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तनाव से रहना है दूर तो तीखा खाएं, ये उपाय भी रखते हैं डिप्रेशन को दूर

तनाव दिल और दिमाग की सेहत के लिए कितना हानिकारक है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। बावजूद इसके कभी इंटरनेट की धीमी गति तो कभी ट्रैफिक जाम, कभी कामवाली का न आना तो कभी अनचाहे मेहमानों की दस्तक, इनसान न...

तनाव से रहना है दूर तो तीखा खाएं, ये उपाय भी रखते हैं डिप्रेशन को दूर
Manju Mamgainएजेंसी,न्यूयॉर्कSun, 15 Nov 2020 01:08 PM
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तनाव दिल और दिमाग की सेहत के लिए कितना हानिकारक है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। बावजूद इसके कभी इंटरनेट की धीमी गति तो कभी ट्रैफिक जाम, कभी कामवाली का न आना तो कभी अनचाहे मेहमानों की दस्तक, इनसान न चाहते हुए भी स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ का स्तर बढ़ा ही लेता है। 

हालांकि, अमेरिका की मशहूर मनोरोग चिकित्सक नायडीन जॉनी की मानें तो तनाव नियंत्रित रखना तीखा खाना खाने जितना आसान है। प्रकृति के साथ समय गुजारना, मार्शल आर्ट्स का अभ्यास करना और योग-अध्यात्म का सहारा लेना भी ‘फील गुड’ का एहसास जगाने में खासा मददगार साबित हो सकता है।

चार का चमत्कार
1.मिर्च-मसालों से दोस्ती

-विभिन्न अध्ययनों में मिर्च में मौजूद ‘कैपसेसिन’ को सेरोटोनिन और एंडॉर्फिन जैसे ‘फील गुड’ हार्मोन का स्त्राव बढ़ाने में असरदार पाया गया है। क्लीवलैंड क्लीनिक के हालिया शोध में तो नियमित रूप से लाल मिर्च का सेवन करने वालों में हृदयरोग और कैंसर से असामयिक मौत का खतरा क्रमश: 26 फीसदी व 23 प्रतिशत कम मिला था।

2.मार्शल आर्ट्स का अभ्यास
-कराटे, ताइक्वांडो और एकिडो जैसी मार्शल आर्ट पद्धतियां न सिर्फ शरीर, बल्कि मस्तिष्क को भी विभिन्न खतरों से निपटने के लिए तैयार करती हैं। इनके नियमित अभ्यास से ‘फील गुड’ हार्मोन एंडॉर्फिन का स्त्राव बढ़ता है, जो आत्मविश्वास में इजाफा करने के साथ ही नकारात्मक भावनाओं से निजात दिलाने में कारगर है।

3.प्रकृति की गोद में समय बिताना
-जापान में ‘शिनरिन-योकू’ यानी प्रकृति के संपर्क में रहकर पांचों इंद्रियों को जगाने की प्रक्रिया को डिप्रेशन के इलाज में प्रमुखता से इस्तेमाल किया जाता है। विशेषज्ञ इसके तहत घांस पर नंगे पांव चलने, फूल-पौधों की खूबसूरती निहारने, चिड़ियों की चहचहाहट सुनने की सलाह देते हैं, जिससे ‘कॉर्टिसोल’ के स्तर में कमी लाने में मदद मिलती है।

4.योग-अध्यात्म का साथ
-नायडीन ने ध्यान और श्वास क्रियाओं के अभ्यास को स्ट्रेस हार्मोन के स्त्राव में कमी लाने व फील गुड हार्मोन का उत्पादन बढ़ाने में असरदार करार दिया। उन्होंने बताया कि इनसान जब तनाव में होता है, तब वह छोटी-छोटी सांस लेता है। योग-अध्यात्म उसे लंबी-गहरी सांस लेने की कला सिखाते हैं, जिससे तन-मन को सुकून पहुंचाने में मदद मिलती है।

ये उपाय भी आजमाएं
दूसरों की मदद

-2020 की शुरुआत में प्रकाशित कॉरनेल यूनिवर्सिटी के अध्ययन में सड़क पार करने या फिर राशन-दवा लाने में किसी की मदद करने से ‘फील गुड’ का एहसास जगने की बात सामने आई थी।

खानपान पर ध्यान
-‘मॉलीक्यूलर साइकैटरी’ में छपे यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के हालिया शोध में विटामिन-डी और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर मेडिटरेनियन डाइट को मूड सुधारने में असरदार करार दिया गया था।

रचनात्मक कार्य
-क्रिएटिविटी रिसर्च जर्नल में प्रकाशित चीनी शोध में सिलाई-बुनाई, कैलिग्राफी, पेटिंग जैसे रचनात्मक कार्यों को रोजमर्रा के तनाव से ध्यान भटकाने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मददगार पाया गया था।

 

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