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स्वस्तिक बनाने में ये गलती कर देती है उलटा असर, जानें सही तरीका

Diwali 2023 Rangoli: दिवाली की रंगोली स्वस्तिक के बिना अधूरी है। लोग तिजोरी, पूजा स्थल या प्रवेशद्वार पर रंगोली के साथ यह निशान बनाते हैं। इसे बनाने के कुछ नियम होते हैं जिन्हें हमेशा ध्यान में रख

स्वस्तिक बनाने में ये गलती कर देती है उलटा असर, जानें सही तरीका
Kajal Sharmaलाइव हिंदुस्तान,मुंबईSun, 12 Nov 2023 04:50 PM
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दिवाली पर हर कोई रंगोली के साथ स्वस्तिक जरूर बनाता है। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम की शुरुआत करते वक्त स्वस्तिक का निशान बनाते हैं। इसे शुद्धता, सूर्य, संपन्नता, शुभता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। मंदिरों, गाड़ियों, घरों वगैरह में आपको स्वस्तिक का चिह्न मिल जाएगा। त्योहारों के वक्त रंगोली के साथ भी यह निशान बनाया जाता है। स्वस्तिक की चार भुजाओं के लोग अलग-अलग मतलब बताते हैं। जैसे 4 दिशाएं, 4 वेद, जीवन के 4 लक्ष्य, 4 युग वैगरह। वहीं इन्हें बनाने का एक क्रम और एक तरीका होता है। गलती होने पर इसका उद्देश्य बदल जाता है। अगर आप इस चिह्न को बनाते हैं तो जान लें कि इसे बनाने का सही तरीका क्या है।

घड़ी की सुई चलने की दिशा में बनाएं
स्वस्तिक का निशान हमेशा क्लॉकवाइस यानी घड़ी की सुइयों की दिशा में बनाया जाता है। वास्तु में भी स्वस्तिक का काफी महत्व है। माना जाता है कि इससे घर में पॉजिटिव एनर्जी आती है। किसी जगह पर अगर वास्तु दोष हो तो वहां स्वस्तिक बनाने की मान्यता है। 

रोली या हल्दी से बनाएं
स्वस्तिक बनाने के लिए रोली, चंदन, हल्दी, कुमकुम या सिंदूर का इस्तेमाल किया जाता है। रंगोली में कई लोग रंगों का इस्तेमाल भी करने लगे हैं। 

ऊपर की दिशा में बनाएं 
ज्योतिष एक्सपर्ट बताते हैं कि स्वस्तिक को ऊपर से नीचे की तरफ नहीं बल्कि नीचे से ऊपर की ओर बनाया जाता है। इसकी भुजाएं बीच में क्रॉस नहीं करनी चाहिए। स्वस्तिक का दायां हिस्सा पहले इसके बाद बायां हिस्सा बनाएं। किनारों पर जो झुकाव होता है उन्हें भी घड़ी की सुई की दिशा में बनाना है। 

सबसे पहले डॉट से करें शुरुआत
सबसे पहले जमीन पर सिंदूर से तीन डॉट रखें। इसके समानांतर नीचे 3 डॉट रखें। अब इसके नीचे भी पैरलल 3 डॉट बना लें। इस तरह से 9 डॉट बन जाएंगे। अब इन डॉट्स को नीचे से ऊपर की ओर ऐसे मिलाना है कि स्वस्तिक की चारों भुजाएं बन जाएं।

दायां हिस्सा पहले बनाएं
सबसे पहले 9वें डॉट को ऊपर बढ़ाकर ठीक ऊपर वाले डॉट से मिला दें।  अब इसे बीच वाले डॉट की ओर ले जाएं। बीच से ऊपर वाले डॉट के मिलाकर पहली लाइन के तीसरे डॉट के मिलाएं। दाएं तरफ के डॉट्स नीचे से ऊपर की तरफ जुड़ जाएंगे । इसके बाद हम बाएं तरफ के डॉट से सेंटर को जोड़ेंगे। यहां भी नीचे से ऊपर की तरफ लाते हुए चारों भुजाएं पूरी कर लेंगे। 

ऊपर बढ़ना तरक्की का परिचायक
स्वस्तिक के बीच में जो 4 पॉइंट्स बने होते हैं उनको भी दाएं हिस्से में पहले बनाएं। स्वस्तिक के दोनों तरफ रिद्धि-सिद्धि के दो निशान बनते हैं। इन्हें भी नीचे से ऊपर की तरफ बनाते हैं। नीचे से ऊपर जाना ग्रोथ या उन्नति का परिचायक माना जाता है। क्लिक करके देखें बनाने का तरीका

उत्तर-पूर्व दिशा है शुभ
स्वस्तिक हल्दी या सिंदूर से बनाना शुभ माना जाता है। इसे घर की उत्तर-पूर्व दिशा में बनाने की मान्यता है। दिवाली पर प्रवेश द्वार और तिजोरी पर भी स्वस्तिक का निशान बनाया जाता है। 

इस बात का रखें ध्यान
ध्यान रखें स्वस्तिक की भुजाओं की दिशा उलटी होने पर यह तंत्र या काली  पूजा में इस्तेमाल किया जाने वाला सौवास्तिक बन जाता है। 

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