भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास बसा है देश का आखिरी गांव, जानें यहां कैसे पहुंचे और क्या है घूमने लायक
भारत में ऐसे कई गांव हैं, जिनके बारे में शायद ही आपने सुना होगा। भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास देश का आखिरी गांव बसा हुआ है, जो बेहद सुंदर है। इस गांव की खूबसूरती देखने लोग दूर से आते हैं।

भारत में ऐसी कई जगहें हैं, जिन्हें शायद ही किसी ने देखा हो और उनके बारे में सुना हो। भारत में ऐसे कई गांव हैं, जो अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर हैं लेकिन क्या आपने देश के आखिरी गांव के बारे में सुना है। भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास देश का आखिरी गांव बसा हुआ है, जिसे देखने लोग दूर-दूर से आते हैं। इस गांव के बारे में शायद ही आपने कभी सुना होगा लेकिन इसकी सुंदरता देखने लायक है। लद्दाख के आखिरी छोर पर बसा ये गांव अपनी सभ्यता और संस्कृति की वजह से भी खास है। ऊंचे पहाड़ों के बीच बसे इस गांव में बाल्टी संस्कृति के लोग रहते हैं, इनकी भाषा बिल्कुल अलग है। चलिए बताते हैं ये गांव कौन सा है और यहां कैसे पहुंचे-
कौन सा है ये गांव
भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास बसे देश के आखिरी गांव का नाम तुरतुक गांव है। तुरतुक गांव पहाड़ों, बर्फीली वादियों, नदियों, झरने के बीच बसा हुआ है और यहां लोग ट्रेकिंग के लिए भी दूर-दूर से आते हैं। लद्दाख के आखिरी छोर पर बसा ये गांव आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
भारत में कैसे आया ये गांव
साल 1971 की लड़ाई में जब भारत से पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब मिला, तभी तुरतुक गांव उनके मुल्क से निकल कर भारत में शामिल हो गया था। ये गांव बॉर्डर से 8 किलोमीटर पहले है। इसके आगे थांग नाम की जगह है लेकिन ये पाकिस्तानी सेना की स्नाइपर रेंज मौजूद है, जहां भारतीयों का जाना मना है। पाकिस्तान में जब ये गांव मौजूद था, तब इसका नाम बाल्टिस्तान हुआ करता था। यही वजह कि यहां पर बाल्टी संस्कृति आज भी है।
खासियत क्या है
तुरतुक गांव में 16वीं सदी की मस्जिद और आइकॉनिक पोलो ग्राउंड और खुबानी की भरपूर खेती देखने को मिलेगी। यहां पर बाल्टी हेरिटेज होम, बाल्टी म्यूजियम और तुरतुक गोम्पा भी देखने लायक है। यहां पर करीब 2500 से 3000 तक की आबादी रहती है। यहां आपको होटल कम मिलेंगे लेकिन लोगों के घरों में होम स्टे की सुविधा अच्छी मिलेगी।
कैसे पहुंचे तुरतुक गांव
तुरतुक गांव तक जाने के लिए आपको प्रशासन की अनुमति लेनी होगी। आपको लेह तक पहुंचने के बाद वहां के जिला प्रशास से इनर लाइन परमिट लेना होगा और ये परमिट सिर्फ 5 दिनों तक वैध्य रहेगा। 5 दिनों तक आप इस गांव में ठहर सकते हैं और ये परमिट सीधा एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिस से मिल जाएगा। परमिट के बिना आपको इस गांव में एंट्री नहीं मिलेगी और इसे लौटने तक साथ रखना होगा, चेकिंग में दिखाना पड़ सकता है। गांव पाकिस्तान बॉर्डर के पास होने की वजह से बाहर से आने वाले लोगों की सेक्योरिटी चेक होती है।
लेखक के बारे में
Deepali Srivastavaदीपाली श्रीवास्तव पिछले 8 वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और 5 सालों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में डेप्युटी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। संस्थान में साल 2021 में वेब स्टोरी से अपने सफर की शुरुआत करने के बाद, वह आज लाइफस्टाइल टीम का अहम हिस्सा हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स, यूजर बिहेवियर और पाठकों की रुचि को समझने में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद और प्रभावशाली कंटेंट प्रोफेशनल बनाती है।
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