लोकसभा चुनाव 2019- ग्राउंड रिपोर्ट: बक्सर में सामाजिक समीकरण साधने वालों के सिर सजेगा जीत का ताज

रामायणकालीन ताड़का वध के साथ ही इतिहास में बक्सर की ख्याति हुमायूं और शेरशाह के बीच चौसा में हुए युद्ध और अंग्रेजों एवं शुजाउद्दौला, मीर कासिम और शाह आलम के बीच कतकौली में हुई लड़ाई के लिए भी है।...

रामायणकालीन ताड़का वध के साथ ही इतिहास में बक्सर की ख्याति हुमायूं और शेरशाह के बीच चौसा में हुए युद्ध और अंग्रेजों एवं शुजाउद्दौला, मीर कासिम और शाह आलम के बीच कतकौली में हुई लड़ाई के लिए भी है। समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को संजोए इसी बक्सर में लोकसभा चुनाव - 2019 का महासमर एक बार फिर दो ‘बाबाओं’ के बीच है। 

एनडीए से भाजपा प्रत्याशी और केन्द्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे हैं। उनको लोग चौबे बाबा के नाम से भी जानते हैं। वहीं, लालू -राबड़ी सरकार में मंत्री रहे जगदानंद सिंह महागठबंधन से राजद प्रत्याशी हैं। एक समय जब सूबे में बिजली की स्थिति ठीक नहीं थी, अपने विधानसभा क्षेत्र को रोशन करने के लिए लोग इनको बिजुरिया बाबा पुकारते थे। गत लोस चुनाव में चौबे ने जगदानंद को शिकस्त दी थी। दोनों योद्धाओं पर उनके दलों ने दूसरी बार बाजी लगाई है। कड़ा मुकाबला है। 

इस लोकसभा क्षेत्र के भी वोटर मुखर हैं और चौक-चौराहों पर चर्चा में राष्ट्र, मोदी हैं। विकास, पुलवामा, जीएसटी और नोटबंदी तक के मुद्दे उठ रहे हैं। युद्ध के पुराने इतिहास वाले बक्सर में बड़ी संख्या में युवा फौज में हैं। इस नाते क्षेत्र में देशभक्ति भी बड़ा मुद्दा है। इसका जवाब सेना के नाम पर राजनीति, नोटबंदी और जीएसटी से देश की अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान एवं बेरोजगारी पर बहस से दी जा रही है। दूसरी ओर जातीय गोलबंदी भी अंदरखाने चल रही है। ब्राह्मण बहुल इस लोकसभा क्षेत्र में यादव दूसरे नम्बर पर हैं। इसके बाद राजपूत व भूमिहार हैं। दोनों खेमों से अपने-अपने पक्ष में गोलबंदी जारी है। सहज उपलब्धता और काम के मामले में जनता दोनों को बराबर ही मानती है। दोनों को लेकर स्थानीय और बाहरी का मुद्दा भी मुखर हो रहा है। 

बक्सर में कांग्रेस और भाजपा को जनता ने दिया पांच-पांच बार मौका

राजद के कद्दावर नेता जगदानंद सिंह भी एक बार बक्सर से सांसद रह चुके हैं। लोगों में धारणा है कि जिस चौबे बाबा को उन्होंने बक्सर का सांसद बनाया, उनका मोह भागलपुर से नहीं छूट पाया है। बाबा ब्रह्मेश्वरनाथ के नाम पर बसा ब्रह्मपुर कस्बा अब काफी विस्तार ले चुका है। वहां सीताराम की चाय दुकान सुबह चार बजे से ही खुल जाती है। लोग जुटते हैं तो उनमें चुनावी चर्चा भी चलती है। 

राजकुमार शर्मा कहते हैं कि नरेन्द्र मोदी के आने से भाजपा के पक्ष में माहौल बना है। जवाब में भरतजी के निशाने पर मोदी सरकार होती है। कहते हैं, जुमलेबाजी से काम नहीं चलेगा। तेजस्वी की सभा में भी खूब भीड़ हो रही है। एक बार साथ चलिए न तो हकीकत सामने आ जाएगी। लइका (युवक) सब बेकार बइठल बाऽ। रोजी -रोजगार मिले तब नूंऽ। यह सुनकर कुछ ही देर पहले वहां सफेद पैंट- शर्ट और स्पोर्ट्स शू में पहुंचा नौजवान कहता है, 10 फीसदी आरक्षण सवर्णों को मिला तो आप ही लोग न विरोध कर दिए। 

शहर व विकास का दूसरा अक्स झलकता
ब्रह्मपुर के वार्ड 11, 12, 13 और 15 पूर्वी व पश्चिमी टोला में शहर और विकास का दूसरा अक्स झलकता है। मुख्य सड़क के दोनों ओर अलग-अलग दलित बस्तियां हैं। एक टोले के टुनटुन राम, विनोद राम और सुरेश राम पाइप और नल दिखाकर कहते हैं- सालभर से बेसी हो गया, पानी नहीं आया। कुछ ही आगे दूसरा टोला है। स्कूल के पक्का चबूतरे पर नथुनी मुसहर, बुद्धदेव मुसहर समेत दो दर्जन लोग सोए हैं। इनकी पीड़ा रोजी -रोजगार को लेकर है। यहां दो हजार की आबादी है। पानी के लिए एक भी चापाकल नहीं। कहते हैं, हम लोगों का मन भी अब बदल रहा है। 

...और युवक वोटों का बंटवारा कर देता है
ब्रह्मपुर से डुमरांव के रास्ते में यह कुशवाहा बहुल धरहरा गांव है। यहां एक बीज दुकान पर रामाशीष, हंसराज, चंद्रिका और सर्वजीत प्रधान बैठे हैं। कहते हैं यहां 1400 वोटर हैं। आधा-आधा की टूट है। एक युवक चट से जातीय आधार पर वोटों का बंटवारा कर देता है। रात के 8.30 बजे हैं। यह राजपुर विस क्षेत्र का इटाढ़ी बाजार है। खेदन चौधरी की दुकान पर कुछ लोग चाय की चुस्कियों के बीच चुनावी बहस में लीन हैं। भिखारी चौहान, त्रिलोकी गुप्ता और वीरेन्द्र केशरी का कहना है कि मोदीजी देश के लिए काम कर रहे हैं। चौबेजी भी यहां आते रहते हैं। इसकी काट उनके सामने ही खेदन करते हैं। काहे मर्दे गंगा पी रहे हैं।

बक्सर में सबसे अधिक ब्राह्मण
बक्सर सीट पर जातीय समीकरण देखें तो ब्राह्मण: 4 लाख, यादव: 3.5 लाख, राजपूत: 3 लाख, भूमिहार: 2.5 लाख, मुसलमान: 1.5 लाख, कुशवाहा: 80 हजार, कुर्मी: 60 हजार, वैश्य: 1 लाख, दलित: 2 लाख व अन्य जातियों की संख्या 60 हजार है।

विधानसभावार स्थिति
दो विधायक महागठबंधन और चार एनडीए के - बक्सर - मुन्ना तिवारी (कांग्रेस), ब्रह्मपुर - शम्भुनाथ यादव (राजद), डुमरांव - ददन पहलवान (जदयू), राजपुर - संतोष निराला (जदयू), दिनारा - जय कुमार सिंह (जदयू) और रामगढ़ अशोक कुमार सिंह (भाजपा)

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