होटल में 2 बजे के पहले चेक इन क्यों नहीं देते, कारण जानते हैं?
कभी सोचा है कि आखिर किसी भी होटल बड़े या छोटे कहीं भी जाएं तो उसमे चेक आउट का समय 12 और चेक इन का समय 2 बजे ही क्यों होता है। दरअसल, ये नियम ग्लोबली है और इसके पीछे खास कारण छिपा है।

किसी भी होटल में अगर आप रुकने के लिए जाते हैं तो वो आपको 2 बजे के पहले चेक इन नहीं देता। वहीं आपके होटल रूम को छोड़ने की टाइमिंग यानि चेक आउट का समय 12 बजे का रखा जाता है। आखिर ऐसा क्यों है कि 2 घंटे कमरे के खाली रहने के बाद भी आपको वो कमरा नहीं देते। आप कितनी भी जल्दी पहुंच जाएं और एक्स्ट्रा पैसै देने को रेडी हों लेकिन अक्सर होटल वाले रूम देने से इनकार कर देते हैं और बताते हैं कि रूम उपलब्ध नहीं है। जबकि ऐसा नहीं होता कि किसी होटल के सारे रूम एक साथ हमेशा भरे हों। दरअसल, इसके पीछे बहुत ही सिंपल लेकिन जरूरी कारण छिपा हुआ है और ये दुनियाभर के सभी होटलों पर ये स्टैंडर्ड टाइमिंग सेट रहती है। होटल में कमरे अक्सर 2 बजे के बाद ही चेक इन के लिए मिलते हैं।
दुनियाभर के होटल फॉलो करते हैं ये रूल
आप किसी भी होटल में जाते हैं और चेक इन के लिए पूछते हैं तो वो अपनी टाइमिंग 2 बजे ही बताते हैं। इसका कारण है हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्रीज का नियम, जिसकी मदद से वो अपनी सर्विस को कस्टमर के लिए बेहतर बनाते हैं। ग्लोबली हॉस्पिटैलिटी सिस्टम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि चेक इन के लिए कमरे 2 बजे के बाद ही मिलेंगे। भले ही कभी आपको ये असुविधाजनक लगा हो लेकिन ये पूरी तरह से कस्टमर की सुविधा के लिए ही बनाया गया नियम है।
टाइम मैनेजमेंट को ध्यान में रखकर बनाया गया है ये नियम
दरअसल, चेक इन और चेक आउट के टाइम में 2 घंटे का गैप रखा गया है, जो पूरी तरह से टाइम मैनेजमेंट को ध्यान में रखकर किया गया है। कमरे से एक गेस्ट के जाने के बाद दूसरे गेस्ट के आने के बीच जब दो घंटे का वक्त होता है तो उस बीच पूरे कमरे की डीप क्लीनिंग की जाती है। जिससे अगले गेस्ट के लिए कमरे को रेडी किया जा सकते।
चेक आउट का टाइम 10-12 होता है
काफी सारे होटलों में चेक आउट यानि कमरे को छोटने का टाइम सुबह 10 बजे से 12 बजे के बीच होता है। इस बीच गेस्ट जब चला जाता है तो क्लीनिंग स्टाफ को पर्याप्त मात्रा में समय मिल जाता है कि वो अगले गेस्ट को क्लीन रूम उपलब्ध करा सके।
इन दो घंटों में कमरे के फ्लोर की क्लीनिंग, बेडशीट चेंजिंग, बाथरूम के फ्लोर क्लीनिंग से लेकर बाकी क्लीनिंग एंड ड्राईंग प्रोसेस को पूरा किया जाता है। रिफिलिंग, टॉवल चेंजिंग जैसे कई स्टेप होते हैं, जिनकी मदद से होटल के कमरे को फिर से बिल्कुल साफ-सुथरा और नया जैसा कर दिया जाता है। इस काम में समय लगता है और सारे काम अच्छी तरह से स्टाफ कर सके इसके लिए पर्याप्त समय दिया जाता है।
कंफ्यूजन ना हो जाए इसलिए 2 बजे का समय
साथ ही ये कमरों में कंफ्यूजन ना हो जाए इसके लिए भी चेक इन का समय 2 बजे का दिया जाता है। तय समय जब निर्धारित होता है तो हर गेस्ट के आने और जाने का समय सटीक होता है और सारे क्लीनिंग प्रोसेस भी टाइम पर होते हैं। जिससे फ्रंट स्टाफ को होटल के कमरों की जानकारी रखना आसान हो जाता है और गेस्ट के आने पर वो उसे सही तरीके से कमरे को दे पाते हैं। इसलिए समय को फिक्स रखा जाता है और उसी तय समय पर ही लोग होटल का रूम छोड़ते हैं और नए गेस्ट आते हैं।


