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29 जून, 2020|1:17|IST

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वायु प्रदूषण से हर साल होती हैं 7 करोड़ मौत, वैज्ञानिकों ने धरती पर ढूंढ़ा सबसे स्वच्छ हवा वाला स्थान

world environment day

वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने धरती पर मौजूद सबसे स्वच्छ हवा वाले स्थान को ढूंढ़ लिया है। यह हवा धरती के दक्षिणी छोर पर स्थित अंटार्कटिक महासागर के ऊपर चलती है। वैज्ञानिकों ने कहा कि यह हवा संसार में सबसे स्वच्छ है। यह मानव गतिविधियों के कारण उत्पन्न होने वाले प्रदूषक कणों से रहित है। 

अपने तरह के इस पहले शोध में अंटार्कटिक महासागर के बायोएरोसोल का अध्ययन किया गया। कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस दौरान एक ऐसे वायुमंडीलय क्षेत्र का पता लगाया जिस पर मानव गतिविधियों के कारण कोई फर्क नहीं पड़ता। प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज पत्रिका में गत सोमवार को प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इस क्षेत्र को सही मायने में पवित्र करार दिया। 

हवा प्रदूषक कणों से मुक्त: 
शोधकर्ताओं ने पाया कि अंटार्कटिक महासागर के ऊपर चलने वाली हवा मानवीय गतिविधियों के कारण उत्पन्न होने वाले एरोसोल (हवा में निलंबित कण) से मुक्त थी। इस हवा में जीवाश्म ईंधन, फसलों की कटाई, ऊर्वरक और अपशिष्ट जल निपटारे आदि के कारण उत्पन्न होने वाले कण मौजूद नहीं थे। वायु प्रदूषण का कारण ये एरोसोल ही हैं। एयरोसोल हवा में ठोस-द्रव या गैस के रूप मे मौजूद रहने वाले कण हैं। 

 वैज्ञानिकों को करना पड़ा सघर्ष: 
 मानवीय गतिविधियों के कारण तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन की वजह से वैज्ञानिकों को धरती पर एक ऐसा स्थान ढूंढ़ने में काफी संघर्ष करना पड़ा, जो मानवीय गतिविधियों से अछूता हो। हालांकि प्रोफेसर सोनिया क्रीडेनवीस और उनकी टीम ने संभावना जताई कि अंटार्कटिक सागर के ऊपर मौजूद हवा मानवीय गतिविधियों और धूल के कणों के कारण सबसे कम प्रभावित होगी।

शोध में शामिल वैज्ञानिक और इस अध्ययन के सहलेखक थॉमस हिल ने कहा कि अंटार्कटिक महासागर के बादलों के गुणों को एरोसोल नियंत्रित करते हैं जो महासागर की जैविक प्रक्रिया से भी जुड़े हैं। ऐसा लगता है कि अंटार्कटिक महासागर दक्षिणी महाद्वीप से आए सूक्ष्मजीवों और पोषक तत्वों के फैलाव से अलग-थलग है।  
 
महाद्वीपों के सूक्ष्म जीव तक नहीं पहुंच सके: 
वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिक महासागर के ऊपर चलने वाली वायु का नमूना लेकर उसमें मौजूद सूक्ष्म जीवों के अध्ययन में पाया कि इनकी उत्पत्ति समुद्र में हुई है। इन सूक्ष्म जीवो के बैक्टीरियल कंपोजिशन के आधार पर दावा किया गया कि काफी दूर स्थित महाद्वीपों पर मौजूद एयरोसोल अंटार्कटिक महासागर की हवा तक नहीं पहुंच सके। यह अध्ययन पूर्व के उस अध्ययन के विपरीत है जिसमें कहा गया है कि ज्यादातर सूक्ष्म जीव महाद्वीपों की ओर से आने वाले हवा के जरिये फैलते हैं। 

वायु प्रदूषण से सालाना सात करोड़ मौतें: 
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक वायु प्रदूषण के कारण दुनियाभर में सालाना सात करोड़ लोगों की मोत होती है। वायु प्रदूषण से दिल की बीमारी, स्ट्रोल और कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। 

शहर के  80 फीसदी लोग प्रदूषित हवा लेने को मजबूर: 
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक शहर की 80 फीसदी आबादी ज्यादा प्रदूषित हवा लेने को मजबूर है। निम्न और मध्यम अर्थव्यवस्था वाले देशों में वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर है। 

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  • Web Title:World environment day 2020: Do you know Every year around 7 million deaths occur just due to air pollution but now scientists find the cleanest air place on earth