ऑफिस गए बस 9 घंटे काटने के लिए, जानिए क्या है Quiet quitting का ट्रेंड जिसने मचाया बवाल

Apr 08, 2026 05:45 pm ISTAparajita लाइव हिन्दुस्तान
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Quiet quitting meaning: ऑफिस पहुंचकर बस काम के 9 घंटे बिताते हैं और जल्दी से काम खत्म होने का इंतजार करते हैं, तो ये केवल कामचोरी नहीं रह गई है बल्कि ये ट्रेंड बन गया है जिसे Quiet quitting बोला जा रहा। जानें क्या है Quiet quitting का मतलब…

ऑफिस गए बस 9 घंटे काटने के लिए, जानिए क्या है Quiet quitting का ट्रेंड जिसने मचाया बवाल

क्या आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो ऑफिस पहुंचते ही 9 घंटे पूरे होने का इंतजार करने लगते हैं? या फिर दिन भर काम करने का दिखावा करते हैं ताकि मैनेजर ना टोके। आप इसे कामचोरी कहेंगे लेकिन इससे एक नया ट्रेंड शुरू हो गया है। ये ट्रेंड है Quiet quitting का। Quiet quitting का मतलब है कि आप रोज ऑफिस जा रहे हैं लेकिन काम नहीं कर रहे हैं।

Quiet quitting क्या है?

इसका मतलब है कि कर्मचारी काम तो कर रहे हैं लेकिन सिर्फ इस मजबूरी में कि उन्हें सैलरी मिलती रहे। उनमें काम करने का कोई जोश या उत्साह नहीं है। स्टेट ऑफ द ग्लोबल वर्कप्लेस 2026 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, न सिर्फ भारत बल्कि साउथ एशिया में कर्मचारियों का अपने काम से लगाव कम हुआ है। यह लगातार दूसरा साल है जब कर्मचारी काम नहीं करना चाहे हैं। बस ऑफिस में बैठकर दिन काट रहे हैं। इसी को क्वाइट क्विटिंग कहते हैं। यानि ऑफिस जाना लेकिन मन लगाकर काम नहीं करना।

सर्वे में यह दिलचस्प बात पता चली है कि पहले साल में जहां सिर्फ स्टाफ में यह ट्रेंड देखा जा रहा था वहीं अब मैनेजर भी चुपके चुपके Quiet quitting को फॉलो कर रहे हैं।

मैनेजर भी अब Quiet quitting के दायरे में आए?

स्टेट ऑफ द ग्लोबल वर्कप्लेस 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, मैनेजरों का भी अपने काम से मोह भंग हो रहा है। साउथ एशिया, खासतौर पर भारत के डेटा देखें तो मैनेजर के काम करने के उत्साह में काफी कमी आई है। साल 2022-24 में जहां 39% मैनेजर अपने काम से जुड़े हुए थे, वहीं 2023-25 में यह आंकड़ा गिरकर 30% रह गया है।

भारतीय कर्मचारियों में बढ़ा गुस्सा और तनाव

इस रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में साउथ एशिया के 36% कर्मचारी रोजमर्रा के जीवन में उदासी महसूस कर रहा है। यह आंकड़ा ग्लोबल एवरेज से काफी ज्यादा है। ग्लोबल एवरेज 23% है।

भारत में कर्मचारियों के बीच गुस्से का ट्रेंड बढ़ा है। 2008-10 में यह 28% था, जो 2022-24 के दौरान बढ़कर 34% हो गया है।

काम में खुश रहने वाले कर्मचारियों की संख्या सिर्फ 16% है। सिर्फ इतने ही कर्मचारियों को लगता है कि वो जीवन में आगे बढ़ रहे हैं। जबकि ग्लोबल एवरेज 34% है।

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लेखक के बारे में

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अपराजिता शुक्ला पिछले छह सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर कंटेट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव


अपराजिता शुक्ला पिछले छह से अधिक सालों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती आ रही हैं। करियर की शुरुआत अमर उजाला डिजिटल में इंटर्नशिप और फिर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में की। जहां पर उन्हें मिसेज इंडिया 2021 की रनर अप के इंटरव्यू को भी कवर करने का मौका मिला। वहीं अब लाइव हिन्दुस्तान में कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम कर रही हैं। अपराजिता शुक्ला ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बी.कॉम के साथ मास कम्यूनिकेशन की डिग्री ली है।


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सरल और बेहद सामान्य भाषा में सेहत, फिटनेस और खान-पान के विषय में जानकारी देने के साथ बॉलीवुड फैशन पर निगाह रखती हैं। एक्टर-एक्ट्रेसेज के फैशन सेंस को आम लड़के-लड़कियों की पसंद-नापसंद के साथ कंफर्ट से जोड़कर टिप्स देना खासियत है। वहीं ट्रेंड में चल रहे विषयों के साथ रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाले हैक्स और टिप्स को अपने पाठकों तक पहुंचाना पसंद करती हैं।


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