छोटे शहर की लड़कियों ने बड़े पैमाने पर बनाई पहचान, पढ़ें कामयाबी की खबरें

हमारी दुनिया में हम से जुड़ी क्या खबरें हैं? हमारे लिए उपयोगी कौन-सी खबर है? किसने अपनी उपलब्धि से हमारा सिर गर्व से ऊंचा उठा दिया? ऐसी तमाम जानकारियां हर सप्ताह आपसे यहां साझा करेंगी, जयंती रंगनाथन

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Aparajita हिन्दुस्तानFri, 31 May 2024 02:35 PM
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हर मायने में आज के समय की जुझारू, प्रतिभाशाली और अपनी राह बनाने वाली और दूसरों को राह दिखाने वाली लड़की है, नैन्सी त्यागी। यह नाम अब किसी परिचय का मोहताज नहीं है। कान्स फिल्म फेस्टिवल में इस बरस इस तेईस साल की लड़की ने वो काम कर दिखाया, जो बड़ी-बड़ी अभिनेत्रियां और मॉडल नहीं कर पाईं। नैन्सी उत्तर प्रदेश के बागपत के पास एक छोटे से गांव बरनवा से है। बचपन से उन्हें अपने कपड़े डिजाइन करने और सिलने का शौक था। पहले गुड़ियों के लिए पोशाक बनाती थी, फिर अपने लिए बनाने लगी। फैशन और डिजार्इंनग का कोर्स नहीं किया, पर जब इसमें अपना करियर बनाने के लिए दिल्ली आने की बात हुई तो पापा नाराज हो गए। पर, नैन्सी की जिद थी वो कुछ बन कर दिखाएगी। वो सोशल मीडिया में अपनी तसवीरें डालने लगी। शुरू में जम कर ट्रोल भी हुई, पर उस जांबाज लड़की ने काम करना नहीं छोड़ा। आज वो एक चर्चित फैशन इन्फ्लुएंसर है।

इस साल जब वो कान्स फेस्टिवल में शामिल हुईं और खुद की सिली पोशाकों के लिए खूब वाहवाही मिली तो आखिरकार पापा भी उसका लोहा मान गए। यही नहीं, उसकी पोशाक को लेकर कई नामी लोगों ने ट्वीट किया है और उसे शाबाशी भी दी है। चर्चित अभिनेत्री और फैशन दिवा सोनम कपूर ने भी नैन्सी को सोशल मीडिया पर बधाई देते हुए लिखा है, तुम्हारा गुलाबी गाउन मेरे दिल को भा गया। मेरे लिए कब बनाओगी? नैन्सी की एक और खासियत रही, उसने कान्स में पत्रकारों के सवालों के जवाब पूरे आत्मविश्वास के साथ हिंदी में दिए। वाकई नैन्सी ने अपने लिए और दूसरों के लिए जो किया है, वो गर्व की बात है।

नैन्सी की ही तरह का एक मिसाल कायम की है, पूनम कुशवाहा ने। गुजरात के वडोदरा शहर में पूनम के पिताजी पानीपुरी का ठेला लगाते हैं। पूनम भी इस काम में उनकी पूरी मदद करती है। पिता के साथ काम करते हुए पूनम ने इस साल दसवीं की परीक्षा में 99.72 प्रतिशत हासिल किया है, वो भी बिना ट्यूशन लिए। पूनम आगे भी अपने पापा की मदद करते हुए पढ़ाई करना चाहती हैं। इसमें कोई शक नहीं कि ये प्रतिभाशाली लड़की अपना और देश का खूब नाम करेगी। प्रतिभा कभी किसी शहर या परिवेश का मोहताज नहीं है। आजकल की लड़कियां जोर-शोर से यही साबित कर रही हैं।

बच्चों में मोटापा, आज ही करें रोकथाम

अकसर छोटी उम्र के गोलू-मोलू बच्चे परिवारों में बहुत पसंद किए जाते हैं। बल्कि कई परिवारों में तो पांच-छह साल के बच्चों से यह उम्मीद की जाती है कि वो खूब खाएं और मोटे हो जाएं। डेली मेल के हेल्थ स्तंभ में प्रकाशित खबर के अनुसार अगर आप भी ऐसी ही अभिभावक हैं, तो आज ही चेत जाएं। बचपन का मोटापा चालीस प्रतिशत केस में चालीस साल के पहले टाइप टू डायबिटीज की बीमारी ले आता है। डॉक्टरों की सलाह है कि जो बच्चे पांच-छह साल की उम्र में मोटापे से दूर हो जाते हैं, उनके डायबिटीज से बचने की आशंका 57 प्रतिशत बढ़ जाती है। डॉक्टर कैरेल रूक्स कहते हैं , ‘मोटे बच्चों को सेहत से जुड़ी और भी कई परेशानियां हो सकती हैं। डायबिटीज उनमें से एक है। अपने बच्चे को पोषक और संतुलित आहार दीजिए, ताकि बड़े होने पर उनकी सेहत तंदुरुस्त रहे।’

बचाइए अपने घरों की बूढ़ी और दिव्यांग औरतों को

वल्र्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में हर तीन में से एक वृद्धा और दिव्यांग स्त्रियां क्रूर हिंसा का शिकार होती हैं, वो भी अपनों के द्वारा। डब्ल्यूएचओ की टेक्निकल ऑफिसर डॉक्टर लिनमेरी सरडिन्हा कहती हैं, ‘तीसरी दुनिया के देशों में ऐसे केसेज अधिक हैं, हमारी कोशिश यही रहती है कि हम उनके प्रति लोगों को संवेदनशील बनाएं और उन्हें समाज के मुख्य धारा में शामिल करने की कोशिश करें।’ मुख्य बात यह है कि इस बदलाव में पूरे समाज के रवैये और सोच में बदलाव आने की जरूरत है, तभी इस हिंसा से इन महिलाओं को बचाया जा सकेगा।

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