DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:
asianpaints

VIP Seat: संगरूर लोकसभा सीट- त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे भगवंत मान

पंजाब की संगरूर लोकसभा सीट इस बार आम आदमी पार्टी (आप) के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है। आप के मौजूदा सांसद इस बार त्रिकोणीय मुकाबले में फंसते नजर आ रहे हैं। मान का मुकाबला अकाली दल के पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींडसा तथा कांग्रेस के पूर्व विधायक और उद्योगपति केवल सिंह ढिल्लो से है।

इसके साथ ही इस सीट पर अकाली दल (अमृतसर) के प्रधान सिमरनजीत सिंह मान तथा पंजाब डेमोक्रेटिक एलाइंस ने आप से अलग हुए लोक गायक जस्सी जसराज को उतारा है। पंजाब की संगरूर लोकसभा सीट 2014 के लोकसभा चुनाव में बड़े बदलाव की गवाह बनी थी। शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस के बीच रहने वाली इस सीट पर पहली बार आम आदमी पार्टी ने अपना परचम लहराया था। मान ने अकाली दल के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींडसा को दो लाख से अधिक मतों से हराया था तथा कांग्रेस के विजय इंदर सिंगला तीसरे स्थान पर पहुंच गए थे।

यह काफी चौंकाने वाला था कि आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार भगवंत मान ने दोनों पार्टियों के बड़े नेताओं को चुनाव में शिकस्त दी। इस बार कहा जा रहा है कि ‘आप' की राह संगरूर में आसान नहीं है। अकाली दल और कांग्रेस पूरी तैयारी के साथ चुनाव मैदान में हैं। पूर्व सांसद सिमरनजीत मान के पक्ष में जो बात जाती है वो है कि पंजाब में हुई गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी तथा बहबलकलां तथा कोटकपूरा गोलीकांड की घटना से नाराज पंथक वोट का लाभ उन्हें मिलेगा क्योंकि राज्य की कट्टर सिख वोट केवल अकाली दल को जाती है या अकाली दल (अमृतसर) को। वैसे भी भगवंत मान की छवि भी कट्टर सिख की रही है। वह अपने कट्टरपन के लिए विवादों में रहे हैं। दो बार सांसद भी रह चुके हैं। वहीं अकाली दल के पास तो यहां से खड़ा करने के लिए कोई उम्मीदवार ही नहीं था, बेचारे ढींडसा को जबरन टिकट दिया। ढींडसा के पिता अकाली दल से नाराज होकर सभी पदों से इस्तीफा दे चुके हैं और वो अपने बेटे के लिए प्रचार नहीं कर रहे।

ढिल्लो का कहना है कि आप का पंजाब में अस्तित्व ही खत्म होने जा रहा है तथा पार्टी के टूटने से इसका सफाया होना तय है। पिछले चुनाव में आप की लहर में चार सांसद जीत गए थे और विधानसभा चुनाव में 20 विधायक जीते थे लेकिन अब तो पार्टी कमजोर पड़ गई है। पिछली अकाली सरकार में राज्य के साथ विकास में भेदभाव हुआ तथा विकास का सारा पैसा बठिंडा लोकसभा क्षेत्र में चला जाता था जिससे यहां कोई काम नहीं होने दिया।

सूबे में कांग्रेस की वापसी को बाद भगवंत मान के लिए चुनौतियां थोड़ी बढ़ गई है, लेकिन 2014 में मान को संगरूर से जितनी बड़ी जीत मिली थी, उसे भेद पाना कांग्रेस या फिर अकाली दम के आसान नहीं है।

2014 result

नौ विधानसभा सीटों में से 5 पर 'आप' का कब्जा
संगरूर लोकसभा सीट के अंतर्गत नौ सीटें आती हैं। इनमें लहरागागा, दिरबा, सुनम, भदौर, बर्नाला, महल कालन, मलेर कोटला, धुरी और संगरूर शामिल हैं। इनमें से पांच विधानसभा सीटों पर आम आदमी पार्टी का कब्जा है, जबकि 3 सीटें कांग्रेस के पास हैं और एक सीट पर आकाली दल ने जीती है।

मौजूदा सांसद
भगवंत मान
आम आदमी पार्टी के भगवंत मान की उपलब्धियों की बात की जाए तो उन्होंने पूरी सांसद निधि 25 करोड़ क्षेत्र के विकास पर लगाई तथा विदेशों में फंसे पंजाबी लोगों की मदद करना, लोकसभा में अपने क्षेत्र सहित पंजाब के मुद्दे उठाना, लोगों को इकट्ठा करने तथा प्रभावित करने की कला, लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए प्रयत्नशील रहना मुख्य हैं। लेकिन इस बार आप की राह आसान नहीं है। इस चुनाव में भगवंत मान की चुनौतियां थोड़ी बढ़ सकती हैं। कांग्रेस और अकाली दल पूरी तैयार के साथ मैदान में उतरीं हैं।

कौन कब जीता

  • 1952    सरदार रंजीत सिंह (कांग्रेस)
  • 1957    अस्तित्व में नहीं
  • 1962    सरदार रंजीत सिंह (सीपीआई)
  • 1967    निर्लेप कौर (अकाली दल-संत फतेह सिंह)
  • 1971    तेजा सिंह स्वतंत्र (सीपीआई)
  • 1977    सुरजीत सिंह बरनाला (अकाली दल)
  • 1980    गुरचरण सिंह निहासिंहवाला (कांग्रेस)
  • 1984    बलवंत सिंह रामूवालिया (अकाली दल)
  • 1989    राजदेव सिंह, (अकाली दल (मान))
  • 1991    गुरचरण सिंह (कांग्रेस)
  • 1996    सुरजीत सिंह बरनाला (अकाली दल)
  • 1998     सुरजीत सिंह बरनाला (अकाली दल)
  • 1999    सिमरनजीत सिंह मान (अकाली दल (मान))
  • 2004    सुखदेव सिंह ढींडसा (अकाली दल)
  • 2009    विजय इंदर सिंगला (कांग्रेस)
  • 2014    भगवंत मान (आप)
  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Bhagwant Mann got stuck in Triangular contest in Sangrur Lok Sabha seats