प्लास्टिक के स्टूल में क्यों बना होता है बीच में छेद, ये डिजाइन है या कुछ और?
घरों और दुकानों पर कहीं ना कहीं प्लास्टिक का स्टूल तो जरूर देखा होगा। ये प्लास्टिक के स्टूल बड़े काम के होते हैं और कम जगह में कई सारे रखे जा सकते हैं। इन स्टूल के बीच में छेद बना होता है, कभी सोचा है कि ये छेद क्यों बने होते हैं।

प्लास्टिक के स्टूल तो आपने कई देखे होंगे। घरों में या फिर दुकानों पर अक्सर छोटे-बड़े कई हाइट के स्टूल रखे होते हैं। जो बैठेने के काम आते हैं और कई बार इन्हीं स्टूल पर मेहमानों के लिए चाय-पानी भी रख दिया जाता है। इधर से उधर दिनभर घूमने वाले इन स्टूल की बनावट में एक चीज बिल्कुल कॉमन होती है। वो है बीच में बना छेद। देखकर अजीब लगता है लेकिन ज्यादातर कंपनियां स्टूल के बीच में एक छेद बनाकर देती है। कभी सोचा है कि आखिर इस स्टूल में ये छोटा सा छेद क्यों होता है। ये कोई डेकोरेशन के लिए नहीं होता बल्कि इस छेद का बड़ा काम होता है।
जानें आखिर क्यों प्लास्टिक के स्टूल में छेद होता है...
आसान स्टोरेज
स्टूल का इस्तेमाल ज्यादातर ऐसे घरों में होता है जहां पर जगह कम होती है। या फिर वो दुकानें जिनमे जगह कम होती है। और वो किसी ऐसे पोर्टेबल सामान को चाहते है जो आसानी से घर या दुकान के किसी कोने में फिट हो जाए और जब जरूरत हो तो इसे बाहर निकालकर यूज कर सकें। अब अगर एक से ज्यादा स्टूल को एक के ऊपर एक चढ़ाकर रख दिया जाए तो इन प्लास्टिक में वैक्यूम क्रिएट हो जाएगा और सारी प्लास्टिक की स्टूल एक दूसरे से चिपक जाएंगी और आसानी से निकल नहीं पाएंगी। जब इनमे एक छेद बना होता है तो हवा पास होती रहती है और इन्हें एक दूसरे से अलग करना आसान हो जाता है।
पकड़ने में आसान
दूसरा कारण प्लास्टिक के स्टूल में छेद देने का है कि इसे पकड़ना आसान हो जाए। स्टूल के किना्रों से इसे पकड़ने की बजाय फटाफट छेद में उंगली को फंसाकर आसानी से इधर से उधर किया जा सकता है। जहां पर इन स्टूल की ज्यादा मात्रा होती है। वहां पर ये डिजाइन बडे काम आती है।
पानी निकालने में मदद
स्टूल अक्सर आउटडोर जगहों पर इस्तेमाल किए जाते हैं, जहां पर इनके भीगने का भी डर होता है। लेकिन छेद होने की वजह से पानी इन पर टिकता नहीं और ये फौरन सूख जाते हैं। अगर छेद नहीं होगा तो ये ज्यादा देर तक गीले और सिलपरी रहेंगे और बैठने वाले को भी गीला कर देंगे।
प्लास्टिक स्टूल की कीमत और मैटेरियल कम लगना
प्लास्टिक स्टूल आम तौर पर इंजेक्शन मोल्डिंग का इस्तेमाल करके बनाए जाते हैं, जिसमें पिघले हुए प्लास्टिक को आकार दिया जाता है और ठंडा किया जाता है। बीच से थोड़ा सा मटीरियल हटाने से इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक की मात्रा कम हो जाती है, जिससे स्टूल हल्का हो जाता है और बड़े पैमाने पर बनाना सस्ता हो जाता है।
स्टूल की लाइफ बढ़ जाती है
एक छोटा सा छेद स्टूल की लाइफ को भी बढ़ा देता है। दरअसल, जब स्टूल पर कोई बैठता है तो प्रेशर पड़ता है और प्लास्टिक के फटने का डर रहता है। लेकिन बीच में छेद करने से वो प्रेशर डिस्ट्रीब्यूट हो जाता है और समय के साथ स्टूल में क्रेक पड़ने के चांस कम हो जाते हैं।


