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10 अप्रैल, 2020|2:30|IST

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बुक कवर में बदलाव की बयार, ऐसे बदल रही है किताबों की दुनिया

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पेड़-पौधों के चित्रों से लेकर अक्षरों की अदाकारी तक से सजे बुक कवर्स को देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि किताबों को पेश करने का ढंग बदल रहा है। ऑनलाइन किताबों के बढ़ते चलन के बावजूद यह बदलाव जारी है। दुनियाभर के आर्टिस्ट्स के लिए यह एक वरदान साबित हो रहा है। लोग कह सकते हैं कि यह सब मार्केटिंग का फंडा है। लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि किताबों की शान बढ़ाने में उनके कवर काफी अहम भूमिका निभाते हैं। उनकी हरी-नीली, पारंपरिक एकरंगी और अन्य तमाम छटाएं पाठकों को बरबस अपने रहस्यलोक में खोने पर मजबूर कर देती हैं।  

फूल-पत्तियों का जादू
अगर आपने अमिताव घोष का उपन्यास ‘गन आइलैंड’ देखा है, तो गौर किया होगा कि उसके कवर पर टहनियों और फूलों से लिपटे एक सांप का चित्र बना है। यह किसी साजिश-सा लगता है। इस दृश्य का श्रेय बेंगलुरू की रहने वाली चित्रकार निरूपा राव को दिया जा सकता है, जो वनस्पतियों के नयनाभिराम चित्रण में माहिर हैं। निरूपा कहती हैं, ‘प्राकृतिक वनस्पतियां और जीव आदि मेरे हस्ताक्षर बन चुके हैं।’ आगे वह कहती हैं, ‘मैं किसी किताब के कवर को देखकर उसके बारे में धारणा बनाने वालों में से एक हूं। मुझे लगता है कि यह भी ध्यान देना जरूरी है कि किताब के कवर पर बने चित्रों और उसमें लिखे अल्फाजों के बीच सही और संतुलित तालमेल बैठे।’
‘गन आइलैंड’ उपन्यास के कवर में निरूपा ने सुंदरी और बरमन मैनग्रोव के फूलों को शामिल किया, क्योंकि इसमें सुंदरबन की पृष्ठभूमि है। किताबों और वनस्पति विज्ञान के तत्वों को संयोजित करने के बारे में निरूपा कहती हैं, ‘मेरा तरीका यह है कि मैं किताब पढ़कर उसके कुछ ऐसे अंश चुनती हूं, जिनसे मुझे कवर की कल्पना करने में मदद मिलती है।’ उनका मानना है कि वनस्पतियों में किसी क्षेत्र की सुंदरता को परिभाषित करने की असाधारण शक्ति है और उनके विशेष अर्थ होते हैं। यही वजह है कि ‘सोर’ शीर्षक वाली एक आगामी पुस्तक के लिए उन्होंने तितलियों और पक्षियों से भरे एक गुब्बारे के अति यथार्थवादी चित्र का उपयोग किया है।


नारीवाद के निशां
दिल्ली की रहने वाली प्रोडक्शन एडिटर सुकृति अना स्टेनली करीब दो साल से किताबों के कवर बना रही हैं। उनका कहना है कि उनका काम अलग-अलग विचारों के जरिये नारीवाद के विचार की खोज से जुड़ा हुआ है। सुकृति मानती हैं कि उन्हें काले और सफेद रंगों का इस्तेमाल करना पसंद हैं। वह कहती हैं, ‘हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारे तमाम कामों में अंतर्निहित कल्पना के रूप में नारीवाद मौजूद रहे।’ उन्होंने कई तरह के बुक कवर बनाए हैं। मसलन, ग्राफिक, कथा-कहानी, कथेतर और इनके अलावा भी बहुत कुछ। प्रिया सरुकाई चबेरिया की किताब ‘क्लोन’ के लिए सुकृति का काम साहित्यिक मिजाज वाला है, जो विज्ञान कथा के साथ जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, ‘दिलचस्प बात यह है कि जिस बुक कवर की सबसे ज्यादा चर्चा हुई उसका डिजाइन एक कोलाज था, जिसके केंद्र में एक तोता और कई अलग-अलग चीजें थीं। इनकी प्रेरणा किताब से ही ली गई थी। ‘नो नेशन फॉर वीमेन’ और ‘द एम्प्टी रूम’ सुकृति की पसंदीदा किताबों में शामिल हैं।


