बक्सर लोकसभा सीट: बक्सर में कांग्रेस और भाजपा को जनता ने दिया पांच-पांच बार मौका

कभी कांग्रेस का अभेद्य दुर्ग कहे जाने वाला बक्सर लोस सीट फिलहाल भाजपा की झोली में है। आजादी से लेकर अभी तक इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा का कब्जा पांच-पांच बार रहा। 1962 में कांग्रेस का विजयी अभियान...

कभी कांग्रेस का अभेद्य दुर्ग कहे जाने वाला बक्सर लोस सीट फिलहाल भाजपा की झोली में है। आजादी से लेकर अभी तक इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा का कब्जा पांच-पांच बार रहा। 1962 में कांग्रेस का विजयी अभियान शुरू हुआ तो 1977 की जनता पार्टी लहर को छोड़ लगातार 1984 तक उसका कब्जा बरकरार रहा। 1996 में निवर्तमान सांसद तेजनारायण सिंह को हराकर पहली बार भाजपा के लालमुनि चौबे ने यह सीट भाकपा से झटक लिया। 2004 तक अनवरत भाजपा का कब्जा रहा, पर परिसीमन के बाद 2009 के 15वीं संसदीय चुनाव में  राजद के जगदानंद सिंह ने लालमुनि चौबे से यह सीट हथिया लिया। परंतु अगली बार 2016 के चुनाव में फिर अश्विनी चौबे ने राजद को हराकर एक बार फिर ‘कमल’ को खिला दिया। कांग्रेस व भाजपा के जीत का रिकार्ड भले ही सबसे अधिक पांच-पांच बार का रहा है, पर इस सीट पर सबसे ज्यादा अवधि तक काबिज रहने का रिकार्ड कांग्रेस के पास रहा है। यह सीट कांग्रेस के खाते में 24 सालों तक रही तो भाजपा के कब्जे में 18 साल तक रही है।

नए परिसीमन के बाद खुला था राष्ट्रीय जनता दल का खाता 
राष्ट्रीय जनता दल ने कई बार इस सीट से अपनी किस्मत आजमाया, किन्तु सफलता नहीं मिली। राजद को पहली बार 2009 के चुनाव में इस सीट पर तब जीत हासिल हुई जब नये परिसीमन के बाद जगदानंद सिंह विजयी हुए। इससे पहले राजद के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले केरल हाईकोर्ट के मुख्य  न्यायाधीश रह चुके उदय प्रताप सिंह को एक बार तथा पार्टी के कद्दावर नेता शिवानंद  तिवारी को दो बार भाजपा के लालमुनी चौबे  से शिकस्त मिली थी।   

पुराने चेहरे होंगे आमने-सामने
चुनावी मैदान में दो पुराने चेहरों के उतरने से मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद बढ़ गई है। एनडीए की ओर से भाजपा के अश्विनी कुमार चौबे एवं महागठबंधन से राजद के जगदानंद सिंह घोषित प्रत्याशी के रूप में ताल ठोक रहे हैं। ये दोनों 2014 के चुनाव में उम्मीदवार थे। बसपा से ददन यादव ने चुनाव मैदान में आकर लड़ाई त्रिकोणीय बना दिया था। परंतु इस चुनाव में दोनों नेताओं के बीच सीधी लड़ाई मानी जा रही है। हालांकि कौन जीतेगा कौन हारेगा यह तो रिजल्ट आने के बाद ही पता चलेगा। 

वामदल का भी रहा है कब्जा 
बक्सर लोस सीट पर स्वतंत्र (निर्दल) उम्मीदवार से लेकर वामदलों का कब्जा रहा है। स्वतंत्रता के बाद प्रथम दो आम चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में डुमरांव महाराज कमल सिंह विजयी रहे, जबकि 1989 एवं 1991 में  जनता दल के समर्थन से वाम दलों की ओर से सीआईपी के उम्मीदवार तेजनरायण सिंह चुनाव जीते। हालांकि 1957 में प्रतिनिधित्व के बाद एक बार फिर 1989 एवं 1991 में  महाराजा कमल सिंह भाजपा का कमल लेकर चुनावी मैदान में उतरे व दोनों चुनावों में हार का सामना करना पड़ा।     

वर्तमान सांसद : अश्विनी कुमार चौबे
कद्दावर नेता जगदानंद सिंह को हराकर बने सांसद

बक्सर संसदीय क्षेत्र से पहली बार 2014 में चुनाव लड़े अश्विनी कुमार चौबे भाजपा की लहर में राजद के कद्दावर नेता व तत्कालीन सांसद जगदानंद सिंह को हराकर निर्वाचित हुए। इससे पहले वे भागलपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक तथा प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके थे। मोदी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में 3 सितंबर 2017 को उन्हें केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री बनाया गया।

कौन जीते कौन हारे 
2014

जीते : अश्विनी कु.चौबे, भाजपा, 319012
हारे : जगदानंद सिंह, राजद,     186674 

2009
जीते : जगदानंद सिंह, राजद,     132614
हारे : लालमुनी चौबे, भाजपा,    130376

2004 
जीते : लालमुनि चौबे, भाजपा,     205980
हारे : ददन सिंह, आईएनडी,    151114

1999
जीते : लालमुनि चौबे, भाजपा, 235968
हारे : शिवानन्द तिवारी, राजद,    224362 

कुल मतदाता 18,20,035
पुरुष मतदाता 967278
महिला मतदाता 852740
थर्ड जेंडर 17
19 मई को चुनाव  सातवें चरण में
1856 मतदान केंद्र 

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