
भारत में ही नहीं विदेशों में भी मौजूद हैं 5 प्राचीन शिव मंदिर, कई देशों से सुनने आते हैं लोग 'महादेव' के जयकारे
Famous Lord Shiva Temples Worldwide : भगवान शिव के प्रति सच्ची आस्था किसी देश या सरहद की मोहताज नहीं है। आपको बता दें, दुनिया के कोने-कोने में बसे कई ऐसे शिव मंदिर इस बात का जीवंत प्रमाण हैं।
महाशिवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के लिए बेहद खास महत्व रखता है। इस दिन भोलेबाबा के भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए व्रत, उपवास के साथ मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं। भगवान शिव के प्रति सच्ची आस्था किसी देश या सरहद की मोहताज नहीं है। आपको बता दें, दुनिया के कोने-कोने में बसे कई ऐसे शिव मंदिर इस बात का जीवंत प्रमाण हैं। भगवान शिव के इन मंदिरों का महत्व केवल धार्मिक आस्था से ही जुड़ा हुआ नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ता भी है, जो आज भी लाखों श्रद्धालुओं के अटूट विश्वास को एक साथ बांधे हुए हैं।
1. पशुपतिनाथ मंदिर (काठमांडू, नेपाल)
इस मंदिर को दुनिया के 275 'पाडल पेत्र स्थलम' (शिव के पवित्रतम स्थान) में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों को शरीर माना जाए, तो पशुपतिनाथ को उस शरीर का 'सिर' माना जाता है। इसके दर्शन के बिना ज्योतिर्लिंगों की यात्रा अधूरी मानी जाती है। बागमती नदी के किनारे स्थित इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां पशु रूप में शिव ने निवास किया था, इसलिए इन्हें 'पशुओं का स्वामी' यानी पशुपति कहा जाता है।
2. कटास राज मंदिर (चकवाल, पाकिस्तान)
यह मंदिर महादेव के प्रेम और विरह का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब माता सती आत्मदाह के बाद शिव से बिछड़ गईं, तो महादेव इतना रोए कि उनके आंसुओं से दो तालाब बन गए। एक राजस्थान के पुष्कर में है और दूसरा यहां कटास राज में। माना जाता है कि वनवास के दौरान पांडव भी यहां रुके थे और उन्होंने ही यहां के प्रसिद्ध 'यक्ष प्रश्न' का उत्तर दिया था।
3. मुन्नेश्वरम मंदिर (चिलाव, श्रीलंका)
इस मंदिर का सीधा संबंध रामायण काल से है। रावण का वध करने के बाद, भगवान राम को एक ब्राह्मण की हत्या का दोष लगा था। मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर शिव की आराधना करने के बाद श्री राम को उस पाप से मुक्ति मिली थी। यह श्रीलंका के 'पंच ईस्वरम' (पांच प्रमुख शिव मंदिरों) में से एक है।
4. प्रम्बानन मंदिर (जावा, इंडोनेशिया)
प्रम्बानन इंडोनेशिया के जावा में स्थित 9वीं सदी का विशाल हिंदू मंदिर परिसर है, जो भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा (त्रिमूर्ति) को समर्पित है। इस मंदिर को 'त्रिमूर्ति' मंदिर भी कहा जाता है, लेकिन इसका मुख्य आकर्षण बीच का शिव मंदिर है। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, यह दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिरों में से एक है, जो अपनी 47 मीटर ऊंची मीनारों (कैंडी) और रामायण नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। इसे संजय वंश के रकाई पिकाटन द्वारा बनवाया गया था। यह मंदिर उस समय के राजाओं की शिव के प्रति अटूट आस्था को दर्शाता है। बात अगर मंदिर के वास्तुकला की भव्यता की करें तो इसकी दीवारों पर उकेरी गई पत्थर की नक्काशी रामायण की पूरी कहानी बयां करती है, जो आज भी वहां के मुस्लिम बहुल समाज के लिए उनकी संस्कृति का हिस्सा है।
5. गंगा तलाव / ग्रैंड बेसिन (मॉरीशस)
यह मंदिर प्रवासी भारतीयों की अपनी जड़ों और आस्था को बचाए रखने की जिद का प्रतीक है। 19वीं सदी में जब भारतीय मजदूर मॉरीशस गए, तो वे अपनी संस्कृति साथ ले गए। उन्होंने इस झील को 'गंगा' का रूप माना और यहां महादेव की स्थापना की। आज यह हिंद महासागर के द्वीपों पर रहने वाले हिंदुओं के लिए सबसे पवित्र स्थान है, जहां महाशिवरात्रि पर लाखों लोग पैदल यात्रा करके पहुंचते हैं।

लेखक के बारे में
Manju Mamgain
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मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।
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