जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़े 5 हैरान करने वाले तथ्य, जिन्हें जानकर हर कोई रह जाता है दंग!
जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू हो रही है और हजारों श्रद्धालु इसमें शामिल होने के लिए पहुंचेंगे। लेकिन क्या आपने मंदिर से जुड़े कुछ अनसुने तथ्य सुने हैं। आज हम आपको जगन्नाथ मंदिर से कुछ दिलचस्प तथ्य बताते हैं।

उड़ीसा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर में हर साल रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है और इस साल रथ यात्रा की शुरुआत 16 जुलाई से हो रही है। इस यात्रा में भगवान जगन्नाथजी अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ तीन अलग-अलग रथों में सवार होकर अपनी बुआ के घर यानी गुंडिचा मंदिर तक जाते हैं। उनके रथ को खींचने के लिए हर साल हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। जगन्नाथ मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि रहस्यों से भरा हुआ भी है। इस मंदिर में ऐसी कई चीजें हैं, जिन्हें जानकर हर कोई दंग रह जाता है। यहां तक कि साइंस भी इन चीजों को आजतक समझ नहीं पाया है। चलिए आपको जगन्नाथ मंदिर से जुड़े 5 रोचक तथ्य बताते हैं।
कब बना था ये मंदिर?
रहस्यों को जानने से पहले जान लीजिए कि आखिर ये मंदिर कब बना था और इसे किसने बनवाया था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पुरी का प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर 12वीं शताब्दी में पूर्वी गंग वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव द्वारा बनवाया गया था।12वीं सदी के अंत में ओडिशा के शासक अनंग भीम देव ने मंदिर के निर्माण को पूरा करवाया था। कुछ लोगों का ये भी कहना है कि राजा इंद्रद्युम्न ने इसे बनवाया था और भगवान विश्वकर्मा ने स्वयं वृद्ध बढ़ई के रूप में आकर यहां की मूर्तियों को गढ़ा था। ऐसा कहा जाता है कि राजा इंद्रद्युम्न को स्वप्न में भगवान कृष्ण का दर्शन हुआ और उन्होंने समुद्र तट पर दिव्य लकड़ी से मूर्तियां बनाने का आदेश दिया।
क्या है मंदिर से जुड़े 5 रहस्य
लाल झंडे का उल्टी दिशा में उड़ने का रहस्य
जगन्नाथ मंदिर के ऊपर लाल रंग का झंडा हमेशा लहराता रहता है और खास बात ये है कि ये झंडा हवा की दिशा के उल्टी तरफ चलती है। साथ ही हर दिन मंदिर के पुजारी बिना किसी सुरक्षा के 200 फीट ऊपर चढ़कर इस झंडे को बदलता है। ऐसा कहा जाता है कि किसी भी दिन अगर ये झंडा नहीं बदला गया, तो मंदिर को बंद करना पड़ सकता है।
मंदिर में नहीं आती समुद्र की आवाज
जगन्नाथ मंदिर से समुद्र करीब 2 किमी दूर है लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि मंदिर प्रांगण में घुसते ही आपको समुद्र की तेज लहरों की आवाज नहीं सुनाई देगी। जैसे ही आप मंदिर से बाहर आएंगे आपको समुद्र की तेज आवाज सुनाई देने लगेगी। पुरानी कहानियों के अनुसार, समुद्र की आवाज के कारण भगवान जगन्नाथ आराम नहीं कर पाते थे, तब उन्होंने हनुमान जी को समुद्र पर पहरा देने को कहा और उसकी आवाज को शांत रखने का आदेश दिया। लोगों को मानना है कि आज भी हनुमान जी पहरा दे रहे हैं, तभी उसकी आवाज नहीं आती है।
मंदिर की नहीं आती परछाईं
हर चीज की परछाईं आपने कभी न कभी देखी होगी, फिर चाहे वह किसी इंसान की हो या किसी वस्तु की। लेकिन जगन्नाथ मंदिर की परछाईं दिन की तेज धूप में भी कभी दिखाई नहीं देती है। यह बात लोगों को काफी हैरान करती है।
लकड़ी से बनीं मूर्तियां
आपने अधिकतर मंदिरों में खास धातु या पत्थर से बनीं मूर्तियों को देखा होगा लेकिन जगन्नाथ मंदिर में लकड़ी से बनी मूर्तियां रखी हुई हैं। खास बात ये है कि इन मूर्तियों में कील या किसी भी तरह के लोहे का इस्तेमाल नहीं किया गया है। ये सभी मूर्तियां नीम की लकड़ी से बनी हुई हैं और हर 12 साल के बाद इन्हें गुप्त प्रक्रिया के तहत बदला जाता है।
प्रसाद बनाने का तरीका
जगन्नाथ पुरी का प्रसाद भी अनोखे तरीके से तैयार होता है। प्रसाद के लिए 7 बर्तनों को एक के ऊपर एक रखकर चढ़ाया जाता है, आमतौर पर पहले सबसे नीचे वाली चीज पकनी चाहिए लेकिन मंदिर में पहले सातवां भगोने वाला प्रसाद तैयार होता है और फिर उसके बाद छठा, पांचवां ऐसे करते हुए आखिरी वाला पकता है। साथ ही मंदिर में बनने वाला प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता है और न ही कभी बचता है।
लेखक के बारे में
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