सुपौल लोकसभा सीट: 9 से 11 और 3 से 5 बजे के बीच खूब बरसे वोट
मौसम सुबह से ही मतदाताओं पर मेहरबान दिखा, इससे मतदाता भी खूब मतदान के लिए घरों से निकले। हालांकि सुबह में मतदान प्रतिशत औसत रहा। लेकिन दिन चढ़ते ही मतदान का प्रतिशत भी बढ़ता और मतदान समाप्त होने तक...

मौसम सुबह से ही मतदाताओं पर मेहरबान दिखा, इससे मतदाता भी खूब मतदान के लिए घरों से निकले। हालांकि सुबह में मतदान प्रतिशत औसत रहा। लेकिन दिन चढ़ते ही मतदान का प्रतिशत भी बढ़ता और मतदान समाप्त होने तक सुपौल ने मतदान में फर्स्ट डिवीजन हासिल कर लिया।
लोकसभा आम निर्वाचन 2019 में चरणवार मतदान प्रतिशत बदलता रहा। सुबह पहले दो घंटे में जहां-जहां मतदान औसत था, वहीं दिन चढ़ने के साथ मतदान का प्रतिशत भी बढ़ता चला गया। 3 से 5 बजे तक मतदान बेहतर रहा। सुबह की अपेक्षा शाम को अधिक मतदान हुआ। मंगलवार को लोकतंत्र के महापर्व में शामिल होने के लिए मतदाता तैयार थे। सुबह से मौसम खुशगवार था और गर्मी नहीं के बराबर थी। इसलिए मतदाताओं के अंदर उत्सुकता दिखी। हालांकि सुबह 7 बजे से 9 बजे तक सबसे कम 8.33 फीसदी मतदान रहा। दिन के शुरूआत में यह सुस्ती स्वाभाविक थी। लेकिन 9 बजे से 11 बजे तक मतदान प्रतिशत में जबर्दस्त उछाल रहा।
इस दौरान 13 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ और 11 बजे तक मतदान 22 प्रतिशत तक हो गया। इसके बाद दोपहर 1 बजे 33 प्रतिशत मतदान हुआ। दोपहर बाद 3 बजे तक सुपौल ससंदीय क्षेत्र का मतदान प्रतिशत 45 तक पहुंच गया।
एक बार फिर 3 बजे से पांच तक वोटरों ने जमकर वोट गिराये और मतदान 57 प्रतिशत पहुंच गया। इसी तरह शाम 5 बजे से 6 बजे तक 60.25 प्रतिशत मतदान हुआ। इस तरह देखा जाए तो सुबह 9 बजे से 11 बजे तक सबसे बेहतर मतदान हुआ।
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दिव्यांगों में मतदान के प्रति रहा काफी उत्साह
सुपौल | हिन्दुस्तान संवाददाता
मतदान को लेकर दिव्यांग मतदाताओं में भी खाशा उत्साह रहा। परिजनों, मतदानकर्मियों और एनसीसी और स्काउट कैडेटों के सहयोग से कई दिव्यांगों ने मताधिकार का प्रयोग किया।
बबुजन मध्य विद्यालय चकला निर्मली के बूथ संख्या 134 पर उसी मोहल्ले के दिव्यांग मेहर कुमार को व्हील चेयर पर उनकी दादी ने पहुंचाया जहां पुलिसकर्मी ने गोद में उठाकर मतदान कराया। वहीं उर्दू मध्य विद्यालय ईदगाह टोला में 80 साल के दिव्यांग परमेश्वर साह को स्काउट की मदद से परिजन ने वोट कराया। इसी तरह कई बूथों पर दर्जनों दिव्यांग मतदाता वोट देने पहुंचे।
कई दिव्यांग वोटर की शिकायत थी कि बूथों पर व्हील चेयर का दवा खोखला रहा।
इलाज कराना जरूरी, पर वोट नहीं देने का मलाल
सुपौल | हिन्दुस्तान संवाददाता
वोट के जरिये लोकतंत्र को मजबूत बनाने वाले करीब 40 लोग इस बार मतदान नहीं कर सके। कोई खुद बीमार थे तो किसी के परिजन थे और उन्हें लेकर घर के लोग सदर अस्पताल पहुंचे थे। इस कारण मतदान नहीं कर सके।
सदर प्रखंड के बेला गांव निवासी 62 साल के सियाराम यादव की सांस अचानक फूलने लगी। उसके दोनों पोता अरविंद और भूषण उसे लेकर किसी शहर के निजी क्लीनिक आये। वहां प्राथमिक इलाज के बाद उसे रेफर कर दिया गया। पोता अरविंद ने बताया कि वोट नहीं देने का मलाल है। कुछ ऐसा ही हाल नयानगर के 55 वर्षीय रामचन्द्र राम का था। उसके नाती की तबीयत खराब हो गयी। रामचन्द्र राम कभी भी मतदान से वंचित नहीं हुआ लेकिन इस बार वोट नहीं डाल पाने से मायूस थे।


