फूलों की घाटी देखने का गोल्डन चांस! जानें परमिट, रजिस्ट्रेशन से लेकर ट्रैकिंग से जुड़ी जानकारी
Valley of Flowers Open Travel Guide: 1 जून से उत्तराखंड के चमोली जिले में बनी फूलों की घाटी का गेट टूरिस्ट के लिए खोल दिया गया है। यहां पर रंग-बिरंगे फूलों के साथ जंगली वन्य जीव और हिमखंड के भी दीदार होंगे। घाटी तक पहुंचने के लिए ट्रैकिंग के साथ ही परमिट जैसी जरूरी चीजों की जानकारी जरूर कर लें।

रंग-बिरंगे फूलों की दुनिया का अद्भुत द्वार आज यानि 1 जून 2026 से खुल चुका है। यूनेस्को की विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल ये अद्भुत जगह अपने सुरम्य नजारों, रंग-बिरंगे फूलों और अपनी लंबी ट्रैकिंग के लिए जानी जाती है। दुनियाभर से टूरिस्ट इस फ्लावर्स ऑफ वैली को देखने के लिए 16-17 किमी लंबा ट्रैक चलकर पहुंचते हैं। बारिश का मौसम शुरू होने के साथ ही यहां पर 20 से भी ज्यादा वैराइटी के फूल खिलना शुरू हो जाते हैं। इन फूलों को एक साथ खिला हुआ देखना किसी जन्नत का एहसास देता है। वन विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी है कि इस साल वैली ऑफ फ्लावर नेशनल पार्क में काफी ज्यादा मात्रा में फूल खिले हैं। जो टूरिस्ट को काफी अट्रैक्ट कर रहे हैं। तो अगर आप सुंदर नजारे को देखना चाहते हैं तो इस नेशनल पार्क को देखने के लिए रजिस्ट्रेशन, परमिट से लेकर ट्रैकिंग से जुड़ी सभी जानकारी जरूर जान लें।
कब खुलती है फूलों की घाटी
हर साल 1 जून को वैली ऑफ फ्लावर्स खुल जाता है और अक्टूबर महीने तक खुला रहता है, यानि 31 अक्टूबर को ये नेशनल पार्क आम टूरिस्ट लोगों के लिए बंद कर दिया जाता है। पूरे 5 महीनें यहां पर 20 से भी ज्यादा प्रजाति के फूल खिले रहते हैं। जिन्हें देखना अद्भुत लगता है।
खुलने की टाइमिंग- फूलों की घाटी सुबह 7:30 बजे टूरिस्ट के लिए खोल दी जाती है। वहीं शाम को 5 बजे के बाद इसे टूरिस्ट के लिए बंद कर दिया जाता है। इस पार्क में रात को रुकने की व्यवस्था नहीं है और आपको वापस नीचे उतरना ही होगा।
फूलों की घाटी की खासियत
चमोली जिले में समुद्र से 12,995 फीट की ऊंचाई पर 87.5 वर्ग किमी क्षेत्र में फूलों की घाटी फैली है। जिसे 1 जून से पूरे 5 महीने के लिए आम टूरिस्ट के लिए खोल दिया जाता है। इस नेशनल पार्क में जैवविविधता का खजाना बिखरा हुआ है। 500 से अधिक रंग-बिरंगे फूल एक साथ खिलते हैं। हर 15 दिन में नई प्रजाति के फूल खिल जाते हैं। जिन्हें देखें तो ऐसा लगता है जैसे घाटी अपना रंग बदल रही हो। यहीं नहीं इस घाटी में आपको कई तरह के जीव जन्तु भी मिल जाएंगे। कस्तूरी मृग से लेकर हिम तेंदुआ, हिमालयन थार का दीदार किस्मत की बात होती है।
कैसे पहुंचे वैली ऑफ फ्लावर्स
वैली ऑफ फ्लावर्स देखने की चाह है तो सबसे पहले जान लें कि यहां तक आप ट्रैकिंग के जरिए ही पहुंच सकते हैं।
