Navratri 2026: नवरात्रि में विदेशी फूलों से महकेगा मां वैष्णो देवी का दरबार, यहां जानिए इन फूलों की खासियत

Deepali Srivastava लाइव हिन्दुस्तान
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नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार 19 मार्च से हो रही है और ऐसे में माता के सभी मंदिरों को भव्य तरीके से सजाया जा रहा है। खासतौर पर माता वैष्णो देवी का दरबार सजाया जाएगा। मंदिर सजाने के लिए विदेशी फूल आते हैं और इनकी खासियत भी अलग होती है।

Navratri 2026: नवरात्रि में विदेशी फूलों से महकेगा मां वैष्णो देवी का दरबार, यहां जानिए इन फूलों की खासियत

नवरात्रि के पावन दिन 19 मार्च से शुरू हो रहे हैं और इस साल इसी दिन से हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) का भी पहला दिन होगा। ऐसे में माता वैष्णो देवी के दरबार को सजाने की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो चुकी है। हर साल की तरह इस साल भी माता का दरबार फूलों से सजाया जाएगा और मां दुल्हन की तरह तैयार हो जाएंगी। मां वैष्णो देवी के दरबार में जो फूल लगाए जाएंगे, वो विदेशी होंगे और उनकी खासियत भी अलग होती है। नवरात्रि के दौरान मां के मुख्य भवन, प्राचीन गुफा के प्रवेश द्वार और पूरे रास्ते को सजाने के लिए सैकड़ों टन फूलों का उपयोग किया जाता है। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) इसके लिए महीनों पहले से तैयारी शुरू कर देता है। सजावट का काम अनुभवी कारीगरों द्वारा कराया जाता है, जो फूलों से देवी-देवताओं की आकृतियां और भव्य द्वार तैयार करते हैं। साथ ही थीम के अनुसार चीजों को बनाते हैं। चलिए आपको पूरी जानकारी देते हैं।

फूलों से सजावट की परंपरा

माता वैष्णो देवी का दरबार फूलों से सजाने की परंपरा काफी पुरानी है। फूलों से सजावट का मतलब यहां भक्ति, शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना होता है। मंदिर को सजाने के लिए सिर्फ देश से ही नहीं बल्कि विदेश से भी फूलों को मंगाया जाता है। विदेशी फूलों की खासियत भी काफी अलग होती है।

विदेशी फूल और उनकी खासियत

फूल ग्लैडियोलस (Gladiolus) दक्षिण अफ्रीका/यूरोप से आता है। ये अपनी लंबी डंठल और चमकीले रंगों के लिए प्रसिद्ध। यह भव्यता का प्रतीक है।

फूल एन्थ्यूरियम (Anthurium) फूल दक्षिण अमेरिका से आते हैं, इसके दिल के आकार के चमकदार पत्ते इसे बेहद अनोखा और 'प्रीमियम' लुक देते हैं।

लिली (Oriental Lilies) फूल नीदरलैंड और जापान से आते हैं। ये अपनी मंत्रमुग्ध कर देने वाली खुशबू और बड़े आकार की पंखुड़ियों के लिए जानी जाती है।

कार्नेशन (Carnation) फूल कोलंबिया और तुर्की से मंगाए जाते हैं। ये फूल काफी लंबे समय तक ताजे रहते हैं, जो पहाड़ी मौसम के लिए उपयुक्त है।

ऑर्किड (Orchid) फूल थाईलैंड और मलेशिया से आते हैं। ये फूल पवित्रता और सुंदरता का प्रतीक माना जाता है। इसके बैंगनी और सफेद शेड्स दरबार को शाही लुक देते हैं।

जरबेरा (Gerbera) फूल दक्षिण अफ्रीका से आते हैं, जो अपने जीवंत रंगों (लाल, पीला, नारंगी) के कारण यह सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

इन फूलों की खासियत ये है कि ये पहाड़ों और ठंडी जगहों में भी 10-15 दिन तक ताजे बने रहते हैं। इसलिए इन्हें मंदिर सजाने के लिए विदेश से मंगाया जाता है। पहले ये सभी फूल दिल्ली आते हैं और फिर वहां से ट्रक और हेलिकॉप्टर के जरिए कटरा पहुंचाए जाते हैं। विदेशी फूलों के साथ-साथ भारत के गेंदा, गुलाब और चमेली का भी भरपूर इस्तेमाल किया जाता है, जो सजावट में एक पारंपरिक खुशबू जोड़ते हैं।

2026 की थीम क्या है

हर साल एक नई थीम चुनी जाती है। कभी दक्षिण भारतीय मंदिरों की झलक दिखती है, तो कभी फूलों से 'ओम' या 'त्रिशूल' जैसी कलाकृतियां बनाई जाती है। इस साल नववर्ष भी शुरू हो रहा है, तो इस साल वैष्णो देवी के दरबार में फूलों से शुभ आरंभ लिखा जाएगा।

खास होता है अनुभव

फूलों से सजा माता के दरबार में घुसते ही आपको अलग एहसास होगा। फूलों की भीनी-भीनी खुशबू और सजावट देखकर आंखों और मन को अलग ही सुकून मिलेगा। ऐसे में माता का दरबार देखकर लगता है जैसे स्वर्ग ही जमीन पर उतर आया हो।

Deepali Srivastava

लेखक के बारे में

Deepali Srivastava

दीपाली श्रीवास्तव पिछले 8 वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और 5 सालों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में डेप्युटी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। संस्थान में साल 2021 में वेब स्टोरी से अपने सफर की शुरुआत करने के बाद, वह आज लाइफस्टाइल टीम का अहम हिस्सा हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स, यूजर बिहेवियर और पाठकों की रुचि को समझने में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद और प्रभावशाली कंटेंट प्रोफेशनल बनाती है।


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