यूं तो सीवान लोकसभा सीट 1957 से है, लेकिन साल 1972 में जिले के तौर पर अस्तित्व में आया। इस लोकसभा सीट पर पहली बार कांग्रेस प्रत्याशी झूलन सिंहा ने जीत दर्ज की। इसके बाद से 1971 तक लगातार कांग्रेस ही जीत हासिल करती रही। वहीं, साल 2009 के परिसीमन में महाराजगंज लोकसभा सीट के कुछ हिस्से को सीवान में शामिल किया गया। इस लोकसभा सीट के अंतर्गत छह विधानसभा क्षेत्र दरौंदा, बड़हरिया, रघुनाथपुर, सीवान, जीरादेई, दरौली आते हैं। इस सीट पर राजद के बाहुबली नेता डॉ शहाबुद्दीन चार बार जीत चुके हैं। इस सीट पर 1996 से लेकर 2004 तक लगातर वह पार्टी का परचम लहराते रहे। वह दो बार जीरादेई विधानसभा सीट से विधायक भी चुने जा चुके हैं।इस सीट से शहाबुद्दीन को कभी हार का सामना नहीं करना पड़ा। जेल में रहते हुए भी उन्होंने साल 2004 में जीत दर्ज की थी। वहीं, सीवान सीट पर कांग्रेस की अभी तक छह बार जीत दर्ज कर चुकी है। लेकिन 1977 की जनता पार्टी के प्रत्याशी कांग्रेस के क़ब्ज़े से सीट पर जीत दर्ज कराई। सीवान लोकसभा सीट पर यादव-राजपूत जातियों और मुस्लिम समुदाय का बेहद प्रभाव है। दरअसल, साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी-जेडीयू से राजद का मुक़ाबला था। हालांकि, इस बार इस सीट पर सियासी समीकरण बदले हुए नजर आ रहे हैं। और पढ़ें