- नजदीकी रेलवे स्टेशन है ऋषिकेश, यहां से आपको गोविंदघाट के लिए कैब या टैक्सी मिल जाएगी। वहीं अगर आप डायरेक्ट सड़क मार्क से आ रहे तो केवल गोविंद घाट तक ही आ सकते हैं। यहां से थोड़ी दूरी पर ही है पुलना गांव। जो आखिरी पड़ाव है।
- पुलना से पूरे 10 किमी का रास्ता पैदल ही पूरा करना होता है। इस ट्रैकिंग के बाद आप घांघरिया पहुंचते हैं।
- घांघरिया से 3 किमी पैदल और चलकर आप वैली ऑफ फ्लावर्स पहुंचते हैं। फूलों की घाटी नेशनल पार्क में एंट्री के बाद आपको अंदर पूरा पैदल ही चलना होता है। घाटी के अंदर मात्र 5 किमी की ट्रैकिंग की इजाजत है। फूलों की घाटी के बीच में बनी है पुष्पावती नदी, जिसका साफ पानी टूरिस्ट को फूलों से भी ज्यादा अट्रैक्ट करता है।
- चूंकि फूलों की घाटी में रात रुकना या कैपिंग करना मना है तो हर टूरिस्ट को वापस 3 किमी चलकर घांघरिया लौटना ही पड़ता है।
फूलों की घाटी का परमिट लेना है जरूरी
- प्रकृति के इस सुंदर नजारे को देखने के लिए आपको सरकार की परमिट लेना भी जरूरी होता है। वैसे तो ये सुविधा ऑनलाइन भी है। लेकिन साल 2026 में अभी ऑफलाइन परमिट ही दिया जा रहा है। ये परमिट मात्र 1 दिन के लिए ही वैलिड होता है।
- ऑफलाइन परमिट की सुविधा घांघरिया में रहती है लेकिन आपको नीचे पुलना और गोविंदघाट में ट्रैक शुरू करने से पहले ही अच्छी तरह से पूछताछ कर लेना चाहिए और परमिट लेकर ही यात्रा करनी चाहिए।
- साथ में आधारकार्ड, वोटरआईडी या पैन कार्ड रखना जरूरी होता है।
- फूलों की घाटी का परमिट शुल्क आम वयस्क नागरिक के लिए 200 रुपये और बुजुर्ग के लिए 100 रुपये रहता है। 18 साल से ऊपर के स्टूडेंट का 100 रुपये शुल्क रहता है।
फूलों की घाटी घूमने का बेस्ट टाइम
वैली ऑफ फ्लावर्स में फूलों ने नजारे देखने हैं तो सबसे अच्छा समय जुलाई-अगस्त का होता है। इस वक्त पूरी घाटी में रंग-बिरंगे हिमालयन फूल खिले होते हैं।
फूलों की घाटी ट्रैक से पहले कहां रुके
फूलों की घाटी की ट्रैकिंग के लिए ही जा रहे तो घांघरिया में भी स्टे कर सकते हैं। यहां पर होटल, लॉज, होमस्टे , गेस्ट हाउस और कैपिंग की सुविधा भी मिल जाएगी।
लेखक के बारे में
Aparajitaअपराजिता शुक्ला पिछले छह सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर कंटेट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।
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अपराजिता शुक्ला पिछले छह से अधिक सालों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती आ रही हैं। करियर की शुरुआत अमर उजाला डिजिटल में इंटर्नशिप और फिर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में की। जहां पर उन्हें मिसेज इंडिया 2021 की रनर अप के इंटरव्यू को भी कवर करने का मौका मिला। वहीं अब लाइव हिन्दुस्तान में कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम कर रही हैं। अपराजिता शुक्ला ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बी.कॉम के साथ मास कम्यूनिकेशन की डिग्री ली है।
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