अक्षरों की अदा  
साल 2018 की शुरुआत से किताबों के कवर बनाना शुरू करने वाली बेंगलुरू की नोरजिन नोरभु हर कवर  के लिए अलग तरीके से सोचती हैं। उनका मानना है कि किताबों का कवर बनाने के लिए शोध करना जरूरी है। खासकर तब यह और जरूरी हो जाता है, जब किताब किसी विशेष संस्कृति या किसी विशेष क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हो। अनुंगला जो लोंगकुमेर की किताब ‘द मेनी दैट आइ एम’ का कवर नोरजिन का पसंदीदा है। इस पर उन्होंने काफी काम किया था। इसकी बारीकी देखने लायक है। इमसें नगालैंड की कहानियां हैं। इसी कारण इसके कवर पर नगालैंड की पहाड़ियों और घाटियों में मिर्च तोड़ने वाली महिलाओं का चित्रण किया गया है। इसमें मुख्य रूप से हरे और गुलाबी रंगों का प्रयोग किया गया है, जो काफी आकर्षक है।


नोरजिन कहती हैं, ‘मुझे अल्फाजों और चित्र को एक-दूसरे के साथ रखना पसंद है। ऐसा करने से एक संगठित दृष्टिकोण और हस्तशिल्प जैसी अनुभूति होती है। यह विचार मुझे उसी समय आ गया, जब मैंने पहली बार बुक कवर बनाना शुरू किया था।’ दिल्ली की रहने वाली पिया अलीजे हजारिका कहती हैं कि किताबों के कवर के आइडिये उन्हें कलात्मक अक्षरों से मिले। वह कहती हैं,‘चित्रों के साथ लिखे अल्फाज मेरी पहचान हैं, क्योंकि मैं बहुत सारे बारीक ब्योरों के साथ चित्रण करना पसंद करती हूं। पाठ और चित्र का सहज एकीकरण मुझे पसंद है।’ उन्होंने अनंत सामंत की किताब ‘आवा मारू’ पर भी काम किया है। पिया 2014 से ही किताबों के कवर बनाती रही हैं। उन्होंने हर तरह के बुक कवर्स पर काम किया है।
कवर को दोबारा बनाना
चर्चित किताबों के कवर दोबारा बनाने का चलन दुनिया भर में बहुत पसंद किया जा रहा है। भारत में भी यह चलन शुरू हो चुका है, हालांकि अभी यह बहुत अधिक प्रचलित नहीं है। अगर ऐसा होता है तो पिया ‘एडवेंचर्स ऑफ आमिर हम्जा’, रोहिंटन मिस्त्री के उपन्यास ‘ए फाइन बैलेंस’ या अरुंधति रॉय के उपन्यास ‘गॉड ऑफ स्माल थिंग्स’ के कवर फिर से बनाना पसंद करेंगी।
सुकृति अना स्टेनली के दिमाग में भी गौरी रामनारायण की किताब ‘सॉन्ग्स ऑफ सुरेंदर’ है। निरूपा के मन में भी बहुत कुछ है। वह पीटर सस्किन्ड की किताब ‘परफ्यूम : द स्टोरी ऑफ ए मर्डरर’ का कवर फिर से बनाना चाहेंगी, जिसके बारे में उन्हें विश्वास है कि वह यादगार छवियों से भरापूरा होगा। अपने जादुई यथार्थवाद के लिए मशहूर गैब्रियल गार्सिया मार्के ज का महान उपन्यास ‘वन हन्ड्रेड ईयर्स ऑफ सॉलिट्यूड’ और अपनी सरस कोलंबियाई पृष्ठभूमि के लिए मशहूर अमिताव घोष का उपन्यास ‘सी ऑफ पपीज’ भी उनकी सूची में हैं। पिया का निष्कर्ष है, ‘पहले बुक कवर्स को केवल पारंपरिक दुकानों में ध्यान आकर्षित करने के लिए संघर्ष करना था। लेकिन अब उनकी प्रतिस्पर्धा इंटरनेट पर दुनियाभर की किताबों से है।  

-नैसिमेंटो पिंटो

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  • Web Title:The changing fashion of book cover