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Dwarkadhish Temple: द्वारकाधीश से जुड़े हैं कई फैक्ट्स, जानिए मंदिर से जुड़ी डिटेल्स

Facts About Dwarkadhish Temple: गुजरात में मौजूद पवित्र मंदिर द्वारकाधीश मंदिर से जुड़े कई इंटरेस्टिंग फैक्ट्स हैं, जिसे शायद आप भी नहीं जानते होंगे। ऐसे में यहां हम आपको बता रहे हैं मंदिर की डिटेल्स-

Dwarkadhish Temple: द्वारकाधीश से जुड़े हैं कई फैक्ट्स, जानिए मंदिर से जुड़ी डिटेल्स
Avantika Jainलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSun, 25 Feb 2024 01:38 PM
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पश्चिमी सिरे पर स्थित द्वारका भारत का एक प्राचीन शहर है। यहां गोमती नदी के तट पर मौजूद द्वारकाधीश मंदिर गुजरात के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है। ये मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। इस मंदिर में  हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक दर्शन और इसके आसपास घूमने के लिए आते है। इस मंदिर से जुड़े कुछ इंट्रेस्टिंग और पौराणिक फैक्ट्स के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं। तो चलिए जानते हैं मंदिर से जुड़े फैक्ट्स-

सालों पुरानी है मंदिर की वास्तुकला
द्वारका शहर का इतिहास महाभारत में द्वारका साम्राज्य के समय का है। द्वारकाधीश मंदिर पांच मंजिला है, जिसे चूना पत्थर और रेत से बनाया गया है। कहते हैं कि 2200 साल पुरानी वास्तुकला उनके पोते वज्रनाभ द्वारा बनाई गई थी, जिन्होंने इसे भगवान कृष्ण द्वारा समुद्र से प्राप्त भूमि पर बनाया था। मंदिर के अंदर दूसरे मंदिर हैं जो सुभद्रा, बलराम और रेवती, वासुदेव, रुक्मिणी और कई अन्य को समर्पित हैं। इस मंदिर में अंदर जाने से पहले भक्तों को गोमती नदी में डुबकी लगानी होती है।

कई बार बदला जाता है मंदिर का ध्वज 
दूसरे मंदिरों की तरह इस मंदिर की चोटी पर भी एक ध्वज लहराता है, जिसे भक्त सूर्य और चंद्रमा का प्रतीक मानते हैं। कहा जाता है कि इस ध्वज की ऊंचाई लगभग 75 फिट है। रिपोर्ट्स की मानें तो ये ध्वज दिनभर में कम से कम पांच बार बदला जाता है, लेकिन प्रतिक वही रहता है। 

दोनों द्वारों का नाम है अलग
मंदिर में प्रवेश के लिए वैसे तो एक ही गेट होता है, लेकिन इस मंदिर में दो द्वार हैं। एक द्वार उत्तर दिशा की ओर मौजूद है, जिसे 'मोक्ष द्वार' के नाम से जाना जाता है। दूसरा द्वार दक्षिण दिशा की ओर है जिसे 'स्वर्ग द्वार' भी कहा जाता है।

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