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VIP Seat : आणंद में कांग्रेस के लिए अपने गढ़ में वापसी करना चुनौती

ananda lok sabha seat

गुजरात की आणंद लोकसभा सीट पर इस बार भी भाजपा और कांग्रेस में सीधा मुकाबला है। एक ओर जहां कांग्रेस के सामने अपने गढ़ में वापसी करने की चुनौती है। वहीं भाजपा के सामने एक बार फिर से 2014 की जीत दोहराने का दबाव है। कांग्रेस के भरतसिंह सोलंकी के मुकाबले भाजपा ने यहां से मितेश पटेल को मैदान में उतारा है। 

भारत की दुग्ध राजधानी के तौर पर पहचाने रखने वाले और अमूल डेयरी ब्रांड के लिए दुनियाभर में मशहूर आणंद में 2004 और 2009 में यहां से दो बार सांसद चुने गए सोलंकी और भाजपा के मितेश पटेल के बीच नजदीकी मुकाबला होने की उम्मीद है। पटेल जाने माने कारोबारी हैं जो पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने यहां सत्ता विरोधी लहर को भांपते हुए मौजूदा सांसद दिलीप पटेल को टिकट नहीं दी। पटेल ने नरेंद्र मोदी लहर के सहारे पूर्व केंद्रीय मंत्री सोलंकी को हराया था। 

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सोलंकी 2015 से 2017 तक कांग्रेस अध्यक्ष रहे हैं और अपनी जीत को लेकर उत्साहित हैं। लेकिन बोरसाड तालुका के डेडार गांव में जहां से सोलंकी मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं वहां पर भाजपा सरकार के विकास कार्यों की अनदेखी नहीं की जा सकती। पेटलाद विधानसभा क्षेत्र के डेडार गांव निवासी मूलजी सोलंकी बताते हैं कि गांव में अब दो लेन की सड़क है। हमारे पास 10वीं कक्षा तक का एक स्कूल है। वह कहते हैं कि गांव से सोलंकी मतदाता हैं इसलिए लोगों का भावनात्मक जुड़ाव उनके साथ है लेकिन हम भाजपा सरकार के कामों की अनदेखी नहीं कर सकते। जिनमें गरीबों के लिए पांच लाख रुपये तक की मुफ्त इलाज जैसी योजनाए शामिल हैं। 

एक अन्य ग्रामीण ने आरोप लगाया कि सोलंकी का जनता से सीधा संपर्क नहीं है और इसी के चलते 2014 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। देखा जाए तो ग्रामीण इलाकों में जहां कांग्रेस की पकड़ है। वहीं आणंद और आसपास के वल्लभ विद्यानगर की शहरी आबादी भाजपा के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जाना चाहती है। सोलंकी ने दावा किया कि कांग्रेस इस बार जीतेगी क्योंकि लोगों ने भाजपा पर से भरोसा खो दिया है। जबकि भाजपा के मितेश पटेल ने दावा किया कि यहां लोग भाजपा के पक्ष में मतदान करेंगे क्योंकि वे नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं। 

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सात में पांच विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा
आणंद लोकसभा क्षेत्र के अधीन सात विधानसभा सीट आती हैं। इनमें आणंद, खंभात, बोरसद, आंकलाव, उमरेठ,  पेटलाद और सोजित्रा है। 2017 के विधानसभा चुनाव में यहां की दो सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी, जबकि पांच सीटें कांग्रेस के खाते में गई थीं। कांग्रेस ने बोरसद, आंकलाव, आणंद, पेटलाद और सोजित्रा सीट पर जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा के खाते में खंभात और उमरेठ गई थी।

कांग्रेस यहां से 10 बार जीती  
आणंद लोकसभा सीट पारंपरिक रूप से कांग्रेस का गढ़ रहा है। पार्टी यहां से 10बार जीती जबकि भाजपा 1989, 1999 और 2014 में जीतने में कामयाब रही। वहीं सोलंकी नाना और कांग्रेस नेता ईश्वर चावड़ा यहां से पांच बार सांसद रह चुके हैं। 

‘सीट जीतने को लेकर आश्वस्त’
आणंद लोकसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार भरतसिंह सोलंकी भाजपा से यह सीट छीनने के लिए आश्वस्त हैं और उन्होंने दावा किया कि यह गुजरात में उनकी पार्टी का सबसे सुरक्षित चुनाव है। सोलंकी ने कहा कि अगर कांग्रेस मध्य गुजरात में आणंद लोकसभा सीट नहीं जीत सकती तो वह राज्य की 26 में से कोई भी सीट नहीं जीत सकती। 

जातिगत समीकरण कांग्रेस के पक्ष में 
आणंद सीट पर जातिगत समीकरण कांग्रेस के पक्ष में हैं। क्योंकि भरतसिंह सोलंकी ओबीसी क्षत्रिय ठाकोर समुदाय से आते हैं। इस सीट पर करीब 7.5 लाख ठाकोर मतदाता है। जो सोलंकी के पक्ष में है। वहीं मितेश पटेल पाटीदार समुदाय से आते हैं। आणंद में पाटीदार वोटरों की संख्या करीब 2.42 लाख है। वहीं मुस्लिम वोटर 1.70 लाख हैं। हालांकि जातिगत समीकरण कांग्रेस के पक्ष में हैं, लेकिन भाजपा उम्मीदवार मितेश पटेल का दावा है कि ऐसा नहीं है।  

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  • Web Title:ananda lok sabha seat bharatsingh solanki has the challenge of getting back traditional seat bjp field new candidate mitesh patel