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वे दिन: कमलापति का आशीर्वाद मिलने पर ही श्यामलाल ने टिकट स्वीकारा

indira gandhi

1984 का लोकसभा चुनाव अभूतपूर्व था। तब कांग्रेस को ऐतिहासिक सफलता मिली थी। कांग्रेस ने उस समय राज्यसभा के उपसभापति रहे पार्टी के वरिष्ठ नेता श्यामलाल यादव को वाराणसी से उम्मीदवार बनाया। उस दौरान इस सीट का प्रतिनिधित्व पंडित कमलापति त्रिपाठी कर रहे थे। तब श्यामलाल ने कमलापति का आशीर्वाद मिलने के बाद ही टिकट स्वीकार किया था।


दरअसल, कांग्रेस ने जब श्यामलाल यादव के नाम का ऐलान किया तो वह असमंजस में पड़ गए। उन्हें लग रहा था कि जिस सीट का प्रतिनिधित्व पं. कमलापति त्रिपाठी कर रहे हैं, उस पर वह चुनाव कैसे लड़ें। उनके पुत्र अरुण यादव बताते हैं कि ‘पिताजी ने पार्टी नेतृत्व को अपनी दुविधा बताई। उन्होंने कहा कि जब तक पंडित जी आशीर्वाद नहीं देंगे, वह टिकट स्वीकार नहीं करेंगे। 


पार्टी की सलाह पर अगले दिन उन्होंने पंडित कमलापति त्रिपाठी के आवास पर जाकर उनसे आशीर्वाद मांगा। श्यामलाल ने उनसे अनुरोध किया कि जब तक वह चुनाव प्रचार का खुद शुभारंभ नहीं करेंगे, तब तक कोई जनसभा नहीं होगी। इसके बाद कमलापति ने श्यामलाल की पहली जनसभा में पहुंचकर उनके लिए वोट मांगे। अरुण बताते हैं कि उस समय भी टिकट कटने को लेकर तमाम बाते होंती थीं, लेकिन कोई मर्यादा लांघने की हिम्मत नहीं कर पाता था।

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  • Web Title:a story of Loksabha Election of 1984 about Congress candidate Shyamlal Yadav