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24 अक्तूबर, 2020|5:07|IST

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गर्भ में ही पनपने लगती है टाइप-1 डायबिटीज, अध्ययन में खुलासा

pregnant women did not manage pregnancy during the corona period in kanpur of uttar pradesh know the

टाइप-1 डायबिटीज शिशु के गर्भ में पलने के दौरान भी पनप सकती है। ब्रिटेन स्थित एक्जिटर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने हालिया अध्ययन के आधार पर यह दावा किया है। पहले माना जाता था कि प्रतिरोधक तंत्र की अतिसक्रियता से होने वाली यह बीमारी शिशु के छह महीने की उम्र लांघने के बाद ही उभरती है।

मुख्य शोधकर्ता डॉ. एलिजाबेथ रॉबर्ट्सन के मुताबिक टाइप-1 डायबिटीज में प्रतिरोधक सेल्स इंसुलिन का उत्पादन करने वाली बीटा कोशिकाओं पर हमला कर उन्हें नष्ट कर देती हैं। इससे शरीर में इंसुलिन पैदा नहीं हो पाता और ब्लड शुगर का स्तर बेकाबू होने लगता है। ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के लिए मरीज को इंसुलिन के इंजेक्शन लेने पड़ते हैं।

ताजा अध्ययन से पता चला है कि टाइप-1 डायबिटीज शिशु के पैदा होने से भी पहले पनप सकती है। यह अध्ययन प्रतिरोधक तंत्र में आने वाले विकार और टाइप-1 डायबिटीज के विकास की गहरी समझ हासिल कर बीमारी की रोकथाम के उपाय खोजने में मदद करेगा। 

रॉबर्ट्सन और उनके साथियों ने टाइप-1 डायबिटीज से जूझ रहे 400 बच्चों की जेनेटिक संरचना का विश्लेषण किया। इस दौरान पाया कि जन्म के समय कई बच्चों का वजन सामान्य से कम था। वजह खंगालने पर इंसुलिन के उत्पादन में कमी इसके लिए जिम्मेदार मिली।

रॉबर्ट्सन के मुताबिक इंसुलिन भ्रूण के विकास के लिए अहम हार्मोन में शामिल है। हालांकि, जिन गर्भस्थ शिशुओं की प्रतिरोधक कोशिकाएं अतिसक्रिय हो जाती हैं, उनमें पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन पैदा नहीं हो पाता। इससे वे शारीरिक विकास के मामले में पिछड़ जाते हैं। अध्ययन के नतीजे ‘जर्नल डायबिटेलॉजिया’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।

दो तरह की डायबिटीज- 
-टाइप-1 डायबिटीज : इसमें अग्नाशय इंसुलिन का उत्पादन करने में सक्षम नहीं होता, इंजेक्शन के जरिये इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ती है, टाइप-1 डायबिटीज आमतौर पर जन्मजात होती है
-टाइप-2 डायबिटीज : इसमें या तो अग्नाशय पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन पैदा नहीं करता या फिर उसके इस्तेमाल की शरीर की क्षमता कमजोर पड़ जाती है, मोटापा और खराब जीवनशैली मुख्य वजह

इसलिए जरूरी है इंसुलिन-
-इंसुलिन अग्नाशय में पैदा होने वाला एक अहम हार्मोन है, जो ग्लूकोज को ऊर्जा में तब्दील कर मोटापे और डायबिटीज की समस्या को दूर रखता है।

लापरवाही जानलेवा साबित होगी
-ब्लड शुगर अनियंत्रित होने पर आंखों की रोशनी जाने, किडनी खराब होने और अंग सड़ने के साथ ही हार्ट अटैक व स्ट्रोक से मौत का खतरा बढ़ जाता है।

महामारी बनती बीमारी
-46.3 करोड़ वैश्विक आबादी के डायबिटीज पीड़ित होने का अनुमान
-7.8 करोड़ मरीज दक्षिणपूर्वी एशिया में, इनमें 7.7 करोड़ भारतीय शामिल
-25 फीसदी से अधिक रोगी खुद के बीमारी से जूझने की खबर से अनजान
-70 करोड़ तक पहुंच सकता है डायबिटीज रोगियों का आंकड़ा 2045 तक
(स्रोत : अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज संघ की साल 2019 की रिपोर्ट।)

इंसुलिन की कमी
-08 करोड़ डायबिटीज रोगियों को इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ने का अनुमान 2030 तक
-20 फीसदी इजाफा होने की आशंका जताई गई है इंसुलिन की मांग में एशिया-अफ्रीका में
-3.3 करोड़ डायबिटीज रोगियों को मौजूदा समय में इंसुलिन तक पहुंच हासिल नहीं है दुनियाभर में

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  • Web Title:Type 1 diabetes starts to develop in the womb itself study reveals