History of Kanpur City: क्या महाभारत के कर्ण ने बसाया था कानपुर शहर! यहां जानें 'पूर्व के मैनचेस्टर' का पूरा इतिहास

Mar 09, 2026 01:48 pm ISTDeepali Srivastava लाइव हिन्दुस्तान
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History of Kanpur City: उत्तर प्रदेश के शहर कानपुर का बिजनेस का बड़ा हब कहा जाता था और आज भी यहां का चमड़ा देश-विदेश में मशहूर है। कानपुर के इतिहास के बारे में कई कहानियां हैं, चलिए आज इस सुंदर शहर के बारे में कुछ खास बातें आपको बताते हैं।

History of Kanpur City: क्या महाभारत के कर्ण ने बसाया था कानपुर शहर! यहां जानें 'पूर्व के मैनचेस्टर' का पूरा इतिहास

History of Kanpur City: कानपुर शहर जिसका नाम सुनते ही आपको चमड़े का शहर याद आ जाता होगा। जो लोग कानपुर गए हैं, उन्हें मालूम होगा कि वहां चमड़े के बेल्ट, जूते, बैग कितने अच्छे मिलते हैं। यही वजह है कि कानपुर को पूर्व का मैनचेस्टर भी कहा जाता था। कानपुर सिर्फ कारोबार से जुड़ा शहर नहीं है बल्कि ये पौराणिक कथाओं से भरा हुआ है शहर है, जो गंगा के किनारे बसा है। इस शहर में मौजूद गंगा नदी उल्टी दिशा में बहती है और शायद ही ये बात किसी ने आजतक नोटिस की हो। गंगा नदी के उल्टे बहने के पीछे कई कहानी भी हैं और कुछ साइंस वाले तर्क भी। इस शहर का इतिहास राजाओं से जुड़ा हुआ भी है और महाभारत के कर्ण से भी। सीता से लेकर वाल्मीकि जैसे संत भी यहां तपस्या कर चुके हैं। इस खूबसूरत शहर के बारे में जितना भी कहा जाए कम है और इसका इतिहास और भी सुंदर है। चलिए आज आपको उत्तर प्रदेश के महानगर कानपुर के बारे में कुछ खास बातें बताते हैं।

किसने रखा कानपुर नाम?

पौराणिक कथाओं की मानें तो कानपुर का नाम महाभारत के कर्ण ने रखा। उन्हें अंग का राजा भी कहा जाता था और कर्ण ने शहर का नाम पहले कर्णपुर रखा और फिर बाद में कानपुर हुआ। कुछ लोगों का ये भी कहना है कि 18वीं शताब्दी में सचेंदी के राजा हिंदू सिंह द्वारा इसे बसाया गया। राजा ने इसका नाम भगवान श्रीकृष्ण के नाम पर कान्हापुर रखा। फिर बाद में इसे बदलकर कॉनपोर और फिर कानपुर किया गया।

सीता से नाता

कानपुर के बिठूर में प्रसिद्ध संत महर्षि वाल्मीकि का आश्रम बना हुआ है और यही पर माता सीता की रसोई भी बनी है, जिसे आज भी लोग देखने जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि मां सीता ने लव-कुश को यही जन्म दिया था। कहा ये भी जाता है कि ब्रह्मा जी ने यही से सृष्टि की रचना की थी।

उल्टी क्यों बहती है गंगा?

कानपुर में गंगा नदी उल्टी दिशा में बहती है और इसका पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कारण है कि जब गंगा धरती पर उतरीं, तो उनके तेज बहाव में भगवान दत्तात्रेय का कमंडल और आसन बह गया था। इस पर मां गंगा ने क्षमा मांगते हुए डेढ़ किलोमीटर तक विपरीत दिशा में बहकर उन्हें वापस लौटाया था। सांइस के मुताबिक, नदी के मार्ग में भंवर (whirlpools) बनते हैं, जिसके कारण लहरें पीछे की ओर मुड़ती हैं। इसे देखकर लोग गंगा को उल्टा बहते हुए देखते हैं।

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व्यापार का शहर

कानपुर व्यापार का बड़ा हब रहा है और आज भी वहां का चमड़ा देश-विदेश में मशहूर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब 1773 में अवध के नवाब से संधि के बाद यह अंग्रेजों के शासन में आया, तब साल 1778 में यहां छावनी (Cantonment) बनाई गई। इसके बाद ही कानपुर शहर महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र बन गया। 19वीं सदी के अंत तक, यह अपने बड़े कपड़ा उद्योग (लाल इमली मिल) और चमड़ा उद्योगों के लिए प्रसिद्ध हो गया, जिसके कारण इसे पूर्व का मैनचेस्टर कहा जाने लगा। अब कानपुर में मिल भले ही बंद हो गई हो लेकिन कपड़े और चमड़े का कारोबार आज भी कायम है।

मशहूर मंदिर व जगहें

कानपुर में परमठ जैसे मशहूर मंदिर हैं, जहां लोग दर्शन के लिए जाते हैं। यहां पर इस्कॉन, जेके टेंपल जैसे सुंदर मंदिर भी बने हुए हैं। आप कानपुर में गंगा बैराज घूम सकते हैं और कुछ किमी दूर वॉटर पार्क का मजा भी ले सकते हैं। कानपुर में घूमने के लिए अब कई बड़े मॉल भी बन चुके हैं।

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खाने के लिए क्या है खास

कानपुर जाएं तो ठग्गू के लड्डू खाना कतई न भूलें। लड्डू के अलावा कानपुर बदनाम कुल्फी, बन-मक्खन और पहलवान जी के मट्ठे के लिए भी जाना जाता है। कानपुर के छोले-भटूरे भी काफी टेस्टी होते हैं। नॉन-वेज में भल्लू बिरयानी और कबाब-पराठा का स्वाद सबसे खास है। कानपुर जाने का प्लान बनाएं, तो ये चीजें जरूर खाएं।

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दीपाली श्रीवास्तव पिछले 8 वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और 5 सालों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में डेप्युटी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। संस्थान में साल 2021 में वेब स्टोरी से अपने सफर की शुरुआत करने के बाद, वह आज लाइफस्टाइल टीम का अहम हिस्सा हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स, यूजर बिहेवियर और पाठकों की रुचि को समझने में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद और प्रभावशाली कंटेंट प्रोफेशनल बनाती है।


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