदान कर्मी खाली ईवीएम लेकर लौट गए थे। जिन बूथों पर एक भी वोट नहीं पड़े थे उनमें मसौढ़ी विधानसभा क्षेत्र के प्राथमिक स्कूल भौवर, उत्क्रमित मध्य विद्यालय फतेहपुर, प्राथमिक स्कूल रमनीबिगहा तथा मनेर विधानसभा का   प्राथमिक स्कूल इस्लामगंज हैं। इसके अलावा फतुहा विधानसभा के प्राथमिक विद्यालय सरवाहानपुर, प्राथमिक कृषि सहयोग समिति गौरीपुनदाह और प्राथमिक विद्यालय अलावकासपुर में एक प्रतिशत से भी कम वोट पड़े थे।

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  • Web Title:Challenge to increase voting percentage on thirty booths