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81% प्र‍त्‍याशी नहीं बचा पाए अपनी जमानत 

twenty-six seats in bihar  uttar pradesh and west bengal are also scheduled to vote in this phase

‘मोदी है तो मुमकिन है’,‘एक बार फिर मोदी सरकार’ की सूनामी में पूर्वी उत्तर प्रदेश की गोरखपुर-बस्ती मंडल की 9 सीटों पर लड़ रहे 81 प्रतिशत प्रत्याशियों ने अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए। सभी 9 लोकसभा क्षेत्रों से कांग्रेस के सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। इनमें पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह, बाहुबली पूर्व सांसद भालचंद यादव, बाहुबली पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह और भाजयुमो के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष भी शामिल हैं। 

गोरखपुर-बस्ती मंडल में लोकसभा की 9 सीटें हैं। इसमें गोरखपुर मंडल की 6 और बस्ती मंडल की 3 लोकसभा सीटें हैं। इन 9 लोकसभा सीटों से 96 उम्मीदवार मैदान में थे। मोदी की सुनामी में 9 लोकसभा सीटों पर 18 उम्मीदवारों को छोड़ दें 78 उम्मीदवार जमानत बचाने लायक वोट हासिल नहीं कर सके। जमानत गवाने वालों में कांग्रेस, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के अलावा कई छोटी पार्टियों व निर्दलीय प्रत्याशी भी शामिल हैं। गोरखपुर के कांग्रेस प्रत्याशी मधुसूदन त्रिपाठी 22972 वोट, गोरखपुर से सीपीआई प्रत्याशी डॉ.आशीष सिंह 8172, डुमरियागंज से कांग्रेस प्रत्याशी डॉ.चंद्रेश उपाध्याय 60549 वोट ही हासिल कर पाए। 

सिर्फ गठबंधन के प्रत्याशी बचा सके जमानत 
गोरखपुर-बस्ती मंडल की 9 लोकसभा सीटों पर भाजपा का परचम फहराया। इन सीटों पर मुकाबला करने वाले महागठबंधन के भी सभी 9 उम्मीदवार अपनी जमानत बचाने में कामयाब रहे। 

इन दिग्गजों को मिला करारा झटका


पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह 
कुशीनगर लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता पूर्व गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह को खड़ा किया था। पडरौना से 3 बार विधायक रह चुके आरपीएन सिंह 2009 में काबीना मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य को हरा लोकसभा में पहुंचे थे। यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बने। 2014 के लोकसभा चुनाव में आरपीएन सिंह 284511 मत पाकर दूसरे नंबर पर रहे थे। लेकिन मोदी की सुनामी लहर में इस चुनाव में जमानत नहीं बचा पाए। उन्हें सिर्फ 146151 वोट ही मिले।

पूर्व मंत्री बाहुबली राजकिशोर सिंह की भी जमानत जब्त
पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह पूर्वांचल के बाहुबली क्षत्रिय नेताओं में सुमार हैं। उत्तर प्रदेश में कई बार मंत्री रहे। सपा की सरकार में इस दबंग नेता को पूरे प्रदेश में सुना जाता था। 2014 के लोकसभा चुनाव में बस्ती से अपने भाई बृजकिशोर सिंह उर्फ डिंपल को चुनाव लड़ाया लेकिन भाजपा प्रत्याशी हरीश द्विवेदी से बेहद करीबी मुकाबले में हार गए। 2019 में पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह सपा के बैनर चले चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन बसपा के खाते में सीट चले जाने पर उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। कांग्रेस के टिकट पर बस्ती से चुनाव लड़े लेकिन 86920 वोट पाकर जमानत जब्त करा बैठे।
 
भाजयुमो के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रामाशीष राय भी बोलती बंद

भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रामाशीष राय बगावत कर देवरिया से चुनाव लड़े। निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे पूर्व एमएलसी रामाशीष राय को देवरिया में करारी हार का सामना करना पड़ा। 2019 के लोकसभा चुनाव में इन्हें सिर्फ 7902 वोट पा कर जमानत जब्त करा बैठे। हालांकि 2004 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़े रामाशीष राय को 1.25 लाख से अधिक वोट मिले थे। 

पूर्व सांसद भालचंद यादव की जमानत जब्त
संतकबीरनगर से दो बार सांसद रह चुके बाहुबली भालचंद यादव महागठबंधन से प्रत्याशी नहीं बनाए जाने के बाद बागी हो गए। कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन भालचंद यादव को 128506 वोट ही हासिल कर पाए। जमानत बचाने में असफल रहे भालचंद यादव 2014 में कांग्रेस प्रत्याशी को मिले वोट से ज्यादा हासिल करने में सफल रहे। कुल मिला कर इन्होंने गठबंधन प्रत्याशी को काफी क्षति पहुंचाई। 

पूर्व सांसद राजेश मिश्र नहीं बचा पाए जमानत
बनारस से पूर्व सांसद एवं कांग्रेस में बड़ा कद रखने वाले डॉ राजेश कुमार मिश्र को इस बार उनके गृह जिले देवरिया की सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस ने उतारा था। गृह जिले में चुनाव लड़ने आए कांग्रेस प्रत्याशी राजेश मिश्र को जनता में स्वीकारोक्ति नहीं मिली। राजेश कुमार मिश्र को सिर्फ 27288 वोट मिले और उनकी जमानत जब्त हो गई। हद तो यह हो गई कि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राजाराम उनके अधिक 33520 वोट हासिल कर गए।
 
नियाज की जब्त हो गई जमानत

2014 लोकसभा चुनाव में नियाज अहमद बसपा के प्रत्याशी थे। देवरिया की जनता ने उन्हें दूसरे नंबर पर खड़ा कर दिया था। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में देवरिया से कांग्रेस प्रत्याशी नियाज अहमद भी को सिर्फ 51056 वोट मिले। मोदी लहर में देवरिया की जनता ने उनकी जमानत जब्त करा दी।
 
टीवी जर्नलिस्ट सुप्रिया भी नहीं बचा पाई जमानत 
महराजगंज लोकसभा सीट से अपने पिता पूर्व सांसद हर्शवर्धन की सीट पर उनकी विरासत को सहेजने के लिए उतरी पूर्व पत्रकार सुप्रिया श्रीनेत इस बार कांग्रेसी उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में थीं। सुप्रिया श्रीनेत 72516 वोट मिले। लेकिन वे अपनी जमानत बचाने में असफल रहीं। 
 

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  • Web Title:81 percent candidates not able to save their jmanat in Gorakhpur area