क्या आपने किए हैं चांदनी चौक वाले गौरी शंकर मंदिर के दर्शन? जानें यहां क्यों साथ पूजा करते हैं कपल्स

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चांदनी चौक का गौरी शंकर मंदिर सालों पुरान है। सावन के महीने में इस मंदिर में भक्तों की खूब भीड़ रहती है। यहां जानिए मंदिर का इतिहास, यहां कैसे पहुंचे और शादीशुदा जोड़ों के लिए ये मंदिर क्यों खास है। 

Do visit Gauri Shankar Temple of chandni chowk during the month of Sawan
चांदनी चौक का गौरी शंकर मंदिर सालों पुराना है। सावन के महीने में मंदिर में भक्तों की खूब भीड़ रहती है।(फाइल फोटो)

सावन का महीना आते ही अलग-अलग मंदिरों को खूबसूरती से सजा दिया जाता है। दिल्ली का फेमस श्री गौरी शंकर मंदिर सालों पुराना है और यहां पर भी सावन के महीने में भक्तों की लंबी लाइन लगी रहती है। गौरी शंकर मंदिर दिल्ली के सबसे पुराने हिंदू मंदिरों में से एक है, जो भगवान शिव को समर्पित है। चांदनी चौक की व्यस्त सड़क पर और मशहूर लाल किले के ठीक पास मंदिर, पुरानी दिल्ली की भागदौड़ के बीच शांति और आध्यात्मिकता का अनुभव कराता है। शादीशुदा जोड़े इस मंदिर में अखंड सौभाग्य का आशीष पाने के लिए आते हैं। आइए जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी जरूरी जानकारी।

अंदर से कैसा है मंदिर

मंदिर के अंदर भगवान शिव, उनकी पत्नी पार्वती और उनके दो बेटे, गणेश और कार्तिकेय की मूर्तियां हैं। असली सोने के गहने पहने भगवान शिव और पार्वती की मूर्तियां चांदी की छतरी के नीचे शिवलिंग के ठीक पीछे स्थित हैं। शिवलिंग के ऊपर चांदी का एक कलशा भी है, जिससे लगातार पानी की बूंदें गिरती रहती हैं।

कितने साल पुराना है गौरी शंकर मंदिर

माना जाता है कि यह मंदिर 800 साल से भी ज्यादा पुराना है। यहां भूरे रंग का शिवलिंग है, जो संगमरमर के ढांचे में जड़ा हुआ है। शिवलिंग के आसपास चांदी के नागों से घेरा हुआ है। इस मंदिर में भक्त देवी पार्वती और भगवान शिव की मूर्तियों की भी पूजा करते हैं, इसीलिए इस मंदिर का नाम गौरी शंकर पड़ा है।

किसने बनवाया था गौरी शंकर मंदिर

इतिहास के मुताबिक मराठा सैनिक अप्पा गंगाधर भगवान शिव के भक्त थे। एक बार लड़ाई में वे बुरी तरह घायल हो गए और तब उनके बचने की उम्मीद बहुत कम थी। इसलिए, उन्होंने भगवान शिव से अपनी जान बचाने की प्रार्थना की और वादा किया कि अगर वे बच गए तो एक सुंदर मंदिर बनवाएंगे। जब वह बच गए तो उन्होंने एक सुंदर मंदिर बनवाया। 1959 में सेठ जयपुरिया ने मंदिर का रेनोवेशन कराया।

क्या है मान्यता

मंदिर को लेकर एक जो मान्यता सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है वह है कि भगवान शिव और देवी पार्वती की साथ में पूजा करने से उनका रिश्ता सात जन्मों तक बना रहता है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि यहां पूरी श्रद्धा और सच्चे मन से प्रार्थना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सच्ची इच्छाएं पूरी होती हैं।

कैसे पहुंचे गौरी शंकर मंदिर

गौरी शंकर मंदिर में आप साल के किसी भी समय पर जा सकते हैं। यहां सावन के महीने और महाशिवरात्रि के समय पर भक्तों की भीड़ कुछ ज्यादा ही भीड़ होती है। यहां पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन चांदनी चौक का है। ये येलो लाइन का स्टेशन है। यहां आप बाजार की गलियों से होते हुए पैदल जा सकते हैं। वैसे तो यहां आपको रिक्शा मिल जाएगा लेकिन यहां भीड़ की वजह से आप पैदल ज्यादा जल्दी पहुंच जाएंगे। अगर मैट्रो से नहीं जाना चाहते हैं तो कैब, ऑटो और रिक्शा से आसानी से पहुंच सकते हैं।

नोट- चांदनी चौक में पार्किंग काफी दूर और कम हैं। इसलिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट से यहां पहुंचना सबसे अच्छा है।

डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Avantika Jain

लेखक के बारे में

Avantika Jain
अवंतिका जैन ने जर्नलिज्म एंड मास कॉम में डिग्री ली है। फिलहाल वह बतौर सीनियर कॉन्टेंट प्रोड्यूसर लाइव हिंदुस्तान में लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। एंटरटेनमेंट से जुड़ी खबरों को लिखने और वीडियोज बनाने में भी इनकी रुचि है। 5 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहीं अवंतिका लाइव हिन्दुस्तान से पहले ईटीवी भारत के दिल्ली डेस्क पर काम कर चुकी हैं। नई जगहों को एक्सप्लोर करना, नए लोगों से जुड़ना और फिल्में/वेब सीरीज देखने की शौकीन हैं। और पढ़ें

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