Nainital Lake Mystery: क्या वाकई नैनीताल की परीताल झील में आती हैं परियां? जानिए कहानी है या सच
नैनीताल घूमने जाने का प्लान कर रहे हैं, तो परीताल भी देखने जाएं। इस झील को लेकर कहा जाता है कि यहां पर देव परियां आती हैं। चलिए आपको इस झील और इसकी कहानियों के बारे में बताते हैं।

उत्तराखंड का खूबसूरत शहर नैनीताल घूमने के लिए हजारों लोग पहुंचते हैं। नैनीताल को झीलों का सुंदर शहर कहा जाता है, जहां पर आप प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देख सकते हैं। नैनीताल के भीमताल, राम ताल, लक्ष्मण ताल, सीता ताल के बारे में आपने खूब सुना होगा लेकिन क्या यहां पर मौजूद परीताल की कहानियां सुनी हैं। कुमाऊं की वादियों में दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसी परीताल झील अपने अंदर कई रहस्यों को समेटे हुए हैं। इस झील को देखने लोग जाते हैं और वहां पर फैली कहानियां सुनकर लौट जाते हैं। चलिए आपको आज हम परीताल की कहानी सुनाते हैं।
झीलों वाला शहर
ऐसा कहा जाता है कि नैनीताल में करीब 60 छोटे और बड़े ताल यानी झीलें हैं। इनमें भीमताल, राम ताल, लक्ष्मण ताल और गरुण ताल के बारे में आपने सुना होगा लेकिन परीताल के बारे में शायद ही कोई जानता होगा। नैनीताल से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर चाफी नाम का गांव है, यहीं से 3-4 किलोमीटर के पैदल रास्ते पर परीताल झील है। इस झील तक पहुंचने के लिए आपको पत्थरों और चट्टान वाले रास्ते से होकर गुजरना पड़ेगा।
परियों के आने की कहानियां
परीताल नाम से ही आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इस ताल की कहानी परी से जुड़ी हुई है। इस झील को लेकर लोककथाएं प्रचलित हैं कि यहां देव परियां आया करती हैं। कहते हैं कि हर पूर्णिमा की रात जब चांद की रोशनी पूरी होती है तो परियां इस झील में नहाने आती हैं। इसी वजह से झील का नाम भी परीताल पड़ा। इतना ही नहीं गांव के लोग पूर्णिमा की रात को इस झील के आस-पास नहीं जाते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि लोगों ने यहां से परियों को निकलते देखा है और इस झील की गहराई की पता कोई नहीं लगा पाया है।
शिलाजीत की चट्टानें
परियों की कहानियों के साथ झील के किनारे मौजूद चट्टानों को शिलाजीत की चट्टानें माना जाता है। फिलहाल, इन बातों में कितनी सच्चाई है इसका पता आजतक कोई नहीं लगा पाया है। लेकिन ये झील बेहद साफ और सुंदर दिखती हैं। लोग इसके किनारे बनी चट्टानों पर बैठकर फोटो खिंचवाते हैं और सुंदर नजारे देखते हैं।
यहां कैसे पहुंचे
दिल्ली से नैनीताल आप बस से जा सकते हैं और फिर वहां से भीमताल, धानाचूली मार्ग होते हुए चाफी गांव आना होगा। इस गांव से 4-5 किमी पैदल ट्रैक करते हुए आप इस झील तक पहुंच सकते हैं। बता दें, इस झील तक जाने के लिए आपको दिन में ही अनुमति मिलेगी। रात में लोग यहां जाने की एंट्री नहीं देते हैं। अगर आप एडवेंचर पसंद करते हैं, तो यहां तक जा सकते हैं। इसके अलावा नैनीताल के आस-पास की खूबसूरत जगहों पर भी घूमने जा सकते हैं। आप पंगोट जैसी सुंदर जगहों पर भी जाएं।


