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हिंदी न्यूज़ लाइफस्टाइलक्रॉन्स रोग में तनाव लेने से बढ़ती है शरीर में बैक्टिीरिया की ताकत, जानें क्या है ये रोग और इसके लक्षण

क्रॉन्स रोग में तनाव लेने से बढ़ती है शरीर में बैक्टिीरिया की ताकत, जानें क्या है ये रोग और इसके लक्षण

एजेंसी,टोरंटोManju Mamgain
Mon, 29 Nov 2021 11:16 AM
क्रॉन्स रोग में तनाव लेने से बढ़ती है शरीर में बैक्टिीरिया की ताकत, जानें क्या है ये रोग और इसके लक्षण

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क्रॉन्स रोग में तनाव से शरीर में बैक्टीरिया की ताकत बढ़ती है। इससे मरीज की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। वैज्ञानिकों की तरफ से किए गए एक अध्ययन में यह नतीजे सामने आए हैं। यह अध्ययन नेचर कम्युनिकेशंस नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। आंतों में होने वाले रोगों के एक समूह को क्रॉन्स रोग कहा जाता है। वर्तमान में दुनियाभर की बड़ी आबादी इस रोग से पीड़ित है 

तनाव ई कोलाई बैक्टीरिया को बढ़ाता है
कनाडा के ओंटारियो में मैकमास्टर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की एक टीम ने चूहों पर तैयार किए एक मॉडल की मदद से क्रॉन्स रोगियों पर मनोवैज्ञानिक तनाव के प्रभाव की जांच की। इस दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि चूहों में मनोवैज्ञानिक तनाव के कारण आंत में ई कोलाई (बैक्टीरिया) की वृद्धि हुई। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि कैसे तनाव ने ई कोलाई जैसे बैक्टीरिया को आंत में बढ़ा दिया। और आंत को बैक्टीरिया के हमले से बचाने वाले साइटोकाइन को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित किया। शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि तनाव की वजह से शरीर की वह कोशिकाओं भी समाप्त हो गई, जो एक प्रोटीन की मदद से आंत की परत की रक्षा करता है। शोधकर्ताओं का मानना ​​​​है कि उनके अध्ययन से नए उपचारों का विकास हो सकता है।

आंत पर भी असर डालता है तनाव
पिछले कुछ वर्षों में तनाव और मानव स्वास्थ्य का संबंध और प्रभावों के बारे में बहुत सारे शोध हुए हैं। शोधकर्ताओं ने पाया है कि तनाव से स्ट्रोक, अल्जाइमर रोग और मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही तनाव आंत पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है, जिससे कब्ज जैसी समस्या हो सकती है। 

क्या है  क्रॉन्स रोग 
 क्रॉन्स रोग एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो पेट और आंत (जठरांत्र संबंधी मार्ग) की सूजन का कारण बनती है। जठरांत्र संबंधी मार्ग में वह सब कुछ शामिल होता है, जो किसी व्यक्ति के शरीर को खाने, पचाने और भोजन और अपशिष्ट को बाहर निकालने के लिए आवश्यक होता है। इसमें मुंह, पेट, आंत और मलाशय शामिल हैं। इस रोग के लक्षण में दस्त, कब्ज, भूख में कमी, वजन घटना, जोड़ों में सूजन, थकान शामिल है। उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी यूरोप में यह सबसे प्रमुख रोग है, जो एक लाख लोगों में से 300 लोगों को प्रभावित करता है। 

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