प्लेन में क्यों होती हैं गोल खिड़कियां और मॉल में क्यों नहीं दिखतीं विंडो? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

लाइव हिन्दुस्तान
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क्या कभी आपने गौर किया है प्लेन की खिड़कियां राउंड-ओवल क्यों होती हैं और मॉल में एक भी खिड़की या घड़ी क्यों नहीं होती है। इन दोनों सवालों के पीछे बड़ी वजह छिपी हुई है, चलिए आपको एक-एक करके बताते हैं। 

Why are airplane windows round and mall don't have window and clock

हवाई जहाज में आपने कभी न कभी जरूर सफर किया होगा और ज्यादातर लोगों को विंडो सीट पर बैठना पसंद होता है। खिड़की वाली सीट से बाहर का खूबसूरत नजारा साफ दिखता है, जो हर किसी को अच्छा लगता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर प्लेन की खिड़कियां गोल शेप में ही क्यों होती हैं और चौकोर में क्यों नहीं। सिर्फ यही नहीं शॉपिंग मॉल में सामान खरीदने अब हर कोई जाता है, फिर चाहे कपड़े, जूते लेने हो या फिर घर का राशन। हम जब भी मॉल में जाते हैं, तो सामान लेने के बाद कुछ खाने पीले लगते हैं या कुछ देखने लगते हैं क्योंकि हमे समय का पता नहीं चलता। क्या आपने कभी गौर किया है मॉल में ना ही खिड़कियां होती हैं और ना ही घड़ियां, आखिर ऐसा क्यों होता है? आज हम आपको इन दोनों सवालों के दिलचस्प जवाब देने जा रहे हैं।

हवाई जहाज की गोल खिड़कियों का राज क्या है

पहले हम बात करेंगे हवाई जहाज की गोल खिड़कियों के बारे में जो चौकोर क्यों नहीं होतीं? इसका जवाब है यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए उसकी खिड़कियों गोल डिजाइन की जाती है। दरअसल, हवाई जहाज हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ते हैं, जहां बाहर का एयर प्रेशर जमीन की तुलना में काफी कम होता है। ऐसे में यात्री आराम से सांस ले सकें इसके लिए आर्टिफिशियल प्रेशर बनाया जाता है, ऐसे में प्लेन के अंदर और बाहर के प्रेशर में बड़ा अंतर होता है। हर उड़ान के दौरान विमान का ढांचा थोड़ा फैलता और सिकुड़ता रहता है, जिससे उस पर लगातार दबाव पड़ता रहता है और यही कारण है कि चीजों को वैसे ही डिजाइन किया जाता है।

राउंड विंडो कैसे हैं सेफ

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, प्लेन की खिड़कियों के कोनों पर ज्यादा दवाब पड़ता है। अगर खिड़कियों को चौकोर बनाते हैं और कोने नुकीले हुए तो वहां से दरारें आने लगती हैं। खिड़कियां दरारों के कारण टूट भी सकती है, जिससे लोगों की जान का खतरा हो सकता है। ऐसे में राउंट या ओवल शेप खिड़कियों में कोने नहीं होते और विमान के बाहर-अंदर का प्रेशर बंट जाता है। ऐसे में दरारों के बनने की संभावना काफी कम होती है। साल 1950 से पहले विमान में चौकोर खिड़कियां ही बनाई गई थी लेकिन ऐसी खिड़कियों कई हादसों की वजह बनीं। इसके बाद से ही ओवल और राउंड शेप खिड़कियां विमान में बनाई जाने लगी।

मॉल में क्यों नहीं होतीं खिड़कियां और घड़ियां

मॉल के अंदर अगर एक बार घुस जाओ तो कब घंटों बीत जाते हैं पता ही नहीं चलता। शॉपिंग, खाने-पीने और घूमने के चक्कर में समय तेजी से निकल जाता है और वहां पर खिड़की या घड़ी न होने की वजह से दिन हो रही है या शाम पता भी नहीं चल पाता। दरअसल, ऐसा इसलिए होता है जिससे ग्राहक लंबे समय तक मॉल के अंदर बने रहें और उन्हें बाहर के शोर या समय के बारे में पता न चलें। शॉपिंग मॉल में आमतौर पर पूरी बिल्डिंग में तेज और सोच-समझकर लगाई गई लाइटों का इस्तेमाल किया जाता है। इस एक जैसी रोशनी से ऐसा लगता है कि हमेशा दिन ही है। बाहर की गतिविधि को दिखाने वाली खिड़कियां ना होने की वजह से खरीदार पूरी तरह से अपने आसपास की दुकान, डिस्प्ले और प्रमोशनल ऑफर पर ध्यान देते हैं।

म्यूजिक और लेआउट शॉपिंग भी डालते हैं असर

मॉल में लगातार चलने वाला बैकग्राउंड म्यूजिक भी असर डालता है। कई मॉल धीमा और सुकून देने वाला म्यूजिक बजाते हैं, जिससे लोग सुकून से वहां घूमते या बैठे रहते हैं। मॉल में लोग सिर्फ शॉपिंग करने ही नहीं आते बल्कि यहां लोग दोस्तों से भी मिलते हैं, ऐसे में समय का पता नहीं चलता। अगर मॉल में खिड़कियां हो तो बाहर से धूप अंदर आएगी और गर्मी भी, ऐसे में अंदर रखे सामान के खराब होने का खतरा भी रहता है। अब से आप जब भी मॉल जाए तो गौर करिएगा कि वहां कोई खिड़की-घड़ी नहीं मिलेगी।

Deepali Srivastava

लेखक के बारे में

Deepali Srivastava

दीपाली श्रीवास्तव पिछले 8 वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और 5 सालों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में डेप्युटी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। संस्थान में साल 2021 में वेब स्टोरी से अपने सफर की शुरुआत करने के बाद, वह आज लाइफस्टाइल टीम का अहम हिस्सा हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स, यूजर बिहेवियर और पाठकों की रुचि को समझने में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद और प्रभावशाली कंटेंट प्रोफेशनल बनाती है।


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दीपाली ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत साल 2018 में राजस्थान पत्रिका की डिजिटल टीम से की। करियर के शुरुआती दौर से ही वह डिजिटल मीडिया से जुड़ी रही हैं। इसके बाद उन्होंने इन्शॉर्ट्स, सत्य हिंदी, बॉलीवुडशादीज.कॉम और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम किया। इस दौरान उन्होंने एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर लेखन के साथ-साथ सेलेब्रिटी इंटरव्यू, वीडियो स्टोरीज, फिल्म रिव्यू और रिसर्च-बेस्ड कंटेंट की कवरेज की।


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